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Bodh Gaya Temple: महाबोधि मंदिर के नीचे 'पुरातात्विक खजाना', सैटेलाइट इमेज और जमीनी सर्वे में बड़ा खुलासा

Bodh Gaya Temple: बिहार के गया स्थित बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र मंदिर महाबोधि मंदिर को लेकर सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि उसके नीचे विशाल वास्तुशिल्प संपदा है। महाबोधि मंदिर, जो कि यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है और भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र क्षेत्रों में से एक है।

अब उपग्रह चित्रों और जमीनी सर्वे का उपयोग करके किए गए भू-स्थानिक विश्लेषण में महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में "विशाल वास्तुशिल्प संपदा" की मौजूदगी के सबूत मिले हैं, जिसकी जानकारी शनिवार (13 जुलाई) को अधिकारियों ने दी।

Bodh Gaya Temple

यह स्टडी कला, संस्कृति और युवा विभाग की एक शाखा बिहार हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी (बीएचडीएस) द्वारा यूनाइटेड किंगडम के कार्डिफ यूनिवर्सिटी के सहयोग से किया गया है। बोधगया एक ऐसा स्थान है, जहां माना जाता है कि भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

पुरातात्विक खजाने की मौजूदगी के साक्ष्य मिले

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव हरजोत कौर बमराह ने बताया कि अध्ययन में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी के नीचे पुरातात्विक खजाने की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं। यह एक विशाल वास्तुशिल्प संपदा है, जिसकी और खुदाई की जरूरत है।

बता दें कि ब्रिटेन स्थित विश्वविद्यालय और बीएचडीएस 'चीनी यात्री जुआनजांग के पदचिन्हों पर पुरातत्व' परियोजना में सहयोग कर रहे हैं। बेंगलुरू स्थित राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान की संकाय सदस्य एमबी रजनी, जो परियोजना की सदस्यों में से एक हैं, उन्होंने कहा कि महाबोधि मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्रों की उपग्रह छवियों का अध्ययन किया और निष्कर्षों को 'हुआनजांग' के वर्णन के साथ सहसंबंधित करने का प्रयास किया है।

बोधगया में वर्तमान महाबोधि मंदिर परिसर में 50 मीटर ऊंचा भव्य मंदिर, वज्रासन, पवित्र बोधि वृक्ष और बुद्ध के ज्ञानोदय के अन्य छह पवित्र स्थल शामिल हैं, जो कई प्राचीन स्तूपों से घिरे हैं, जिनका रखरखाव अच्छी तरह से किया गया है और आंतरिक, मध्य और बाहरी गोलाकार सीमाओं द्वारा संरक्षित हैं।

बमराह ने कहा, "बीएचडीएस कार्डिफ़ विश्वविद्यालय के सहयोग से बिहार में 7वीं शताब्दी के चीनी अनुवादक भिक्षु, जुआनज़ांग की यात्रा के पुरातात्विक निशान पर बहु-विषयक परियोजना पर काम कर रहा है। पिछले कई वर्षों की उपग्रह छवियों में मंदिर के उत्तर में संरचनाओं का संरेखण दिखाई देता है, जो भूमिगत दफन हैं।"

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