Kanwar Yatra 2023: पहली बार डाक कांवर में नहीं होंगी कृष्णा बम, अब श्रावणी मेले सिर्फ़ रहेंगी पुरानी यादें
Krishna Bam Kanwar Yatra Latest News: बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले की रहने वाली कृष्णा बम के डाक कांवड में इस बार दर्शन नहीं हो पाएंगे। 1982 से लगातार 2022 तक डाक कांवड लेकर 24 घंटे के अंदर देवघर पहुंचती रहीं मां कृष्णा बम की अब श्रावणी मेले में यादें ही रहेंगी।
मां कृष्णा बम पिछले 40 सालों से डाक कांवड लेकर देवघर पहुंचने का अनोखा रिकॉर्ड बना चुकी हैं। 24 घंटे के अंदर जलार्पण करने वाली मां कृष्णा बम जल चढ़ाने में परेशानी भी हुई थी। स्वास्थ्य का हवाला देते हुए मां कृष्णा बम ने डाक कांवड से विश्राम लेने का फ़ैसला लिया है। इस बार कांवड़िया पथ पर उनका दीदार नहीं हो पाएगा।

चकबासु (मुजफ्फरपुर) निवासी 72 वर्षीय कृष्णा रानी (कृष्णा बम या माता बम) इस बार भोलेनाथ को कांवर नहीं चढ़ा रही हैं। आपको बता दें कि कोरोनाकाल को छोड़कर कृष्णा बम पिछले 40 सालों से श्रावणी के पहले सोमवार को हर साल सुल्तानगंज से देवघर के लिए जाती रहीं है।
कृष्णा बम पिछले साल कांवड़ यात्रा के 40 साल पूरे कर चुकी हैं, इस बार वह बाबा को डाक कांवड़ नहीं चढ़ाएंगी। अब वो कांवड़ के साथ बाबा के दरबार में नज़र नहीं आएंगी। ग़ौरतलब है कि कृष्णा बम के नाम से मशहूर कृष्णा रानी ने साल 1975 में पहली बार डाक बम के रूप में गरीबनाथ पहुंची थी। मां कृष्णा बम ने पहली बार पहलेजा से जल लेकर 12 घंटे में 75 KM की दूरी तय कर बाबा गरीबनाथ को चढ़ाया था।
1975 से 1982 तक लगातार 7 साल तक उन्होंने ये किया, इसके बाद 1982 से उन्होंने डाक बम के रूप में सुल्तानगंज से जल लेकर देवघर जाना शुरू किया। डाक कांवड़ की 100 KM से ज़्यादा का सफर 18 घंटे में मुकम्मल कर चुकी हैं। देखने के लिए लोगों की काफी भीड़ जुट जाती है। एक बार कृष्णा बम को झारखंड सरकार की तरफ़ स्कॉट सुविधा भी दी गई थी।
कृष्णा बम को 2019 में देवघर बाबा मंदिर में पूजा करने में परेशानी हुई थी, जिसपर उन्होंने काफी नाराज़गी ज़ाहिर की थी। आपको बता दें कि साल 1989 में कृष्णा बम गंगोत्री से रामेश्वरम तक 4500 KM तक पैदल सफर तय कर चुकीं हैं। वह मुजफ्फरपुर से साइकिल से वैष्णो देवी की 11 बार यात्रा कर चुकी हैं। साइकिल चलाकर वो मुजफ्फरपुर से कामख्या देवी भी जा चुकी हैं।












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