29 महीने का कार्यकाल, 4 दिन दफ़्तर आए कुलपति, VC बदलते गए लेकिन नहीं बदला काम करने का तरीका

प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लोगों का कहना है कि राजभवन ने एक आदेश जारी करते हुए कहा था कि सभी पदाधिकारियों को रोजाना अपने दफ्तर में बैठना है।

मुजफ़्फ़रपुर, 20 जुलाई 2022। बिहार में आए दिन शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे मे ही रहती है। अब भीर राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति का दफ़्तर नहीं आने का मामला सुर्खियों में है। प्रोफ़ेसर हनुमान प्रसाद का 29 महीने के कार्यकाल में सिर्फ़ चार दिन दफ़्तर आने का मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल छात्र ईकाई के नेता चंदन यादव ने कुलपति के विधिवत तरीक़े से काम नहीं करने पर छात्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है। आरोप है कि बीआरए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हनुमान प्रसाद अपने आवास से ही दफ़्तर का काम कर रहे हैं।

सिर्फ़ चार दिन ही दफ़्तर आए कुलपति हनुमान प्रसाद

सिर्फ़ चार दिन ही दफ़्तर आए कुलपति हनुमान प्रसाद

प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं, लोगों का कहना है कि राजभवन ने एक आदेश जारी करते हुए कहा था कि सभी पदाधिकारियों को रोजाना अपने दफ्तर में बैठना है, लेकिन प्रो. हनुमान प्रसाद राजभवन के आदेश की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। गौगरतलब है कि 12 मार्च 2020 को आखिरी बार प्रो हनुमान पांडे ने योगदान दिया था उस दौरान वह सिर्फ़ तीन दिन ही विश्वविद्यालय दफ्तर आये थे। जिसके बाद कोरोना काल की वजह से लाकडॉउन लगने से विश्वविद्यालय बंद हो गया। उसके बाद से उन्होंने विश्वविद्यालय मुख्यालय के दफ़्तर क़दम तक नहीं रखा गया। ग़ौरतलब है कि उनके आवास से दफ़्तर महज़ कुछ दूर पर ही स्थित है।

दफ़्तर की बजाय आवास से ही काम करते रहे कुलपति

दफ़्तर की बजाय आवास से ही काम करते रहे कुलपति

कुलपति के दफ्तर में नहीं बैठने की वजह से छात्र संगठनों में आक्रोश व्याप्त है। इस बाबत छात्र संगठन कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं। छात्रों के प्रदर्शन के बाद कुलपति ने पूजा कराने के बाद एक दिन दफ़्तर आए उसके बाद से नदारद दिखे। ग़ौरतलब है कि 2018 में ही राजभवन ने निर्देश जारी करते हुए कहा था कि कुलपति आवास की बजाए दफ़्तर में हाज़िर होकर काम करेंगे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय से कुलपति नदारद नज़र आ रहे हैं। 2018 से लेकर अभी तक विश्वविद्यालय में चार कुलपति की एंट्री हुई है लेकिन सभी कुलपति दफ़्तर की बजाए आवास से ही काम करते हुए नज़र आए।

साइन होने के इंतजार में धूल फांक रही फ़ाइल

साइन होने के इंतजार में धूल फांक रही फ़ाइल

प्रो. अमरेंद्र यादव ने साल 2018 में ज्यादातर दफ्तर का काम आवास से ही किया। वहीं दूसरे कुलपति प्रो. राजेश सिंह आए तो उन्होंने ने भी दफ़्तर का काम आवास से ही निपटा दिया। इसके साथ ही प्रभारी कुलपति प्रोफेसर राज कुमार मंडल ने तो दफ़्तर की शक्ल तक नहीं देखी। इन सब कुलपतियों के बाद हनुमान प्रसाद कुलपति बने और उन्होंने ने भी दफ़्तर नहीं आने का दस्तूर जारी रखा। यही वजह है कि कुलपति के साइन के लिए विश्वविद्यालय की कई फाइलें धूल फांक रही हैं। ताजा उदाहरण स्नातक एडमिशन की फ़ाइल और एडमिशन कमेटी की बैठक के लिए साइन करने के लिए फाइल भेजी गई फ़ाइल पर आज तक दस्तखत नहीं हुए हैं। जिस वजह स्नातक की मेरिट लिस्ट जारी नहीं हो पाई है और दाखिला भी रुका हुआ है।

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