Bihar Politics: CM नीतीश के 'सर्वे स्ट्रोक' से उड़ी विपक्ष की नींद, 'चुनावी मौसम' में शराबबंदी सर्वे क्यों?

CM Nitish Kumar, Bihar News: बिहार में नीतीश कुमार सर्वे के ज़रिए महागठबंधन सरकार की सियासी ज़मीन मज़बूत करने में जुटे हुए हैं। अभी तक 2 सर्वे करवा चुके सीएम नीतीश कुमार ने सियासी दांव खेलते हुए एक सर्वे का शिगुफ़ा छोड़ दिया है। बिहार में अब नीतीश कुमार शराबबंदी सर्वे करवाने जा रहें कि कौन शराबबंदी के समर्थन में है और कौन शारबबंदी के खिलाफ़ में है।

महागठबंधन के साथ सरकार बनाने के बाद से सीएम नीतीश कुमार ने पहले तो जातीय आधारित गणन करवाई, फिर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के बाद अब तीसरे सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शराबबंदी सर्वे के मुद्दे से ही विपक्षी नेताओं के हलचल बढ़ गई है।

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नशा मुक्ति दिवस पर सीएम नीतीश कुमार के शराबबंदी सर्वेक्षण के फ़ैसले से विपक्ष की नींद उड़ गई है। नीतीश कुमार ने कहा कि प्रदेश की आधी आबादी की मांग पर शराबबंदी की गई थी, जो कि बेहतर तरीक़े से चल रही है। अब शराबबंदी के समर्थन और ख़िलाफ़ में कितने लोग हैं, इसका सर्वे कराकर जनता के बीच रखना ज़रूरी हो गया है।

शराबबंदी सर्वे के बाबत विभाग को दिशा निर्देश भी जारी किया जा चुका है। सीएम नीतीश कुमार के अचानक शराबबंदी सर्वे कराने के फ़ैसले पर, यह सवाल उठने लगा है कि चुनावी मौसम में अचानक शराबबंदी सर्वे क्यों करवाया जा रहा है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि ज़हरीली शराब पीने की वजह से कई लोगों की जान जा रही है।

2016 में हुई शराबबंदी के बाद से ज़हरीली शराब पीने से हुई लोगों की मौत के आंकड़े काफी बढ़े हैं। चुनावी मौसम में सीएम नीतीश कुमार को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना नहीं पड़ जाए। इसलिए नीतीश सरकार शराबबंदी सर्वे करवा रही है, ताकि शराबबंदी के समर्थन औऱ विरोध के आंकड़े देखने के बाद शराबबंदी या जिले में शराब पीने की इज़ाज़त पर निर्णय लिया जा सके।

बिहार में अगर शराबबंदी के समर्थन में कम लोगों के आंकड़े सामने आए तो शराब चालू कर दी जाएगी। क्योंकि वोट बैंक के एतबार से नीतीश कुमार को नुकसान नहीं होगा। वहीं शराब पीने वालों की तादाद ज़्यादा हुई तो वह लोग भी नीतीश कुमार को ही वोट करेंगे।

कुछ ऐसे परिवार भी हैं जिनके यहां ज़हरीली शराब पीने से सदस्यों की मौत हुई है। उन लोगों का कहना है कि सरकार शराब पीने की ही इजाज़त दे देती तो कम से कम ज़हरीली शराब पीने से तो मौत नहीं होती। इन सब बिंदुओं को सोचते हुए ही सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी का फ़ैसला लिया है।

सियासी जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लगातार विभिन्न फ़ैसले और सर्वे कराने से विपक्षी दल कमज़ोर पड़ रही है। जातीय आधारित गणना, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, आरक्षण का दायरा बढ़ाना और युवाओं के लिए रोज़गार जैसे फ़ैसले लेन के बाद, भाजपा के पास चुनावी मुद्दे ही नहीं बच रहे हैं, जिससे वह नीतीश सरकार को घेर सके।

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