Bihar News: बिहार में ताड़ी पर तकरार, तेजस्वी और चिराग क्यों कर रहे हैं समर्थन? जानिए पूरी राजनीति
Bihar News: बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव इसी साल के अंत तक होना है। ऐसे में वोटरों को अपने साथ करने के लिए राजद नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों को लुभाने के लिए बड़ा ऐलान करते हुए इसे उद्योग का दर्जा देने का वादा किया है। वहीं चिराग पासवान ने भी ताड़ी व्यवसाय का समर्थन करते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक उत्पाद है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर बिहार में शराब बंद होने के बावजूद ताड़ी पर तकरार क्यों हो रही है? इसके पिछे की सबसे बड़ी वजह क्या है?
राजद नेता तेजस्वी यादव ने पूर्व सीएम लालू यादव के ताड़ी वाली राजनीति को फिर से आगे बढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है। लालू यादव ने अपने शासनकाल के दौरान ताड़ी उद्योग को टैक्स फ्री कर दिया था। जिससे बड़ी संख्या में पासी और पासवान समाज को इसका लाभ मिलता था। सीएम नीतीश कुमार ने शराब, ताड़ी जैसे मादक पदार्थों को गैरकानूनी घोषित कर दिया है।

लालू यादव ने ताड़ी को टैक्स फ्री किया था
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा गरीबों के मसीहा लालू यादव ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ताड़ी को टैक्स फ्री किया था जिसकी बदौलत ताड़ी व्यवसाय में वृद्धि हुई और पासी समाज में संपन्नता आई। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 𝟐𝟎𝟐𝟑 के सामाजिक आर्थिक जातिगत सर्वेक्षण के अनुसार बिहार के पासी समाज में भूमिहीन परिवारों की संख्या आज भी 𝟕𝟔% है। पासी समाज की तीन चौथाई आबादी के पास खेती के लिए जमीन नहीं होना शर्मनाक है। ये साबित करता है की सरकार का न्याय के साथ विकास का दावा खोखला है।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा बिहार में अनुसूचित जातियों की आबादी 𝟐𝟏.𝟑% से अधिक होने के बावजूद, सरकारी और पेशेवर क्षेत्रों में दलितों की भागीदारी महज 𝟏.𝟏𝟑% पर सिमट कर रह गई है। अनुसूचित जाति की कुल आबादी का सिर्फ 𝟎.𝟎𝟏𝟓% डाक्टर हैं अनुसूचित जाति की कुल आबादी का सिर्फ 𝟎.𝟏% इंजीनियर हैं। हमने घोषणा की है कि सरकार बनने पर पासी समाज के एकमात्र रोजगार के साधन ताड़ी पर बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम 𝟐𝟎𝟏𝟔 के द्वारा लगी पाबंदी को ख़त्म कर देंगे।
उद्योग का दर्जा देने के लिए हमारी सरकार की तरफ से कोशिश की जायेगी: तेजस्वी
उन्होंने कहा कि यदि ताड़ी को उद्योग का दर्जा दिया जाता तो पूरा पासी समाज आर्थिक सम्पन्नता प्राप्त कर समाज की अगली पंक्ति में बैठता, परन्तु नीतीश सरकार ने इस पूरी जाति को ही अपराधी घोषित कर दिया। यह जातीय स्वाभिमान,आत्मसम्मान और गरिमा पर चोट है। हमारी सरकार बनते ही इस कानून में सुधार किया जाएगा और ताड़ी पर लगी रोक हटाई जायेगी। इसे उद्योग का दर्जा देने के लिए हमारी सरकार की तरफ से हरसंभव कोशिश की जायेगी।
चिराग पासवान ने क्या कहा है?
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ताड़ी को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा, "मैं पहले भी कई बार यह स्पष्ट कर चुका हूं कि हमारी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सहयोगी है और हम राज्य सरकार का समर्थन करते हैं, लेकिन हम सीधे तौर पर शासन का हिस्सा नहीं हैं।"
ताड़ी को लेकर हो रही बहस के बीच चिराग पासवान ने कहा कि ताड़ी एक प्राकृतिक उत्पाद है और इसे शराब की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने ताड़ी को पारंपरिक और स्वाभाविक पेय बताया और कहा कि इसे शराबबंदी के दायरे में लाना उचित नहीं होगा।
बिहार में ताड़ी पर तकरार का कारण क्या है?
बिहार में ताड़ी उद्योग पर पासी और पासवान समुदाय की निर्भरता काफी पहले से है। पासी समुदाय पारंपरिक रूप से ताड़ी निकालने और बेचने का कार्य करता रहा है। यह उनका वंशानुगत पेशा रहा है। ताड़ी सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान और संस्कृति का हिस्सा भी है। कुछ पर्वों और पारंपरिक आयोजनों में इसका प्रयोग होता है। पासवान समुदाय, जो कि दलितों में एक बड़ा और प्रभावशाली समुदाय है, ताड़ी व्यवसाय में सीधे नहीं तो उससे जुड़े सहायक कार्यों में शामिल रहा है।
ताड़ी का व्यवसाय इन समुदायों के लिए प्रमुख आर्थिक स्रोत है
बिहार के ग्रामीण इलाकों में खासकर दक्षिणी और मध्य बिहार में ताड़ी का व्यवसाय इन समुदायों के लिए प्रमुख आर्थिक स्रोत है। बिहार सरकार द्वारा शराबबंदी लागू करने के बाद, इस व्यवसाय पर असर पड़ा, जिससे इन समुदायों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद, ताड़ी पर भी कार्रवाई की गई, जिससे पासी समुदाय को विरोध करना पड़ा था। बाद में नीतीश सरकार ने ताड़ी पर आंशिक छूट दी।
पासवान और पासी समुदायों चिराग पासवान का परंपरागत वोट रहा है
ताड़ी पर प्रतिबंध या छूट देने का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। चुनाव के समय, राजनीतिक दल ताड़ी से जुड़े समुदायों को लुभाने के लिए इसे मुद्दा बनाते हैं। ऐसे में राजद नेता तेजस्वी यादव चाहते हैं कि वो पासी और पासवान समुदाय को चुनाव से पहले अपने पाले में कर लें। वहीं चिराग पासवान NDA का हिस्सा रहते हुए भी ताड़ी को "प्राकृतिक उत्पाद" बताते हैं, तो इसका उद्देश्य पासवान और पासी समुदायों जो उनका परंपरागत वोट रहा है। उस वोटर को वो चाहते हैं कि वो उनकी पार्टी से जुड़े रहें।
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बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, गरीबी और पलायन जैसे बड़े मुद्दे हैं जिससे लोग काफी परेशान हैं। ऐसे में बिहार की राजनीति को अपने राजनीतिक लाभ के लिए मादक पदार्थ का समर्थन करना कितना सही है ये तो चुनाव के वक्त ही साफ होगा।












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