IPS Motivation: लाशों के बीच से रास्ता बनाते हुए मौत से जंग, अमिताभ दास की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी

IPS Motivation: बिहार की धरती के कई जाबांज आईपीएस अफ़सरों की कहानी आपने सुनी होगी। आज हम आपको एक ऐसे ही जाबांज़ पूर्व आईपीएस अधिकारी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने ड्युटी के दौरान कई बार मौत को मात देकर फतह पाई है। उनके कार्यकाल की कई कहानियों में से एक कहानी आज हम उन्हीं की ज़ुबानी सुनाने जा रहे हैं।

वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने अपने कार्यकाल का एक किस्सा सुनाया जो कि काफी दिलचस्प है। उन्होंने बताया कि किस तरह से बर्फीले तूफानों के दौरान लाशों के बीच से रास्ता बनाते हुए मौत से जंग जीता।

IPS Motivation: Fighting with death making a path among the dead bodies, the story of Amitabh Das

अमिताभ दास ने बताया कि बात 1996 की है, आज से 27 साल पहले IPS की ट्रेनिंग के दौरान बीएसएफ के साथ ट्रेनिंग के लिए कश्मीर घाटी भेजा गया। कश्मीर में अमरनाथ की गुफ़ा है, प्राकृतिक रूप से यहां बर्फ का शिवलिंग बनकर तैयार होता है। इस भक्त लोग बर्फानी बाबा कहते हैं, हर साल लाखों लोग इसके दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

श्रध्दालुओं की यात्रा पर आतंकी हमले का ख़तरा रहता है, इसलिए बीएसएफ को इसके सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी जाती है। मैं तो वैसे नास्तिक हूं लेकिन ड्यूटी की वजह से बीएसएफ के साथ अमरनाथ यात्रा में पहुंचा था। सबसे पहले चंदन बारी पहुंचे, जहां अमरनाथ यात्रा का बेस कैंप लगता है।

कश्मीर के पहलगाम में चंदन बारी है, जहां अमरनाथ यात्री पहुंच कर आगे की यात्रा की शुरुआत करते हैं। अमरनाथ यात्रा की शुरुआत हुई, सबसे पहले पिशु टॉप आया, जिस पर खड़ी चढ़ाई करनी होती है। दोपहर के वक्त पिशु टॉप पर पहुंचे। इसके बाद अगली चढ़ाई शेष नाग की तरफ़ बढ़े।

शेषनाग तक पहुंचते-पहुंचते हल्का अंधेरा छाने लगा, वहां एक बड़ा सा मैदान था, जहां लोगों के ठहरने का इंतज़ाम था। वहां बीएसएफ के तंबू लगे हुए थे, तंबुओं में बीएसएफ के जवान ठहरे। स्लीपिंग बैग के अंदर घुस कर सोने लगे। क्योंकि कार्यक्रम था कि सुबह अगले पड़ाव पंचतरणी के लिए रवाना होंगे।

सुबह होने से पहले ही रात के वक्त बर्फीला तूफान आ गया। भयानक तूफान से ऐसा लग रहा था कि तंबू उड़ जाएगी। तूफान की वजह से चट्टानें खिसक गईं, भूस्खलन ऐसा हुआ कि आगे गुफा जाने का रास्ता बंद हो गया और पीछे चंदन बारी लौटने का रास्ता भी नहीं रहा।

शेषनाग में हज़ारों यात्री फंस गए, ना आगे जा सकते थे और ना ही पीछे लौट सकते थे। वहीं भंडारा में खाना भी ख़त्म होने लगा। भूखमरी जैसे हालात पैदा हो गए, महिलाएं और बच्चे भी थे जो कि भूख से तड़प रहे थे। जहन्नम जैसा मंज़र हो गया था।

एक दो दिन बाद जब मौसम ठीक हुआ तो मैं निकल कर कुछ लोगों के साथ चंदन बारी कैंप लौटने लगा। क्योंकि इस दौरान इंडियन आर्मी के जवान आ चुके थे, चट्टानों को हटाकर रास्ता बना दिया था। लौटने के क्रम में जो मंज़र देखा वह कभी नहीं भुलाया जा सकता है। जगह-जगह औरत, मर्द और बुज़ुर्गों की लाशें पड़ी थीं, घोड़े मरे पड़े थे। बहुत ही डरावना मंज़र था।

लाशों के बीच से रास्ता बनाते हुए चंदन बारी लौट रहा था, रास्ते में एक आदमी ने (जो कि शायद वॉलेन्टियर रहा होगा) भुने हुए चने का पैकेट पकड़ा दिया। लेकिन मेरे हाथ ठंड से ऐसे सिकुड़ गए थे, अंगुलिया ऐसी जम गई थी कि पैकेट खोल भी नहीं सका। चंदन बारी लौटने के बाद आग के पास हाथ तापने के बाद अंगुलियों में हरकत आई।

इसके बाद वह चने का पैकेट खोला और फिर खाया। फिर ऐसा हुआ कि झेलम नदी में बाढ़ आने की वजह से हम लोगो श्रीनगर भी नहीं जा सकते थे। एक अच्छी बात हमने यह देखी कि झेलम गांव मुसलमानों की बस्ती थी, वहां के लोगों ने सभी हिंदुओं के लिए मस्जिद खोल दिया, वहां तीर्थ यात्रियों ने पनाह ली।

बाढ़ की वजह से हम लोग एक दो दिनों तक अनंतनाग में रुके, इसके बाद श्रीनगर लौटे जो कि कश्मीर की राजधानी है। वहां हम लोगों का मुख्यालय था। मुझे लगा कि यह जो वाक्या हुआ है इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देनी चाहिए।

आईपीएस लोगों की ट्रेनिंग सरदार बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकेडमी हैदराबाद में होती है। उसके डायरेक्टर केपी दुरई थे। वह बहुत ही सख्त मिजाज़ के थे, उनसे हम लोग काफी डरते थे। लेकिन वह मुझे मेरे काम के अंदाज़ की वजह से काफी मानते भी थे।

वह तमिल थे, हिंदी पढ़ नहीं पाते थे, इसलिए मैंने उन्हें अंग्रेज़ी में लेटर लिखा, उसमे बाज़ाबते ड्राइंग बनाते हुए समझाया कि कैसे चंदन बारी है, फिर पिशु टाप है, फिर शेष नाग है, फिर पंचतरणी है, अंत में गुफ़ा है। मेरा लेटर उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने नेशनल पुलिस एकेडमी के नोटिस बोर्ड पर मेरी चिट्ठी चस्पा करवा दी, ताकि मेरे जूनियर बैच के लोग भी उसे पढ़ सकें। यह था मेरे मौत के मुंह से वापिस आने का सफर।

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