Buddha purnima 2022: आज ही के दिन जन्मे थे सिद्धार्थ गौतम, जानिए कौन-सी हैं 5 जगहें जहां वे रहे?
Buddha purnima 2022: आज ही के दिन जन्मे थे सिद्धार्थ गौतम, जानिए कौन-सी हैं 5 जगहें जहां वे रहे?
बोधगया। अपने जीवन को कैसे सुखी व सफल बनाया जा सकता है, यह हमारे इतिहास के बहुत से संत-महात्माओं, दार्शनिकों तथा वैज्ञानिकों से सीखा जा सकता है। गौतम बुद्ध भी भारत की महान विभूति थे।आज 16 मई 2022 को उनकी जयंती है। उनका जन्म 563 ई.पू. में बैसाख माह की पूर्णिमा (हनमतसूरी) के दिन शाक्य राज्य के लुंबिनी (अब नेपाल) में हुआ था। इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ।
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आज बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष
पौराणिक इतिहास में ऐसा किसी अन्य महापुरुष के साथ अब तक नहीं हुआ कि किसी का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधि) और महापरिनिर्वाण... ये तीनों एक ही दिन अर्थात् वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हों। ऐसे केवल गौतम बुद्ध ही हैं। इसलिए आज इस अवसर पर हम यहां आपको गौतम बुद्ध की जिंदगी से जुड़ी बातें बताने जा रहे हैं। वैशाख पूर्णिमा को भारत में उनके ही नाम पर बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

जन्म वाली तिथि को ही देह त्यागी थी
गौतम बुद्ध लुंबिनी में जन्मे थे। 528 ईसा पूर्व वैशाख माह की पूर्णिमा को ही बोधगया में एक वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। माना जाता है कि, कुशीनगर (अब यूपी) में इसी दिन उन्होंने 80 वर्ष की उम्र में अपनी देह त्यागी थी। लगभग 2500 वर्ष पहले बुद्ध के देह त्यागने पर उनके शरीर के अवशेष (अस्थियां) 8 भागों में विभाजित हुए। जिनके 8 स्थानों पर 8 स्तूप बनाए गए। 1 स्तूप उनकी राख और एक स्तूप उस घड़े पर बना था, जिसमें अस्थियां रखी थीं। वहीं, नेपाल में कपिलवस्तु के स्तूप में रखी अस्थियों के बारे में माना जाता है कि वह गौतमबुद्ध की हैं।

इन जगहों पर बीता गौतम बुद्ध का जीवन
बौद्ध-स्तूपों के अलावा इतिहास में उन जगहों की भी कई मान्यताएं रही हैं, जहां गौतम बुद्ध का जीवन बीता। यहां उन 5 जगहों के बारे में जानिए, जो महात्मा बुद्ध के कारण महत्वपूर्ण हैं।
- लुंबिनी: यह गौतम बुद्ध का जन्म स्थल है। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उल्लेख है कि, उत्तर प्रदेश के ककराहा गांव से 14 मील और नेपाल-भारत सीमा से कुछ दूर पर बना रुमिनोदेई नामक गांव ही लुम्बिनी है।वर्तमान में यह कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 13 KM दूर दक्षिणी नेपाल में है। अब यह गौतम बुद्ध के जन्म स्थान के रूप में प्रसिद्ध है। गौतम बुद्ध एक राजा के पुत्र के रूप में जन्मे। लुंबिनी के प्रसिद्ध बागों में उनका जन्म 623 ई.पू. में हुआ था। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
- इतिहास प्रेमियों और बौद्धों के लिए लुम्बिनी एक महत्वपूर्ण जगह है। यह जगह बेहद शांतिपूर्ण भी है और लोग यहां ध्यानमग्न नजर आते हैं। इसी गांव में मायादेवी तालाब, माया देवी मंदिर परिसर के अंदर स्थित, वो जगह है जहां बुद्ध की मां उसे जन्म देने से पहले स्नान करती थीं। यह भी माना जाता है कि सिद्धार्थ गौतम का पहला स्नान भी यहां हुआ था।
- लुंबिनी संग्रहालय, मौर्य और कुशान काल की कलाकृतियों को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय में लुम्बिनी को चित्रित करने वाली दुनिया भर से धार्मिक पांडुलिपियों, धातु मूर्तियों और टिकटें हैं। लुंबिनी इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एलआईआरआई), लुंबिनी संग्रहालय के सामने स्थित है, सामान्य रूप से बौद्ध धर्म और धर्म के अध्ययन के लिए अनुसंधान सुविधाएं प्रदान करता है।
- लुंबिनी पहुंचने के लिए भारत का गोरखपुर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ता है। लुम्बिनी से 22 किमी दूरी पर भैरहंवा एयरपोर्ट है, जहां से काठमांडू के लिये हवाई यात्रा की जा सकती है। सड़क मार्ग से जाने के लिये गोरखपुर से सनौली और भैरहंवा के लिये बस तथा टैक्सी सेवा उपलब्ध हैं।

