बिहार: बिजली दरें होंगी सस्ती ! युवक ने किया दुनिया की सबसे सस्ती बिजली उत्पादन तकनीक का ईजाद
दसवीं पास छात्र रोहित बिहार जमुई जिले का रहने वाला है, एक छोटे से गांव में रहने के बावजूद उसने ऐसी तकनीक का ईजाद की है जिससे दुनिया की सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन मुमकिन है।
जमुई, 27 अगस्त 2022। बिहार की धरती होनहारों की सरज़मीन भी कहते हैं, वजह यह है कि यहां के लाल अपनी प्रतिभा के ज़रिए विदेशों तक देश और राज्य क नाम रोशन करते रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही प्रतिभा के धनी युवक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बनाने की तकनीक का ईजाद किया है। ग़ौरतलब है कि युवक सिर्फ दसवीं पास है और उसने सात साल की कड़ी मेहनत से तकनीक विकसित किया है।

दसवीं पास छात्र रोहित का ईजाद
दसवीं पास छात्र रोहित बिहार जमुई जिले का रहने वाला है, एक छोटे से गांव में रहने के बावजूद उसने ऐसी तकनीक का ईजाद की है जिससे दुनिया की सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन मुमकिन है। रोहित के सीआईएमपी के इंक्यूबेशन फाउंडेशन से इंक्यूबेटेड स्टार्ट-अप का नाम हाइड्रो लिफ्टिंग टेक्नोलॉजी है। इसे डेवलप करने के लिए रोहित ने 7 सालों तक गहनता से रिसर्च किया जिसके बाद उसे कामयाबी मिली है।

हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक को मिला प्रोविजनल पेटेंट
रोहित के सात साल की शोध के हाइड्रो लिफ्टिंग तकनीक को आईपीआर केंद्र कोलकाता से प्रोविजनल पेटेंट भी मिल गया है। इस तकनीक के खासियत की बात की जाए तो बहुत ही कम खर्च में नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी पहुंचाया जा सकता है। आपको बता दें कि बिजली बनाने के लिए डैम में एक ही बार पानी भरने की आवश्यकता होती है। इस तकनीक से एक ही पानी नीचे और ऊपर वाली डैम में रोटेट होता रहेगा।

85 फीसद बिजली की होगी बचत
निचले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में बनाई गई बिजली का सिर्फ 15 फ़ीसद ही खर्च होगा। वहीं बची हुई 85 फ़ीसद बिजली का इस्तेमाल दूसरे कामों में किया जा सकेगा। ग़ौरतलब है कि अभी तक नीचे वाले डैम से पानी ऊपर वाले डैम में ले जाने में काफ़ी ख़र्च आता था। यही वजह है कि बिजली उत्पादन के लिए इस नीचे वाले डैम से ऊपर वाले डैम में पानी नहीं पहुंचाया जाता था। रोहित की नई तकनीक से कम खर्च में यह काम मुमकिन हो पाएगा।

1 मेगावाट बिजली उत्पादन में 11 करोड़ की लागत
रोहित की नई तकनीक पर जानकारों का कहना है कि हाइड्रो लिफ्टिंग टेक्नोलॉजी के जरिए एक मेगावट तक बिजली के उत्पादन में सिर्फ़ 11 करोड़ की लागत आएगी। वहीं छात्र रोहित का कहना है कि यह हाइड्रोलिफ्टिंग तकनीक दुनिया की अब तक सबसे सस्ती तकनीक विकसित की गई है। प्रोविजनल पेटेंट भी इस स्टार्ट-अप को मिल चुका है। एक आवेदन स्थायी पेटेंट के लिए भेजा गया है। 11 करोड़ की लागत से एक मेगावाट तक बिजली का उत्पादन तीन एकड़ क्षेत्र में हो सकता है। इस तकनीक के ज़रिए साल भर बिजली का उत्पादन मुमकिन है।
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