Ram Mandir: यहां माता सीता से है भगवान राम की पहचान, जानें बिहार में स्थित इस मंदिर की कहानी
अयोध्या में राम आ रहे हैं। 22 जनवरी को राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। राम के आगमन पर भला बिहार के मिथिला वासी अपने जमाई को याद कैसे ना करें...तो बस मिथिलांचल के लोग हाल ही में राम जन्मभूमि मंदिर में सीता माता के लिए सैकड़ों भेंट लेकर पहुंचे हैं।
ताकि, बेटी के ससुराल में उसे कोई कमी ना हो। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ उनकी भार्या माता सीता का सीतामढ़ी में स्थित ये पावन धाम भी अलौकिक हो उठा है। कण कण में राम श्रृंखला के इस नए एपिसोड में... हम आपको ले चलते हैं बिहार के मिथिला में स्थित सीतामढ़ी में...

बिहार के मिथिला में स्थित सीतामढ़ी को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है। ये प्रसिद्ध जानकी मंदिर है। जनकपुरधाम के इस मंदिर की पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यता है। माता सीता के इस मंदिर में आपको मैथिल वास्तुकला की बेजोड़ सुंदरता दिखाई देगी। मिथिला साम्राज्य में श्वेत संगमरमर से बना ये तीन-मंजिला मंदिर 1,480 वर्ग मीटर के क्षेत्र में निर्मित है।
सीतामढ़ी हिंदू पौराणिक कथाओं में एक पवित्र स्थान है। इसका इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है। जब राजा जनक बारिश के लिए भगवान इंद्र को मनाने के लिए सीतामढ़ी के पास खेत में हल चला रहे थे, तभी भूमि से मिले एक मिट्टी के पात्र से राजा जनक को एक नन्हीं कन्या मिलीं। यही जानकी सीता कहलाईं। आज इसी स्थान पर एक बड़ा कुंड है, जिसे जानकी कुंड के नाम से जाना जाता है। ये जानकी मंदिर के दक्षिण में स्थित है। राजा जनक ने सीता जी के विवाह के बाद इस स्थान को चिन्हित करने के लिए भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित करवाई थीं।
सीता की खोज के बारे में
मंदिर के इष्टदेव श्री राम, सीता और हनुमान हैं। सीतामढ़ी की पहचान ऐतिहासिक रूप से इसके पौराणिक महत्व के कारण है। भगवान श्रीराम यहां के जमाई हैं, ऐसे में रामनवमी, विवाह पंचमी, दशईं और तिहार के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहां आने वालों में भारत के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल और श्रीलंका से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
श्रीराम को यहां क्यों सुननी पड़ती है गाली?
अब आप सभी ये तो जानते ही हैं, कि भगवान राम मिथिला के जमाई हैं। इस तरह से मजेदार बात ये है कि अखंड ब्रह्माण्ड में भगवान श्रीराम को गाली देने का अधिकार सिर्फ मिथिला वासियों को ही है। हां वो गाली अपमानजनक नहीं बल्कि जमाई के लिए पारंपरिक तौर से सदियों पुरानी विवाह परंपरा के रूप में गाई जाती है।
क्या है जानकी मंदिर का इतिहास?
गुजरती शताब्दियों के साथ-साथ ये स्थान घने वन में बदल गया था। लेकिन, एक हिंदू तपस्वी जिनका नाम बीरबल दास था, दैवीय प्रेरणा से उस स्थान का पता चला, जहां सीता का जन्म हुआ था। उन्होंने जब उस स्थान को साफ करवाया, तो वहां से उन्हें राजा जनक द्वारा स्थापित मूर्तियां मिलीं, जिसके बाद उसी स्थान पर जानकी मंदिर का निर्माण कराया गया। इस मंदिर की वर्तमान इमारत 100 साल पुरानी है। लेकिन, अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर के साथ, करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाएं इस धार्मिक तीर्थ स्थल के साथ और प्रगाढ़ हो गई हैं।












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