बच्चे का पूरा शरीर पड़ा काला, कार्बन बेबी सिंड्रोम से ग्रसित है मासूम, जानिये क्या है बीमारी ?
Carbon baby syndrome सेे ग्रसित मासूम बच्चे का सफल इलाज कर जान बचाया गया है। देश का पहला कार्बन बेबी सिंड्रोम मरीज का मामला पश्मि बंगाल से सामने आया था।

Carbon Baby Syndrome : बिहार के भागलपुर जिले में कार्बन बेबी सिंड्रोम से ग्रसित ढाई साल का मासूम मिला है। जिसका जिले के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया गया। गोपालपुर के रहने वाले रिंकु कुमार दास के बेटे लव कुमार का इलाज डॉक्टर आर के सिन्हा ने के क्लिनिक में हुआ। बच्चे को जब अस्पताल लाया गया तो उसका शरीर काला होता जा रहा था। बेहोशी के हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गये मासूम बच्चे में चमकी के लक्षण भी दिख रहे हे थे। डॉक्टर आर के सिन्हा (शिशु रोग विशेषज्ञ) ने बच्चे का इलाज किया।

कार्बन बेबी सिंड्रोम से मासूम ग्रसित
JLNMCH शिशु विभाग के पूर्व HOD डॉक्टर आरके सिन्हा ने बताया कि बच्चा कार्बन बेबी सिंड्रोम से ग्रसित है। बच्चे की बीमारी सुनते ही परिजन परेशना हो गए। डॉक्टर ने तुरंत इलाज करते हुए बच्चे की जान बचा ली। अब बच्चे की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। डॉक्टर ने कार्बन बेबी सिंड्रोम बीमारी की जानकारी देते हुए बताया कि 10 लाख लोगों में किसी एक को यह बिमारी होती है। बच्चे की पैदाइश के कुछ महीने बाद शरीर का रंग सुर्ख काला होने लग जाता। स्किन में मेलानीन (प्राकृतिक रंगद्रव्य) की मात्रा ज्यादा पैदा होने की वजह से होता है। खून में बीटा मैलेनोसाइट (सफेद रक्त कोशिकाओं का एक भाग) और स्टुमेल्टिन हॉर्मोन बढ़ने की वजह से यह परेशानी होती है।

इस जिले से सामने आया था देश का पहला मामला
डॉक्टर की मानें तो सूरज की रोशनी पड़ने से मरीज़ की परेशानियां ज्यादा बढ़ने लगती है। सही समय पर इलाज नहीं होने की वजह से ब्रेन, किडनी, लीवर, जैसे अंगो को प्रभावित होने लगते हैं। जिससे जान भी जा सकती है। देश में पहला कार्बन बेबी सिंड्रोम के मरीज़ का मामला वेस्ट दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल) से सामने आया था। वहीं नौ साल पहले दूसरा मामला कहलगांव से सामने आया था। जहां दो सगे भाइ बहन कार्बन बेबी सिंड्रोम से ग्रसित पाए गए थे। एक बचचे की उम्र दो साल थी वहीं दूसरे बच्चे की उम्र सात साल थी।

विशेषज्ञ की इस मामले में क्या है राय ?
रसनपुर एकचारी (कहलगांव) के रहने वाले बच्चू यादव के दोनों बच्चों का इलाज मायांगज अस्पताल में हुआ था। इलाज के बाद दोनों बच्चों की स्थिति सामान्य थी। वह लोग अपनी नॉर्मल ज़िंदगी गुजार रहे थे। अब फिर लव कुमार में कार्बन बेबी सिंड्रोम का मामला सामने आया है। बच्चों को इस सिंड्रोम से बचाने के लिए विशेषज्ञ कुछ परहेज़ करने की भी सलाह देते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों के खाने या दूध में कुएं के पानी का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि उसमें नाइट्रेट हो सकता है। बच्चे की उम्र एक साल से कम है तो उसे उबला हुआ पानी ही दें। सात महीने के बच्चों के आहार में ब्रोकली, पालक, चुकंदर और गाजर का इस्तेमाल कम करें। यह डॉक्टरों द्वारा दिए गए टिप्स पर आधारित है। आप किसी भी सलाह पर अमल करने से पहले अपने डॉक्टर से मशवरा ज़रूर करें।
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