नेपाल सीमा क्षेत्र में छात्राएं असुरक्षित! हॉस्टल से अचानक गायब हुई 4 छात्राएं, जानिए क्या है मामला

4 girls missing from Indo-Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा बॉर्डर से सटे बिहार के ज़िलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। वहीं अब भारत-नेपाल सीमा से लगे सीतामढ़ी ज़िला से चार लड़कियों के अचानक ग़ायब होने पर इलाके में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों की मानें तो चारों छात्राएं मुजौलिया बाजार स्थित आनंद मार्ग प्राइमरी स्कूल (सोनबरसा थाना क्षेत्र) के हॉस्टल में रहती थी, जो कि अचानक लापता हो गईं हैं। छात्राओं की तलाश की गई लेकिन कहीं से कुछ सुराग नहीं मिल पा रहा है। चार छात्राओं में से 3 छात्रा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले की रहने वाली है। वहीं 1 छात्रा सीतामढ़ी जिले के ही बैरगनिया की निवासी है।

Girls are unsafe in Nepal border area! 4 girl students suddenly missing from the hostel

2 अक्टूबर से चारों छात्राएं लापता हैं, अभी तक वह लोगो अपने घर नहीं पहुंची है। शनिवार को प्रशासन के संज्ञान में मामला आया तो जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस की मानें तो शनिवार को रात करीब 10 बजे मामले की जानाकारी हुई है। इसके बाद एसपी मनोज कुमार तिवारी के निर्देश पर मामले की जांच शुरू की गई।

स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के ग़ायब होने पर किसी का भी नाम शक के दायरे में नहीं लिया है। मुजौलिया बाजार स्थित आनंद मार्ग प्राइमरी स्कूल में पांच क्लास तक की छात्राओं के लिए हॉस्टल की सुविधा है। इसी हॉस्टल में कक्षा नौ की 16 वर्षीय छात्रा सोहागी मार्डी(गणेश मार्डी, मिर्जाडीह निवासी, पूर्वी सिंहभूम जिला) रहती थी।

इसके अलावा, कक्षा चौथी की छात्रा 14 वर्षी छात्रा (बुटका हेमब्राम की बेटी बहमाई हेमब्राम, कक्षा तीन की 10 वर्षीय छात्रा मंगली हेमब्राम और डुमरबाना निवासी (बैरगनिया थाना, सीतामढ़ी जिले) राजू पटेल की कक्षा दो 12 वर्षीय रिया कुमारी रहती थीं।

सोहागी मार्डी का नाम आनंद मार्ग स्कूल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर मौजूद उत्क्रमित उच्च विद्यालय में नाम दर्ज है। लेकिन वह हॉस्टल में ही रहती थी। स्कूल की संचालिका धर्म महासम्मेलन में भाग लेने 26 सितंबर को 26 जगन्नाथ पुरी गई थी।

संचालिका ने छात्राओं के देखभाल की ज़िमम्मेदारी मनतोरिया देवी और सुनीता देवी को दी थी। इन्होंने ही बच्चियों के गायब होने की सूचना दो अक्टूबर को दी थी। चार अक्टूबर जब संचालिका आई तो बच्चियों को ढूंढने की कोशिश में जुट गई।

प्राचार्या की मानें तो उन्हें कुछ लोगों ने बच्चियों को सीतामढ़ी जाने वाली बस में चढ़ते देखा था। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि बच्ची दो अक्टूबर से लापता है, 10 अक्टूबर तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, तो क्या इस तरह से बिहार में बेटियां सुरक्षित हैं। यह पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

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