क्या चिराग पासवान के 'बिगड़ते सुर' फिर बनेंगे नीतीश की मुसीबत? बिहार चुनाव से पहले NDA में बढ़ी बेचैनी
Bihar Chunav 2025 (Chirag Paswan) : बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी तापमान भी बढ़ने लगा है। राज्य में हाल के दिनों में हत्या और अपराध की बढ़ती घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर चौतरफा सवाल उठ रहे हैं -लेकिन हैरानी की बात यह है कि विपक्ष से ज्यादा हमला अपने ही गठबंधन सहयोगी एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की ओर से हो रहा है।
चिराग पासवान लगातार नीतीश सरकार को निशाने पर ले रहे हैं। कानून-व्यवस्था की स्थिति, बढ़ते अपराध, और सरकार की निष्क्रियता पर वे सार्वजनिक मंचों से तीखा हमला बोल रहे हैं। चिराग का यह रुख सिर्फ अब नहीं, बल्कि 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले भी देखा गया था - जब उन्होंने जेडीयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारकर नीतीश की पार्टी को भारी नुकसान पहुंचाया था। उस चुनाव में जेडीयू मात्र 43 सीटों पर सिमट गई थी और तीसरे स्थान पर आ गई थी।

अगर अकेले लड़ना है, तो खुलकर कहें: नीतीश खेमे की नाराजगी
जेडीयू खेमे को लगता है कि चिराग की यह रणनीति एक बार फिर 2020 जैसी स्थिति पैदा कर सकती है, जिससे गठबंधन कमजोर हो सकता है।
नीतीश के मंत्रिमंडल में शामिल मंत्री महेश्वर हजारी ने चिराग पर निशाना साधते हुए कहा,
"चिराग एनडीए में हैं, केंद्र में मंत्री हैं, लेकिन फिर भी बिहार सरकार की आलोचना करते हैं। ये गठबंधन धर्म के खिलाफ है। अगर चिराग अकेले चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा करनी चाहिए। रिकॉर्ड पर कुछ और और ऑफ द रिकॉर्ड कुछ कहना ठीक नहीं है।''
LJP (R) का पलटवार: 'धृतराष्ट्र नहीं बन सकते'
वहीं एलजेपी (रामविलास) के सांसद और चिराग के बहनोई अरुण भारती ने भी तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा, "अगर अपराध बढ़ रहा है तो हम आंख मूंदकर चुप नहीं रह सकते। यह गठबंधन धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि जनता की चिंता को साझेदारों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। हम 'धृतराष्ट्र' बनकर नहीं बैठ सकते।"
क्या फिर चिराग पासवान दोहराएंगे 2020 की रणनीति?
बिहार चुनाव 2025 से पहले चिराग पासवान के बेबाक बयानों और तीखे सुरों ने नीतीश कुमार की चिंता बढ़ा दी है। चिराग पासवान पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि उन्होंने खुलकर कभी नहीं कहा कि उनकी पार्टी अकेले 243 सीटों पर लड़ेगी, वो हमेशा ये कहते हैं कि हम NDA के साथ मिलकर सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।
अगर चिराग पासवान 2025 में भी जेडीयू विरोधी रुख पर कायम रहते हैं, तो यह एनडीए के लिए सीट शेयरिंग और रणनीतिक तालमेल में बड़ी चुनौती बन सकता है। इसका सीधा फायदा राजद-कांग्रेस गठबंधन और इंडिया ब्लॉक को मिल सकता है, जो पहले से ही नीतीश पर हमलावर है।
अगर चिराग को मनाने में बीजेपी असफल रहती है, तो बिहार में NDA का वोट बंटने का खतरा बढ़ जाएगा। अगर एलजेपी (R) सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारती है, तो सीधी टक्कर JDU और BJP को पड़ेगी, जिससे कई सीटों पर नुकसान संभव है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या वे इस बार भी परोक्ष रूप से जेडीयू को कमजोर करने की रणनीति अपनाएंगे? क्या चिराग के 'बेतुके सुर' नीतीश कुमार के लिए फिर से मुसीबत बनेंगे? क्या एनडीए के भीतर बढ़ती असहजता आगामी चुनाव में गठबंधन को नुकसान पहुंचाएगी या फिर यह सब एक 'प्री-इलेक्शन प्रेसर पॉलिटिक्स' का हिस्सा है?
इन सवालों के जवाब तो आने वाले हफ्तों में मिलेंगे, लेकिन इतना साफ है कि बिहार की सियासत में चुनावी हलचल अब तेज होती जा रही है, और गठबंधन के भीतर घमासान की आहटें साफ सुनाई देने लगी हैं।












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