Lok Sabha Chunav:चाचा के ऑफर पर चिराग का छलका दर्द, कहा- क्यों मेरे साथ ऐसा किया, मेरी लड़ाई अलग
Chirag Paswan On Pashupati Paras: बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी दांवपेंच जारी है। एनडीए और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों के नेता सभी 40 सीटों पर जीत दर्ज करने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
सियासी दांवपेंच के बीच एनडीए की सहयोगी दलों में शामिल चिराग पासवान की पार्टी लोजपा रामविलास को पशुपति कुमार पारस (लोजपा) का साथ मिल गया है। क्योंकि सीट बंटवारे से नाराज़ पारस वापिस से एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन अभी भतीजे को चाचा का साथ मंज़ूर नहीं है।

लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने हाजीपुर से चुनावी ताल ठोक चुके हैं। कभी इस सीट के लिए चाचा और भतीजे के बीच काफी तीखी बयानबाज़ी हुई थी। यहां तक के पशुपति पारस ने यह तक कह दिया था कि चिराग तो नया है, पता नहीं एनडीए मे रहेगा भी या नहीं हम तो एनडीए के सच्चे सिपाही हैं।
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सियासी गलियारों में यह अटकले लगाई जा रही थी कि चिराग को हाजीपुर सीट पर दावा छोड़ना पड़ सकता है। लेकिन सीट बंटवारे के बाद चिराग का क़द और बढ़ गया, पशुपति पारस की पार्टी को एक भी सीट नहीं दी गई, इससे नाराज़ हो कर पारस ने केंद्र की मोदी कैबिनेट में मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।
अब फिर से वह (पशुपति पारस) सारे शिकवे गिले भुलाकर एनडीए का प्रचार प्रसार करने में जुट गए हैं। वहीं जब चिराग पासवान से पूछा गया कि अब तो चाचा का साथ मिल गया है, तो मज़बूती मिलेगी। इस पर चिराग पासवान का दर्द छलका, उन्होंने भावुक होते हुए कहा पता नहीं क्यों?
चिराग पासवान ने कहा कि अभी जो आशीर्वाद चाचा दे रहे हैं, पहले यह आशीर्वाद क्यों नहीं मिला? मुझे परिवार से दूर करते हुए घर से क्यों निकाल दिया? बुरे वक्त में चाचा ने बुरा बर्ताव किया। परिवार के साथ आने के सवाल पर मीडिया से कहते थे, नेवर ऐसा कभी नहीं हो सकता।
घर के बाह डेढ़ घंटा खड़ा रहने पर दरवाज़ा खुला, मंझली मां ने दरवाज़ा खोला, उनके पैर छूने चाहे तो कदम पीछे हटाते हुए कहा कि तुम्हारे साथ जो हुआ, अच्छा हुआ। इतना सबकुछ होने के बाद चाचा समझौता क्यों करना चाहते हैं। अब मेरी लड़ाई अलग है, मैं पारिवारिक विवादों से ऊपर उठ चुका हूं। मेरा टारगेट एनडीए को बिहार की सभी 40 सीटें जीतकर देना है।












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