Lok Sabha Chunav 2024: मांझी लड़ेंगे मोक्ष नगरी से चुनाव, जानिए कितनी टफ होगी इस सीट पर लड़ाई
Gaya Lok Sabha Seat: लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद अब इंडिया और एनडीए गठबंधन के नेता चुनावी मोड में एक्टिव हो गए हैं। पक्ष और विपक्ष के नेता अपने अपने मुताबिक लोकसभा सीटों पर ताल ठोकने के लिए तैयार हो चुके हैं।
बिहार एनडीए में भी सभी 40 सीटों पर शेयरिंग हो चुकी है। जिसके तहत जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्च के खाते में गया सीट गई है। वहीं अब इस सीट से जीतन राम मांझी ने खुद ही चुनावी ताल ठोकने का ऐलान कर दिया है। आइए जानते हैं इस पर कितनी टफ लड़ाई है।

बिहार की आरक्षित लोकसभा सीटों में शुमार गया लोकसभा सीट साल 1952 में अस्तित्व में आया था। ग़ौरतलब है कि यह एक ऐसी लोकसभा सीट है जो पचास साल से भी ज्यादा से आरक्षित रही है। पहली बार कांग्रेस ने जीत 1952 (गया पूर्व) में जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1952 में ही प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का परचम बुलंद हुआ था। फिर कांग्रेस ने जीत की हैट्रिक लगाई थी
साल 1967 में गया लोकसभा सीट के आरक्षण की घोषणा हुई थी। आरक्षित सीट होने के बाद पहली बार 1967 कांग्रेस ने यहां से पार्टी के जीत का परचम लहराया था। 1971 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के खाते यह सीट जनसंघ के पाले में चली गई। इसके बाद से यहां के सियासी समीकरण बदले, सांसद की कुर्सी पर अन्य दलों के प्रत्याशियों ने भी अपनी पार्टी का परचम लहराया।
जनसंघ के कुर्सी पर क़ब्ज़ा जमाने के बाद गया लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने वापसी की और लगातार दो बार जीत दर्ज की।कांग्रेस के लगातार दो बार जीत दर्ज करने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने अपनी पार्टी का झंडा बुलंद किया। इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल ने भाजपा को चुनावी मात देते हुए अपना क़ब्ज़ा जमाया। फिर भाजपा ने राजद को सियासी मात दी तब से लेकर साल 2019 तक भाजपा का ही गया लोकसभा सीट पर क़ब्ज़ा रहा।
019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और जदयू ने साथ मिलकर चुनावी बिगुल फूंका। NDA गठबंधन के सहयोगी दल होने के नाते इस सीट पर जदयू प्रत्याशी ने चुनावी दांव खेला और उन्होंने जीत हासिल की। ग़ौरतलब है कि इस सीट पर 2009 तक मांझी समुदाय के उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की थी।
आपको बता दें कि गया लोकसभा सीट पर वोटरों की तादाद करीब 17 लाख है। इनमें सबसे ज़्यादा तादाद मांझी समुदाय के लोगों का है। विनिंग फैक्टर के तौर पर मांझी समुदाय के मतदाता अहम किरदार निभाते आ रहे हैं। इसके अलावा SC/ST मतदाताओं की गिनती आती है।
गया लोकसभा सीट पर अल्पसंख्यक वोटरों की तादाद के साथ-साथ भूमिहार, राजपूत, यादव और वैश्य भी चुनाव में अहम रोल में रहते हैं। सीट आरक्षित होने के बावजूद हर समुदाय के वोटर सियासी फिज़ा बदलने की काबिल्यत रखते हैं।
गया लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, इसमें बाराचट्टी, शेरघाटी, गया टाउन, बोधगया, वज़ीरगंज और बेलागंज विधानसभा क्षेत्र शुमार हैं। ग़ौरतलब है कि यह वही लोकसभा सीट है जिसे पहले तीन लोकसभा क्षेत्र गया पूर्व, गया पश्चिम और गया उत्तर में बांटा गया था।
गया लोकसभा सीट के सांसदों की सूची
1952: सत्येंद्र नारायण सिन्हा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (गया पूर्व)
1952: विजनेश्वर मिसिर, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी
1957: ब्रजेश्वर प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962: ब्रजेश्वर प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967: राम धनी दास, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971: ईश्वर चौधरी, जनसंघ
1977: ईश्वर चौधरी, जनता पार्टी
1980: राम स्वरूप राम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1984: राम स्वरूप राम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989: ईश्वर चौधरी, जनता दल
1991: राजेश कुमार, जनता दल
1996: भगवती देवी, जनता दल
1998: कृष्ण कुमार चौधरी, भारतीय जनता पार्टी
1999: रामजी मांझी, भारतीय जनता पार्टी
2004: राजेश कुमार मांझी, राष्ट्रीय जनता दल
2009: हरि मांझी, भारतीय जनता पार्टी
2014: हरि मांझी, भारतीय जनता पार्टी
2019: विजय कुमार मांझी, जनता दल(यूनाइटेड)
NDA गठबंधन की वजह से इस बार जदयू को इस सीट से कुर्बानी देनी पड़ी है। पार्टी के सिटिंग सांसद विजय कुमार मांझी के होने के बावजूद हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के खाते में यह सीट गई है। इस बार जीतन राम मांझी इस सीट चुनावी दांव खेल रहे हैं। एनडीए गठबंधन में की वजह से जीतन राम मांझी इस सीट पर फ़ायदा मिल सकता है।












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