पांच चरणों की वोटिंग के बाद, बिहार में मोदी बड़ा फैक्टर या तेजस्वी लगाएंगे INDIA की नैया पार?
PATNA: लोकसभा चुनाव 2024 के तहत अबतक पांच चरणों का चुनाव पूरा हो चूका है। अब महज दो चरणों का मतदान होना बाकी है। लेकिन, इस बार बिहार के चुनाव में अबतक जनता के बीच कई नई चीजें देखने को मिली है जो अमूमन बिहार की राजनीति में नहीं ही देखने को मिलती थी।
बिहार के बारे में ऐसी कहावत है कि यहां लोग कैंडिडेट नहीं बल्कि जाति देख कर वोट करते हैं। पार्टी का सिंबल और कैंडिडेट यहां जाति के बाद आता है। लेकिन, इस दफे काफी हद तक यह मीथ खत्म होता हुआ नजर आ रहा है। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से अबतक पांच मुद्दों पर टिका हुआ नजर आया है। जिसमें न सिर्फ बिहार के नेता विपक्ष तेजस्वी यादव की नई छवि तैयार हुई है बल्कि उनके पर से एक बहुत बड़ा टैग की धीरे -धीरे समाप्त होता दिख रहा है।

वहीं, बीजेपी का संगठन भी पहले की तुलना में मजबूत नजर आ रहा है। बाकि एनडीए के सहयोगियों को भी थोड़ी -थोड़ी सफलता जरूर मिलती हुई नजर आ रही है। लेकिन, चुनावी मुद्दे अबतक महज पांच ही नजर आए हैं।
तेजस्वी यादव अब सिर्फ 'यादव' नेता नहीं, नौकरी का वादा करेगा काम
सबसे पहले हम बात करते हैं बिहार के नेता विपक्ष तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी राजद की। अबसे पहले तक इस पार्टी को 'माई' समीकरण की पार्टी कहा जाता था। लेकिन, इस बार बिहार की सत्ता में आते ही तेजस्वी यादव ने सबसे पहले खुद को इस मिथ से दूर करने का फैसला किया। जेडीयू के साथ सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने पार्टी में हर समाज से लोगों को चुन-चुन कर बढ़ा पद दिया ताकि अपनी पुरानी छवि को बदला जा सके।
उसके बाद तेजस्वी यादव अपनी सभा में जिस नौकरी की बात कर रहे हैं उसमें भी सभी जाति और समाज को फायदा हुआ। लिहाजा अब यह कहना गलत नहीं होगा कि तेजस्वी यादव अब सिर्फ 'यादव' नेता नहीं रहे। इसको लेकर मीडिया चैनल की रिपोर्ट देखें तो युवाओं में तेजस्वी का अच्छा क्रेज बना है जो उनके लिए विधानसभा में काफी फायदा दे सकता है।
राजद की सोशल इंजीनियरिंग
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव अकेले खुद के दम पर इंडिया गठबंधन के नैया का खेवनहार बने हुए हैं। जबकि तेजस्वी को कमर और रीढ़ की हड्डी में तेज दर्द के कारण डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। फिर भी वह प्रचार में शामिल हैं। लेकिन, इस दौरान तेजस्वी की सभा में जो बातें देखने को मिल रही है वह यह है कि तेजस्वी अपनी सभा में सरकारी नौकरियों, रोजगार जैसे मुद्दों पर केन्द्रित नजर आ रहे हैं।
पार्टी के मुस्लिम-यादव (MY) आधार का विस्तार कर BAAP टर्म को जोड़ा है, जिसमें B-बहुजन, A- अगड़ा (उच्च जातियां), A-आधी आबादी (महिलाएं) और P (Poor) गरीबों को शामिल करने की कोशिश करके चतुर सामाजिक इंजीनियरिंग को अंजाम देने की कोशिश की गई है। इसका फायदा भले ही अभी न मिले लेकिन उन्होंने एक नया एजेंडा जरूर तय कर दिया है।
इस चुनाव में सूबे के मुखिया, नीतीश कुमार कहां हैं?
दरअसल, अबतक के पांच चरणों के मतदान के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने कई चुनावी जनसभा की हैं। लेकिन, एक बड़े मीडिया एजेंसी की रिपोर्ट की मानें तो इस बार सीएम की चुनावी जनसभा में उतनी भीड़ नहीं दिखी जो अमूमन इससे पहले के चुनाव के दौरान नजर आते थे। अब इसकी वजह देखें तो सबसे पहले उनका पाला बदलना है और दूसरा बार-बार सीएम की जुबान का फिसलना भी है।
इसके साथ ही साथ हर सभा में घुमा-फिरा कर पुराने जंगलराज की बात को लाना है। इसको लेकर युवाओं का मत है कि वो दौर दूसरा था अब कुछ और है। हर कोई जानता है कि नीतीश कुमार ने काम किया, लेकिन अब आगे वो क्या करेंगे बताने के बजाए पुरानी बातों को ही लेकर चल रहे हैं।
हालांकि, बीजेपी को अभी भी विश्वास है कि 13-14% वोट और खासतौर से ईबीसी और दलित नीतीश कुमार पर निर्भर हैं। लेकिन, यह तय है की नीतीश अब तीसरा पक्ष हैं।
महिला मतदाता को मोदी पर कितना भरोसा
चुनाव की बात हो और आधी आबादी की बात न हो यह संभव नहीं। ऐसे में इसबार के चुनाव में अबतक के जो आकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक पहले चार चरणों में महिलाओं और पुरुषों के मतदान के बीच का अंतर 6 प्रतिशत अंक से लेकर 10 प्रतिशत अंक तक रहा है। ऐसे में जानकारों की मानें तो पिछले कुछ चुनावों में महिलाओं के बीच अधिक मतदान का एक कारण महिलाओं के बीच NDA की योजनाओं सीधा लाभ मिलना बताया जा रहा है।
महिला वोटरों का मानना है कि "जिसका खाएंगे उसे वोट देंगे ना।" जब लोकल चैनल्स ने कुछ महिला वोटरों से बातचीत की तो उनका कहना था कि जिनके पास कमाने वाला कोई नहीं है, उसको मोदी सरकार में अनाज मिल रहा है तो हम उसी को वोट देंगे। हालांकि, कुछ महिला वोटरों का यह भी कहना है की मोदी सरकार को उज्ज्वला योजना पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि यहां गरीब लोग गैस का दाम अधिक होने से इसका खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं।
सांसद से नाराज लेकिन मोदी की नैया कराएंगे पार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार के चुनाव में एक फैक्टर हैं। अबतक के चुनाव में हर जगह काफी हद तक लोगों में अपने सांसद से नाराजगी नजर आई है। लेकिन, जैसे ही उनके सामने पीएम मोदी का नाम आता है वो फिर अपनी सारी नाराजगी भूल जाते हैं और मोदी की तारीफ करना शुरू देते हैं।
बिहार कई लोकसभा क्षेत्रों में दर्जनों मतदाताओं ने कहा कि देश को चलाने के लिए मोदी अभी भी सबसे अच्छे विकल्प हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लिए अब कोई युवा ही ठीक रहेगा।












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