बिहार में SIR प्रक्रिया तेज, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का आज आखिरी मौका! लाखों आवेदन-हजारों आपत्तियां दर्ज

Bihar Voter List Revision: बिहार में चल रही वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया (SIR) अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या गलतियां सुधारने का मौका अब सिर्फ एक दिन के लिए बचा है। राज्यभर में लाखों लोग अपने नाम की स्थिति जांच रहे हैं, क्योंकि इस बार जारी ड्राफ्ट लिस्ट से करीब 65 लाख नाम हटा दिए गए हैं।

चुनाव आयोग (ECI) ने रविवार को बताया कि अब तक 33,326 लोगों ने अपने नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए आवेदन किया है। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि जिनका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, वे समय रहते आवेदन करें। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में भी समयसीमा बढ़ाने की मांग को लेकर सुनवाई होनी है, जिससे यह मुद्दा और भी चर्चा में आ गया है।

Bihar Voter List Revision

7.24 करोड़ नाम ड्राफ्ट लिस्ट में

1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 7.24 करोड़ नाम शामिल किए गए हैं, जो पिछली लिस्ट से करीब 65 लाख कम हैं। इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से राज्य के कई जिलों में मतदाताओं की चिंता बढ़ गई है और लोग अपने नाम की जांच कर रहे हैं।
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नए मतदाताओं की बढ़ती संख्या

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 18 साल पूरे कर चुके 15,32,438 नए मतदाताओं ने भी नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा, 2,07,565 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिनमें ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल कुछ नामों पर सवाल उठाए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि सभी दावे और आपत्तियों की जांच के बाद 30 सितंबर 2025 को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और अन्य दलों की याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इन याचिकाओं में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की गई है। राजनीतिक दलों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग अब भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं और उन्हें थोड़ा और समय मिलना चाहिए।

RTI पर चुनाव आयोग का सीमित जवाब

पारदर्शिता कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने आरटीआई के जरिए चुनाव आयोग से कई अहम जानकारियां मांगी थीं। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि देशभर में SIR प्रक्रिया शुरू करने का आधार क्या था और इसके लिए कौन-सी रिपोर्ट या अध्ययन का सहारा लिया गया। इसके अलावा, उन्होंने 2003 में बिहार में हुई इंटेंसिव रिविजन के आदेश और दिशानिर्देश की भी जानकारी मांगी थी।

लेकिन आयोग ने मांगी गई विस्तृत जानकारी साझा करने के बजाय केवल 24 जून 2025 के आदेश का लिंक दिया। इस जवाब से पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि चुनाव से जुड़ी ऐसी अहम प्रक्रिया में पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि मतदाताओं को भरोसा हो सके कि सब कुछ निष्पक्ष तरीके से हो रहा है।

मतदाताओं से अपील

चुनाव आयोग ने राज्य के नागरिकों से अपील की है कि वे अपने नाम की स्थिति ऑनलाइन या नजदीकी केंद्र पर जाकर जरूर जांचें। जिनका नाम गायब है, वे समय रहते आवेदन कर दें, ताकि किसी को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।
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