'अनंत सिंह को पीटा था, सूरजभान डॉन है, इनको वोट देने से बेहतर है मर जाना', आरके सिंह क्यों हुए आगबबूला?

Rk Singh (Bihar Election 2025): बिहार विधानसभा के पहले चरण के चुनाव में अब सिर्फ दो हफ्ते बचे हैं और राजनीतिक गर्माहट तेज होती जा रही है। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह (आरके सिंह) ने कुछ ऐसा बयां दिया जिससे सियासी माहौल और भड़क गया। उन्होंने अपने बयान में अनंत सिंह से लेकर सूरजभान सिंह तक की आलोचना की है।

उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कुछ विपक्षी नेताओं को "अपराधिक पृष्ठभूमि" वाला करार देते हुए चेतावनी दी कि ऐसे लोगों को वोट देने से बेहतर है "चुल्लू भर पानी में डूब मर जाना"। उनके इन शब्दों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है।

Rk Singh Bihar Election 2025

आरके सिंह की तीखी टिप्पणी: आरोप और तर्क

आरके सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयानों में कहा कि जनता को ऐसे प्रत्याशियों को चुनते समय आराम से फैसला करना चाहिए जो अपराधिक या भ्रष्ट पृष्ठभूमि के हों। उन्होंने कहा, 'अगर आपके सामने जितने भी प्रत्याशी भ्रष्ट हैं, तो वोट NOTA को दे देना चाहिए।" पोस्ट में आरके सिंह ने कई नाम लेकर आरोप भी लगाए और चुनावी उदाहरण दिए।

उन्होंने मोकामा के संदर्भ में कहा कि वहां से एनडीए प्रत्याशी अनंत सिंह पर हत्या, नरसंहार और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं और उस समय उन्होंने (आरके सिंह ने) अपने अधिकारी के तौर पर घटनास्थल पर जाकर कार्रवाई की थी। साथ ही उन्होंने राघोपुर से जुड़े सूरजभान सिंह पर भी गंभीर आरोपों का जिक्र किया और कहा कि वे कभी बिहार के कुख्यात डॉनों में गिने जाते रहे हैं।

आरके सिंह ने नवादा, रघुनाथपुर, तारापुर और जगदीशपुर समेत कई सीटों के प्रत्याशियों का नाम लेकर उन पर संगीन आरोप दोहराए - कहीं बलात्कार के आरोप, कहीं POCSO से जुड़ी शिकायतें, तो कहीं हत्या संबंधी संदिग्ध कथानक। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों के खि‍लाफ वोट डालने से राज्य का विकास रुक जाएगा और अपराध-प्रवृत्ति हावी रहेगी।

आरके सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में किन-किन नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

🔹 आरके सिंह ने पोस्ट में लिखा, '' मोकामा से NDA प्रत्याशी अनंत सिंह हैं - इनपर हत्या , नरसंहार तथा अपहरण जैसे गंभीर आरोप रहे हैं। जब मैं 1985 में पटना का जिलाधिकारी था तो यह व्यक्ति अपने भाई दिलीप सिंह और विवेका सिंह के साथ अनुमंडल के सामने उपद्रव कर रहा था, तो मैं पटना से वहा पहुंच कर उनको पीट कर भगाया था।''

🔹 उन्होंने आगे कहा, ''मोकामा से RJD प्रत्याशी सूरजभान सिंह की पत्नी हैं, सूरजभान सिंह खुद चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, इसलिए अपने पत्नी के माध्यम से खड़े है। इनपर 2-3 राज्यों में हत्या के आरोप रहे हैं। जब मैं बिहार का गृह सचिव था तो यह बिहार क नंबर वन डॉन था और मैंने नालंदा के तत्कलिन आरक्षी अधीक्षक को किसी भी परिस्थिति में इनको गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।''

🔹 आरके सिंह ने लिखा, ''नवादा से NDA प्रत्याशी राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी हैं - राजबल्लभ यादव बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के लिS POCSO एक्ट के आरोपी है। वो अपनी पत्नी विभा देवी के माध्यम से चुनाव लड़ रहा है।''

🔹 आरके सिंह ने लिखा, ''रघुनाथपुर से RJD प्रत्याशी शाहबुद्दीन के बेटे ओसामा है -शाहबुद्दीन एक दुर्दांत अपराधी था, जिसपर हत्या के कई आरोप थे। तारापुर से NDA प्रत्याशी सम्राट चौधरी हैं, इनपर हत्या का आरोप और उम्र के सर्टिफिकेट फोर्जरी कर के बेल पर बाहर होने का आरोप एक पार्टी ने खुलेआम लगाया जिसका जवाब आज तक नहीं दे सके''

🔹 उन्होंने पोस्ट में लिखा, जगदीशपुर (आरा) से NDA प्रत्याशी भगवन सिंह कुशवाहा है, ये नरसंहार के आरोपी रहे हैं। सन्देश से NDA प्रत्याशी राधा चरण साह हैं, ये एक बालू माफिया हैं जो अभी हाल में ही जेल से छूटे है। ED की रेड के बाद 10 महीने जेल में रहे।
सन्देश (आरा) से RJD प्रत्याशी अरुण यादव के बेटे दीपु सिंह है, अरुण यादव POCSO एक्ट के आरोपी है। इन लोगो को वोट करने से बेहतर होगा चुल्लू भर पानी में डूब मरना।''

राजनीतिक हलकियां-किस्सा विवाद से कहां तक बढ़ेगा?

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर इस टिप्पणी को मिलेजुले प्रतिक्रियाएं मिली हैं। समर्थकों के एक हिस्से ने आरके सिंह की भाषा को "कठोर पर जरूरी" करार दिया, जबकि विरोधियों ने इसे चुनावी बहिष्कार, चरित्र हत्या और गंभीर आरोपों को सामान्य करने की कोशिश बताया।

राजनीति का गणित अक्सर भावनाओं और भय-आधारित संदेशों से प्रभावित होता है। आरके सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं के कड़े शब्द कुछ मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां अपराध से जुड़ी चर्चाएं पुरानी हैं। दूसरी ओर जिन दलों के प्रत्याशी निशाने पर हैं, वे इस बयान को नीचा और उद्दंड करार देकर पलटवार भी कर सकते हैं।

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