Bihar Election 2025: 74 की उम्र में नीतीश कुमार की ताबड़तोड़ रैलियां, विपक्ष का 'बीमार CM' वाला नैरेटिव फेल!
Bihar Election 2025 (Nitish Kumar): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार युद्ध में नीतीश कुमार का अभियान अनूठा रूप ले रहा है। उन्होंने 10 अक्टूबर से शुरु किए अपने चुनावी अभियान के तहत कम-से-कम 100 जनसभाओं का लक्ष्य रखा है। ऐसे में सवाल उठता है अगर उनकी तबीयत वाकई इतनी खराब होती जितना विपक्ष और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन के प्रवक्ता दावा करते हैं, तो वो इतने तीव्र-गति से रैली-मैराथन कैसे चलाते?
विरोधी खेमे द्वारा समय-समय पर फैलाया गया यह नैरेटिव -'मुख्यमंत्री की हेल्थ गड़बड़ है, इसलिए जीत की पारी नहीं खेल पाएंगे', अब उनकी रैलियों के आंकड़ों से धराशायी हो चुका है। नीतीश कुमार अलग-अलग क्षेत्रों में तीन-चार सभाएं हर दिन कर रहे हैं, भारी बारिश में भी रोड-शो किया। 29 अक्टूबर को उन्होंने नालंदा जिले की सातों विधानसभा क्षेत्रों में एक ही दिन में जनसभाएं सम्बोधित कर करीब 120 किलोमीटर की यात्रा तय कर एक राजनीतिक कीर्तिमान स्थापित किया।

तेजस्वी यादव हर दिन कितनी रैली कर कर रहे हैं?
इधर, 35 वर्षीय तेजस्वी यादव प्रतिदिन 2-3 रैलियों तक ही सीमित रह रहे हैं, जबकि उनके ऊपर यह दायित्व है कि वो नई ऊर्जा, नई छवि लेकर आगे आएं। लेकिन उनकी रैलियों में कुछ हद तक मौसम और आयोजनों की रफ्तार ने बाधा डाली है। राहुल गांधी की कुल 10 सभाएं, प्रियंका गांधी की 5, और खड़गे जी की 6! मतलब नीतीश कुमार अकेले पूरे इंडिया गठबंधन से ज्यादा रैलियां कर रहे हैं! वहीं नीतीश की मौजूदगी यह साबित कर रही है कि उनकी सेहत बिल्कुल "फिट एंड फाइन" है अगर नहीं होती तो रैली-गणना ऐसे रिकॉर्ड तक कैसे जाएंगी?
इस बीच, जेडीयू एनडीए ने रणनीति गतिशील बना रखी है। 243 विधानसभा सीटों में हर जगह एक-एक रैली संभव नहीं, इसलिए मुख्यमंत्री की सभाएं उन स्थानों पर बुलाई जा रही हैं, जहां से आसपास के कई विधानसभा क्षेत्र कवर हो जाएँ। साथ ही बूथ-स्तर तक प्रचार का दायित्व प्रदेश-पदाधिकारियों को सौंपा गया है।

नीतीश क स्वास्थ्य पर अटकलें सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है!
नीतीश क स्वास्थ्य पर अटकलें अब महज प्रोपेगेंडा नजर आने लगी हैं। इस चुनाव में उनकी "रणनीति और ऊर्जा" निवेश दोनों सामने हैं, और जनता को यह तय करना है कि कौन 'स्वास्थ्य' का बहाना बना रहा है और कौन काम कर रहा है।
नीतीश कुमार का चुनावी कैंपेन बताता है कि वो फिट हैं, फोकस्ड हैं, और फुल फॉर्म में हैं। इतनी ताबड़तोड़ रैलियां, इतनी लंबी यात्राएं, इतनी बड़ी भीड़ ये सब किसी बीमार इंसान के बस की बात नहीं। 74 की उम्र में वो बिहार की धूप, बारिश और भीड़ सब झेल रहे हैं।
बात साफ है जो आदमी 74 साल की उम्र में 120 किलोमीटर की चुनावी यात्रा करता है, हर दिन 4 रैलियां करता है, बारिश में भी रोड शो छोड़ता नहीं, वो बीमार नहीं हो सकता है। विरोधी खेमे द्वारा समय-समय पर फैलाया गया यह नैरेटिव 'मुख्यमंत्री की हेल्थ गड़बड़ है, इसलिए जीत की पारी नहीं खेल पाएंगे'अब उनकी रैलियों के आंकड़ों से धराशायी हो चुका है।












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