Bihar Politics: हिंदू अब हिंदू नहीं रहे जात-पात में बंट गए, महंगी पड़ेगी नीतीश को पलटी- परमानंद सिंह
Bihar Politics: बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। प्रदेश में चुनावी बयानबाज़ी का दौर जारी है। इसी क्रम में वन इंडिया हिंदी की टीम मुख्यमंत्री नीतीश को लेकर जनता की प्रतिक्रिया जानने ग्राउंड पर पहुंची। पटना ज़िला में लोगों से बातचीत के दौरान विभिन्न मुद्दों पर बात की गई।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में परमानंद सिंह ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टियां चुनावी मौसम में अपनी सियासी रोटी सेकने लगती हैं। इंसान को धर्म के नाम पर बांटने और समाज में ज़हर घोलने का काम शुरू हो जाता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात की जाए तो वह 'पलटू कुमार' हो चुके हैं।

कुर्सी पाने के लिए वह किसी भी हदतक जा सकते हैं, जब भी कुर्सी पर ख़तरा मंडराने लगता है वह पलटी मार कर कुर्सी मज़बूत कर लेते हैं। सियासी पार्टियां तो लोगों को धर्म के नाम पर बांटने का काम करती है। सीएम नीतीश कुमार ने तो जातीय गणना कराकर लोगों को जातों में बांट दिया है।
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हिंदू अब हिंदू नहीं रहे, वह जातों में बंट चुके हैं। बिहार में अगर जातीय गणना सही हुई है तो वार्ड वाइज़ समीक्षा कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक कराएं। वार्ड स्तर के लोग भी जान जाएंगे कि क्या सही है और क्या ग़लत है। नीतीश सरकार शराबबंदी का राग अलापती है, उनके लिए शराब बंद है, बहुत अच्छी बात है।
बिहार में अगर पूरी तरह से शराब बंदी है तो फिर आए दिन शराब तस्कर कैसे पकड़े जा रहे हैं। ज़हरीली शराब से लोगों की जान कैसे जा रही है। शराब की होम डिलीवरी कैसे हो रही है। बिहार में शाराबबंदी काग़ज़ों में है, हक़ीक़त में खुलेआम शराब का सेवन किया जा रहा है। 1 रुपये का चीज़ 5 रुपये में ख़रीद कर पी रहे हैं।
हम लोग शराब सेवन के फेवर में नहीं है, लेकिन सरकार का शराबबंदी का जो मकसद है वह कुछ और ही है। नीतीश कुमार का जो 2005 का कार्यकाल था वह बहुत ही सराहनीय था। कोई भी सीएम नीतीश का विरोधी नहीं था। उसी आधार पर 2010 में जीत दर्ज की, उसके बाद भाजपा के साथ गठबंधन में आये।
ऐसा नहीं है कि भाजपा ने सीएम नीतीश के साथ कुछ ग़लत किया, भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार को उचित सम्मान दिया। अपने स्वार्थ में इन्होंने पलटी मारना शुरू किया, यही कारण है कि लोग इन्हें पलटू राम भी कह रहे हैं। अगर हम डोल रहे हैं, तो इसका मतलब है कि नीति और नियत दोनों ख़राब है।
नीतीश कुमार की सियासत का अब कोई वजूद नहीं बचा है, ऐसे ही चल रहा है, जितने दिन चल सके। सियासत की आड़े में धार्मिक आघात नहीं करें। हिंदू-मुस्लिम जो भी ग़लत करे उसके खिलाफ सबको मिलकर आवाज़ उठानी चाहिए। लेकिन यह लोग समाज को धर्म औत जात पात में बांटक लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस बार पलटी शुभ नहीं है, ना तो प्रदेश के लिए शुभ है, ना तो नीतीश कुमार के लिए शुभ है और ना राजनीति के लिए शुभ है। इस बार की पलटी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को महंगी पड़ने वाली है। प्रदेश की जनता का सीएम नीतीश कुमार तरफ़ से मोहभंग हो चुका है।












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