बिहार में लागू शराबबंदी के बीच बेगूसराय में शराबी द्वारा हाई वोल्टेज ड्रामा, वीडियो हुआ वायरल

बिहार में पिछले छह साल से अधिक समय से शराबबंदी लागू है, मगर दारू की खपत और शराब पीकर कानून तोड़ने वालों की तादाद पर नजर डालें, तो कुछ और ही कहानी सामने आती है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कई जिलों में अभी भी शराब का व्यापार, परिवहन और सेवन जारी है। हाल ही में बिहार से एक मामला सामने आया है जिसमे एक शराबी के द्वारा घंटों सदर अस्पताल में ड्रामा किया गया, वहीं उसने बिहार में शराबबंदी की पोल खोलकर रख दी।

शराबी का हाई वोल्टेज ड्रामा

शराबी का हाई वोल्टेज ड्रामा

दरअसल बेगूसराय में बुधवार की शाम एक शराबी एवं ई रिक्शा चालक के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई। जिसके बाद ई रिक्शा चालक ने उक्त शराबी सुजीत कुमार की जमकर पिटाई कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया जहां उसने घंटों हाई वोल्टेज ड्रामा किया। साथ ही साथ उसने आरोप लगाया कि बेगूसराय में हर एक चौक चौराहों पर शराब की खुलेआम बिक्री की जाती है और इसके लिए पुलिस को कमीशन भी दिया जाता है। उक्त शराबी के कथनानुसार ढाई सौ में निव्स एवं 50 रुपये प्रति ग्लास की दर से महुआ शराब की भी बिक्री की जाती है। पुलिस की लापरवाही का आलम यह है कि घंटों शराबी के द्वारा उत्पात मचाने के बावजूद भी सदर अस्पताल में पुलिस नहीं पहुंच सकी और बाद में शराबी इलाज करा कर चंपत हो गया।

2016 में शराब पर लगी थी रोक

2016 में शराब पर लगी थी रोक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अप्रैल 2016 में राज्य में शराबबंदी लागू की थी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद दूसरे राज्यों से इसकी तस्करी आए दिन हो रही है। आए दिन जहरीली शराब पीने से लोगों की जान जाना आम बात हो गई है। गौरतलब है कि बिहार सरकार ने पांच अप्रैल 2016 से राज्य में शराब के निर्माण, व्यापार, भंडारण, परिवहन, बिक्री और खपत पर रोक लगाने और इसका उल्लंघन दंडनीय अपराध बनाने के कानून को लागू किया था। इसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि राज्य में पूर्ण शराबबंदी होगी और बिहार एक आदर्श राज्य बनेगा। लेकिन आए दिन शराब कानून के उलंघन से न केवल बिहार सरकार को झटका लगा है, बल्कि अन्य राज्यों में भी शराबबंदी कानून को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पहले भी रही है शराबबंदी असफल

पहले भी रही है शराबबंदी असफल

शराबबंदी को लेकर इतिहास में भी कई बार कई सकारों ने पहले भी सख्त कानून लागू किये थे पर असल सवाल शराबबंदी के सरकारी फैसले पर अमल करने को लेकर है। देखें तो, शराबबंदी पर बिहार का पिछला रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। 1977 में जननायक कर्पूरी ठाकुर ने शराब पर पाबंदी लगाई थी, लेकिन शराब की कालाबाजारी और कई अन्य परेशानियों की वजह से यह पाबंदी ज्यादा दिनों तक नहीं रही। लिहाजा, खुलेआम शराब की बिक्री जारी रही। बिहार अकेला ऐसा राज्य नही है जहां शराबबंदी में निराशा हाथ लगी थी। हरियाणा, आंध्रप्रदेश और मिजोरम में शराबबंदी हुई थी, लेकिन यहां भी शराबबंदी कारगर नहीं हो पाई. अब इन राज्यों में शराब की बिक्री होती है।
दरअसल ऐसी बहुत सी वजह से जिसके कारण शराब की अवैध बिक्री को रोक पाना एक बेहद ही पेचीदा काम हो जाता है। जैसे अगर बात बिहार की करें तो दक्षिण में झारखंड जबकि उतर में भारत का पड़ोसी देश नेपाल में शराब की छूट है। इसके अलावा उतर प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों का सीधा संपर्क बिहार से है। इन राज्यों में शराब की पाबंदी नहीं है. ऐसे में शराब के कालाबाजारी का खतरा यहां भी कम नहीं है। बहरहाल, शराब की पूर्ण पाबंदी स्वागत योग्य है लेकिन इसपर पूर्णता अमल करना बहुत जरूरी है।

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