2. बोधगया
इस जगह को बौद्ध धर्म के अनुयायी दुनिया की सबसे पवित्र जगहों में से एक मानते हैं। यहीं पर एक वटवृक्ष के नीचे ध्यान लगाए बैठे रहने पर गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह स्थान बिहार के प्रमुख हिंदू-पितृ तीर्थ 'गया' में स्थित है। यहां महाबोधि मंदिर है। एक महाबोधि वृक्ष भी है। माना जाता है कि, यह वृक्ष उसी मूल बोधिवृक्ष का ही भाग है, जिसे राजा अशोक की बेटी श्रीलंका ले गई थी।
महाबोधि मंदिर बोधगया के मुख्य आकर्षण में से एक है। इसका निर्माण सम्राट अशोक ने 7वीं सदी में मूल बोधिवृक्ष के चारों ओर कराया था। यहां 80 फीट की ऊँचाई पर खड़ी बुद्ध प्रतिमा, देश की सबसे ऊंची बुद्ध मूर्तियों में से एक है। जिसकी संरचना 1989 में दलाई लामा की ओर से स्थापित की गई थी।
बोध गया में बराबर गुफा, नागार्जुन गुफा, प्रेतशिला पहाड़ी, विष्णुपद मंदिर, टर्गर मठ, फोवा सेंटर, गेंदन फ्लैग्लिंग मठ, रूट इंस्टीट्यूट, बोधगया मल्टीमीडिया संग्रहालय, ताइवानी मंदिर, कर्मा मंदिर के भी दर्शन किए जा सकते हैं।
- यहां पहुंचने के लिए पहले आपको बिहार के गया जिला आना होगा। बोधगया बिहार की राजधानी पटना से लगभग 100 किमी दूर दक्षिण-पूर्व दिशा में पड़ता है।

3. सारनाथ
यह वो जगह मानी जाती है, जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। यहीं से उन्होंने धम्मचक्र प्रवर्तन प्रारंभ किया था। वर्तमान में यह जगह उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित है।
गौतम बुद्ध ही बौद्ध धर्म के प्रवर्तक हैं। वह अपने मानवतावादी एवं विज्ञानवादी बौद्ध धर्म-दर्शन से सबसे महान पुरुष भी हैं। कुछ धर्मग्रंथों में तो उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना गया है। अत: बुद्ध पूर्णिमा बौद्धों के साथ-साथ ही हिंदुओं में भी मनती है।
- वर्तमान में बौद्ध पंथ के अनुयायी चीन, जापान, नेपाल, भारत, म्यांमार, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका एवं इंडोनेशिया जैसे देशों में बसे हुए हैं।
- दुनिया की कुल आबादी में बौद्ध अनुयायियों की हिस्सेदारी 7% से 8% है। यानी 60 करोड़ से ज्यादा। जिनमें से 25 करोड़ से ज्यादा बौद्ध अकेले चीन में हैं। किसी देश को वहां की आबादी के सर्वाधिक बौद्ध प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो वह देश है- कंबोडिया। यहां की 97.9% आबादी बौद्ध ही है। फिर, थाईलैंड (94.5%), म्यांमार (87.9%), भूटान (74.7%), श्रीलंका (70.2%) और जापान (69.8%) हैं।

4. कुशीनगर
माना जाता है कि इसी जगह पर महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण (मोक्ष) हुआ था। वर्तमान में यह उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले में स्थित है। ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि गोरखपुर में कसिया नामक जगह पर प्राचीन कुशीनगर था। यहां पर बुद्ध के 8 स्तूपों में से एक स्तूप बना है, जहां बुद्ध की अस्थियां रखी गई थीं।

5. श्रावस्ती का बुद्ध स्तूप
ऐसा कहा जाता है कि, इस स्थान पर गौतम बुद्ध 27 सालों तक रहे थे। यहां भगवान बुद्ध ने नास्तिकों को सही दिशा दिखाने के लिए कई चमत्कार किए थे। इन चमत्कारों में बुद्ध ने अपने कई रूपों के दर्शन करवाए। अब यहां बौद्ध धर्मशाला है तथा बौद्ध मठ और भगवान बुद्ध का मंदिर भी है। बहराइच से 15 किमी दूर सहेठ-महेठ नामक गांव ही प्राचीन श्रावस्ती है। यह प्राचीन भारत के कौशल राज्य की दूसरी राजधानी भी थी। श्रावस्ती का स्तूप देखने के लिए आपको उत्तर प्रदेश के हिमालय की तलहटी के जिले में आना होगा।
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