आरजेडी-कांग्रेस को अपने ही विधायकों ने दिया झटका! कैसे 4 'लापता' वोटों ने बदल दी राज्यसभा की तस्वीर?
Bihar Rajya Sabha Polls: बिहार में सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ दिखा दी, जबकि विपक्ष अपनी ही रणनीति में उलझकर पिछड़ गया।
चुनाव में सबसे अहम मोड़ तब आया जब विपक्ष के चार विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जिससे उसका गणित बिगड़ गया। NDA ने पहले से ही पांचवीं सीट के लिए खास रणनीति बनाई थी और दूसरे वरीयता वोट के जरिए जीत सुनिश्चित की। इस चुनाव ने साफ कर दिया कि सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि सही समय पर सही रणनीति भी जीत तय करती है।

NDA के पांचों उम्मीदवार जीते
इस चुनाव में NDA के जिन पांच उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, उनमें मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर, बीजेपी नेता शिवेश कुमार और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा में जाने के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संकेत भी दिया है, जो राजनीतिक रूप से बड़ा कदम माना जा रहा है।
विपक्ष के चार विधायक नहीं पहुंचे
मतदान के दौरान विपक्ष के चार विधायक वोट देने नहीं पहुंचे, जिनमें कांग्रेस के तीन और आरजेडी का एक विधायक शामिल था। इससे विपक्ष की संख्या 41 से घटकर 37 रह गई। इस कमी का सीधा फायदा NDA को मिला, खासकर दूसरी वरीयता (सेकेंड प्रेफरेंस) के वोटों में।
दूसरे वरीयता वोट में NDA को बढ़त
राज्यसभा चुनाव में जब कोई उम्मीदवार पहली वरीयता के वोटों से जरूरी आंकड़ा हासिल नहीं कर पाता, तब दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती होती है। इस चुनाव में भी ऐसा ही हुआ। NDA और विपक्ष, दोनों ही पहले चरण में जरूरी 41 वोट नहीं जुटा पाए।
दूसरी वरीयता की गिनती में शिवेश कुमार को 4002 वोट मिले, जो जरूरी 3099 से काफी ज्यादा थे। इसके साथ ही विपक्ष का उम्मीदवार मुकाबले से बाहर हो गया।
वोटों का गणित कैसे NDA के पक्ष में गया
जेडीयू के नेताओं के मुताबिक, नीतीश कुमार और नितिन नवीन को 44-44 वोट मिले, जबकि रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा को 42-42 वोट प्राप्त हुए। दूसरी वरीयता में सबसे ज्यादा फायदा शिवेश कुमार को मिला।
NDA के पास कुल 202 विधायक हैं, जिससे चार सीटों पर उसकी जीत पहले से तय मानी जा रही थी। पांचवीं सीट के लिए उसे 41 का आंकड़ा चाहिए था, जिसमें वह तीन वोट कम था। ऐसे में NDA ने सीधे संख्या जुटाने के बजाय रणनीति के तहत चुनाव को दूसरे वरीयता तक ले जाने का फैसला किया।
विपक्ष की रणनीति क्यों फेल हुई?
विपक्ष के पास कुल 35 विधायक थे, लेकिन AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक के समर्थन से वह 41 तक पहुंचने की उम्मीद कर रहा था। इसके बावजूद कांग्रेस के तीन विधायक-मनोज प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज बिस्वास-मतदान के लिए नहीं पहुंचे। इसके अलावा आरजेडी विधायक फैसल रहमान भी वोटिंग से दूर रहे, जिससे विपक्ष की स्थिति और बिगड़ गई। बताया गया कि पार्टी नेताओं के लगातार संपर्क के बावजूद वह दिल्ली में मौजूद थे।
कांग्रेस में टूट की चर्चा तेज
कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ समय से असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं। 2025 के विधानसभा चुनाव में NDA की बड़ी जीत के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ गए थे। राज्यसभा चुनाव में विधायकों की अनुपस्थिति ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने बीजेपी पर विधायकों को प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि तीनों विधायकों से 13 मार्च तक संपर्क था, लेकिन अचानक उनसे संपर्क टूट गया।
NDA ने विपक्ष पर साधा निशाना
जेडीयू और बीजेपी नेताओं ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि राज्यसभा चुनाव में सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि समझ और योजना भी जरूरी होती है, जिसमें विपक्ष पीछे रह गया।
जेडीयू नेता संजय कुमार झा ने कहा कि NDA को पहले से अंदाजा था कि मामला दूसरी वरीयता तक जाएगा और वहां उसकी स्थिति मजबूत है।
RJD और सहयोगियों का आरोप
आरजेडी और उसके सहयोगियों ने इस नतीजे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पैसे, दबाव और सत्ता के दुरुपयोग की वजह से यह स्थिति बनी। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अगर नीतीश कुमार चाहते तो पांचवीं सीट पर चुनाव टाला जा सकता था। वहीं आरजेडी ने यह भी दावा किया कि पहली वरीयता में उनके उम्मीदवार को NDA से ज्यादा वोट मिले थे, लेकिन फिर भी वह जीत नहीं पाए।
अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं
जेडीयू मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि आरजेडी ने बिना पर्याप्त संख्या के चुनाव लड़कर गलती की।
एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान ने भी कहा कि विपक्ष को अपने विधायकों की नाराजगी का कारण खुद तलाशना चाहिए।
हम (सेक्युलर) के नेता जीतन राम मांझी ने भी तंज कसते हुए कहा कि जब टिकट पैसे के आधार पर दिए जाएंगे, तो विधायक साथ नहीं देंगे।
जेडीयू अध्यक्ष पद को लेकर भी हलचल
इसी बीच जेडीयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव का भी ऐलान कर दिया है। 22 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर 27 मार्च को चुनाव होगा। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार ही दोबारा अध्यक्ष बन सकते हैं, क्योंकि उनके खिलाफ कोई और उम्मीदवार सामने आने की संभावना कम है। राज्यसभा जाने के बाद नीतीश कुमार दिल्ली में ज्यादा समय बिताएंगे और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
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