बिहार में 'चिराग मॉडल' पर मचा हंगामा, क्या सच में नीतीश सरकार को गिरा देगा यह मॉडल
पटना, 08 अगस्त। बिहार में चल रहे सियासी संकट के बीच बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इस बीच जिस तरह से पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरसीपी सिंह ने जदयू से इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला उसपर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि आज नहीं तो कल आरसीपी सिंह को पार्टी से बाहर जाना ही था। ललन सिंह ने कहा कि जदयू डूबता हुआ जहाज नहीं है, उन्हें कुछ पता ही नहीं है। ये सब नीतीश जी के कद को छोटा करने की साजिश है, बिहार में दूसरा चिराग पैदा करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन हम इस षड़यंत्र को सफल नहीं होने देंगे। फिर से बिहार में चिराग मॉडल नहीं चलेगा।
Recommended Video

क्या है चिराग मॉडल
जिस तरह से ललन सिंह ने बिहार में चिराग मॉडल की बात कही है उसके बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर यह चिराग मॉडल क्या है। दरअसल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख रामविलास पासवान के निधन के बाद पार्टी के भीतर फूट पड़ गई। चिराग पासवान के चाचा ने पशुपति कुमार पारस ने अपने समर्थकों के सात पार्टी के साथ बगावट कर दी और उन्हें पार्टी का नेता चुन लिया गया और उन्हें पार्टी की कमान मिल गई। यही नहीं पशुपति पारस लोकसभा में लोजपा के संसदीय दल के नेता भी नियुक्त हो गए।

अब नहीं चलेगा चिराग मॉडल
जिस तरह से पशुपति कुमार पारस ने पार्टी के भीतर बगावत की और पार्टी के अन्य चार सांसदों के साथ मिलकर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया उसके बाद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बना दिया गया। ललन सिंह ने इस मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा एक बार फिर से चिराग मॉडल को लागू करना चाहती है। लेकिन नीतीश कुमार ने इस षड़यंत्र को पहले ही पकड़ लिया। आज नहीं तो कल उन्हें पार्टी से बाहर जाना ही था।

चिराग बोले मैं मॉडल नहीं
वहीं ललन कुमार के चिराग मॉडल को लेकर चिराग पासवान ने उनपर तीखा हमला बोला है। चिराग ने कहा कि मैं सकारात्मक राजनीति करता हूँ। किसी का कोई मॉडल नहीं हूँ। दूसरे का घर तोड़ने वाले के घर में ही आज फूट हो गयी है। बेहतर होगा कि वे कारणों को बाहर चौराहे पर ना तलाशें। आज नीतीश कुमार यही कह रहे हैं कि मेरे नाक के नीचे भ्रष्टाचार करते रहे, आरसीपी सिंह और फिर भी आप सुशासन बाबू कहलाते हैं। बिहार की जनता के साथ ये सरासार धोखा है और इसका जवाब बिहार की जनता ही देगी। ये तीन योद्धा जो बैठे थे। इनका ट्रैक रिकॉर्ड देखने के लिए ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है। आसानी से पता चल जाएगा कि नीतीश कुमार को दरअसल डरना किससे चाहिए।

आखिर कैसे 9 साल भ्रष्टाचार करते रहे आरसीपी सिंह
वहीं जदयू के पूर्व नेता अजय आलोक ने कहा कि जिस तरह से समय करवट ले रहा है, उस समय में मुझे कुछ बताने की जरूरत नहीं है। मुझे पार्टी ने मुझे पार्टी विरोधी गतिविधि के चलते निकाल दिया गया था। अजय आलोक ने कहा कि आरसीपी सिंह पर 2013 से लेकर 2022 तक 58 संपत्तियां खरीदने के आरोप लगे। अगर उन्होंने भ्रष्टाचार किया है तो यह सीधा सवाल है कि अगर 9 साल तक वह भ्रष्टाचार करते रहे तो इसका जिम्मेदार कौन है, नीतीश कुमार की नाक के नीचे वह भ्रष्टाचार करते रहे। ऐसा कैसे हो सकता है कि पार्टी का नंबर दो नेता भ्रष्टाचार कर रहा है और नंबर एक नेता नीतीश कुमार को इसका पता भी नहीं हो।

नीतीश को जवाब देना चाहिए
नीतीश कुमार को हमेशा से ही भाजपा के साथ गठबंधन कम सीटें होने के बाद भी मुख्यमंत्री बनाया। खुद अटल जी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था। भाजपा ने हमेशा ने उन्हें गठबंधन में मुख्यमंत्री बने। भाजपा ने हर बार नीतीश कुमार का समर्थन किया, भाजपा ने नीतीश कुमार को कितना चाहा है, लेकिन इसके बाद भी नीतीश अलग होना चाहते हैं तो जवाब उन्हें देना चाहिए कि वह क्या चाहते हैं।

कौन बचा है एनडीए में
जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि जिन दलों के साथ भाजपा ने एनडीए गठबंधन की शुरुआत की, उसमे से कौन से दल बचे हैं जदयू के अलावा। कई दलों के अंदर इन लोगों ने समूह खड़े किए, ऐसे कई दलों की फेहरिस्त है। शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना और जदयू हमेशा भाजपा के साथ मिलकर काम किया। अब सिर्फ जदयू एनडीए में बचा है। नीतीश कुमार की पार्टी की सीटों की संख्या कम रही लेकिन बावजूद इसके उनके कद का नेता ना तो भाजपा के पास है और ना ही किसी और दल के पास वह चेहरा है। भाजपा शहरों में सिमटी पार्टी थी, शहरों के बाहर भाजपा का कोई वजूद नहीं था।












Click it and Unblock the Notifications