'खुला ही रहता है दरवाजा तो....' महागठबंधन में नीतीश की वापसी को लेकर लालू यादव का बहुत बड़ा बयान
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार के महागठबंधन में वापसी को लेकर बहुत बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि उनके गठबंधन में वापसी के लिए अभी भी दरवाजा खुला हुआ है। उन्होंने कहा है कि नीतीश आएंगे तो देखेंगे।
लालू यादव ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर भी बड़ी बात कही है और लोकसभा चुनावों में इंडिया अलायंस की जीत का भी दावा किया है। राहुल के बारे में उन्होंने कहा है कि उनमें कोई कमी नहीं है।

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खुला ही रहता है दरवाजा तो- नीतीश की वापसी के सवाल पर बोले लालू
दरअसल, शुक्रवार को जब पत्रकारों ने आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव से जेडीयू चीफ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महागठबंधन में फिर से मौका देने को लेकर सवाल किया तो वे बोले, '...अब आएंगे तो देखेंगे....खुला ही रहता है दरवाजा तो.......'
राहुल गांधी में कोई कमी थोड़े है- लालू
वहीं जब उनसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर सवाल किया गया तो राजद प्रमुख ने कहा, 'कोई कमी थोड़े है....कोई कमी नहीं है......'। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन की जीत का भी दावा किया है।
लालू के बयान के निकल सकते हैं कई सियासी मायने
नीतीश कुमार पर लालू के ताजा बयान के कई सियासी मायने निकाले जा सकते हैं। नीतीश कुमार ने इतनी बार पाला बदल लिया है कि लालू के बयान पर बिहार के राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर फिर से सियासी खिचड़ी पकनी शुरू हो सकती है।
वैसे इस बार नीतीश ने एनडीए में वापसी के बाद कहा है कि 'जहां थे वहीं वापस आ गए हैं और अब हम साथ रहेंगे....अब आगे कहीं और जाने का प्रश्न ही नहीं है।'
बीते जनवरी महीने में ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की मोदी सरकार की घोषणा के बाद नीतीश ने भाजपा के अगुवाई वाली गठबंधन में वापसी कर ली थी।
नीतीश का इंडी अलायंस से हुआ था मोहभंग
इससे पहले 2022 के अगस्त में नीतीश एनडीए से नाता तोड़कर लालू के शरण में चले गए थे। महागठबंधन में शामिल होने के बाद ही उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा-विरोधी दलों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिशें शुरू कीं।
पिछले साल जून में वे इसमें सफल भी हो गए और 28 विपक्षी दलों को साथ लेकर इंडी अलायंस का गठन करवाया। लेकिन, जब कांग्रेस ने गठबंधन को कब्जे में लेना शुरू किया और नीतीश को न तो उसका संयोजक बनने का मौका मिला और ना ही वे उसके चेहरे के तौर पर पेश किए गए तो उनका मोहभंग होना शुरू हो गया।
इंडी अलायंस की लगातार डंवाडोल होती स्थिति और राजद की ओर से बढ़ते दबाव के बीच में जब कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा हुई तो नीतीश के लिए रास्ता सुलभ हो गया और उन्होंने एनडीए में वापसी कर लेना ही मुनासिब समझा।












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