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Bihar Jail Bail Scheme: जेल में बंद गरीब कैदियों को सरकार देगी राहत, बिहार में शुरू हुई ये नई योजना

Bihar Jail Bail Scheme: बिहार सरकार ने जेलों में बंद उन गरीब कैदियों के लिए एक बड़ी और मानवीय पहल की है, जो सिर्फ जमानत की राशि नहीं भर पाने के कारण सलाखों के पीछे हैं। अब राज्य सरकार ऐसे कैदियों की जमानत राशि का भुगतान करेगी, जिससे उन्हें आजादी और एक नया जीवन मिल सकेगा।

इस नई योजना के तहत गृह विभाग ने विस्तृत दिशानिर्देश जारी करते हुए सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) को आवश्यक निर्देश भेजे हैं। इसके साथ ही राज्य व जिला स्तर पर विशेष समितियों का गठन किया गया है, जो इस प्रक्रिया की निगरानी करेगी।

Bihar Jail Bail Scheme

कैसे मिलेगी मदद? SOP में तय हुआ पूरा सिस्टम

सरकार द्वारा जारी नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार, यदि किसी विचाराधीन कैदी की जमानत कोर्ट द्वारा मंजूर कर ली जाती है और सात दिन के भीतर भी रिहाई नहीं होती, तो जेल अधीक्षक को इसकी सूचना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को देनी होगी।

इसके बाद सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि कैदी सच में आर्थिक रूप से अक्षम है या नहीं। इसके लिए प्रोबेशन अधिकारी, समाजसेवी और सिविल सोसाइटी के सदस्य जांच में सहयोग करेंगे। यह जांच 10 दिनों के अंदर पूरी करनी होगी।

40 हजार तक मिल सकती है मदद, लेकिन कुछ कैदी बाहर

विचाराधीन कैदियों के लिए अधिकतम ₹40,000 तक की जमानत राशि दी जा सकती है।

दोषी ठहराए गए कैदियों के लिए यह राशि ₹25,000 होगी।

इससे अधिक राशि के मामलों में फैसला राज्यस्तरीय निगरानी समिति लेगी।

लेकिन ध्यान रहे, यह योजना भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, NDPS एक्ट और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त कैदियों पर लागू नहीं होगी।

राज्य और जिला स्तर पर बनी दोहरी निगरानी व्यवस्था

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर 5 सदस्यीय निगरानी समिति बनाई गई है, जिसमें, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव (अध्यक्ष), विधि विभाग के सचिव, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव, जेल आईजी, और पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल शामिल होंगे। वहीं जिला स्तर पर डीएम, एसपी, जिला जज द्वारा नामित न्यायाधीश, जेल अधीक्षक और विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव की पंच सदस्यीय समिति बनाई गई है।

एक मानवीय कदम की सराहना होनी चाहिए

बिहार सरकार की यह पहल निश्चित तौर पर गरीबों को न्याय दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल कैदियों को स्वतंत्रता का अधिकार लौटाएगा, बल्कि उन्हें समाज में पुनर्स्थापित कर एक सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देगा। इस कदम को सुशासन और सामाजिक न्याय के संदर्भ में देखा जा सकता है, जो बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

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