Bihar: सांसद नहीं बन पाए तो विधायक ही सही! लोकसभा में हार झेल चुके दिग्गज अब विधानसभा में आजमा रहे किस्मत
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का मैदान इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है। कई ऐसे नेता जो कुछ महीने पहले लोकसभा चुनाव में जीत से कुछ कदम दूर रह गए थे, अब विधानसभा चुनाव में उतरकर 'रीमैच' की तैयारी कर रहे हैं। राजनीति में इसे 'सेकंड इनिंग' कहा जा सकता है जहां दांव भी बड़ा है और इरादा भी साफ कि हार को जीत में बदलकर दम दिखाना है।
लोकसभा चुनाव 2024 में करीब दो दर्जन ऐसे उम्मीदवार थे जो बेहद करीबी मुकाबले में हार गए थे। अब इनमें से 23 नेता या उनके परिजन बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रण में हैं। इनमें से 18 नेता खुद मैदान में उतरे हैं, जबकि पांच ने अपने परिवार के सदस्यों को टिकट दिलाया है।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि हारने वालों में सबसे ज्यादा उम्मीदवार राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के हैं। 12 राजद, 4 जदयू, 2 भाजपा, और कांग्रेस, भाकपा माले, भाकपा, माकपा व वीआईपी के एक-एक प्रत्याशी इस बार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं।
🔹 राजद ने खोले अपने 'रनर-अप' के लिए दरवाज़े
राजद ने अपने लोकसभा चुनाव में रनर-अप रहे 12 नेताओं या उनके परिजनों को विधानसभा का टिकट दिया है।
- दीपक यादव, जो वाल्मीकिनगर से 98,000 वोट से हारे थे, अब नरकटियागंज से मैदान में हैं।
- चंद्रहास चौपाल, जिन्होंने सुपौल से 1.70 लाख वोटों से हार झेली, अब सिंहेश्वर (सुरक्षित) सीट से उतरे हैं।
- उजियारपुर लोकसभा में हारे आलोक मेहता, अब उजियारपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं।
- कुमारी अनिता, जो मुंगेर से हारी थीं, अब वारिसलीगंज से मैदान में हैं।
- शाहनवाज आलम, अररिया में हार के बाद अब जोकीहाट से प्रत्याशी हैं।
- इसी तरह जयप्रकाश नारायण यादव (बांका) को झाझा, ललित कुमार यादव (दरभंगा) को दरभंगा ग्रामीण, और कुमार सर्वजीत (गया) को बोधगया (सु) से टिकट मिला है।
परिजनों में भी दिलचस्प नाम हैं-अली अशरफ फातमी के बेटे फराज फातमी (केवटी), मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला (लालगंज) और हेन शहाब के बेटे ओसामा शहाब (रघुनाथपुर) चुनावी मैदान में हैं।
🔹 जदयू और भाजपा भी पीछे नहीं
जदयू और भाजपा ने भी अपने लोकसभा हारने वाले उम्मीदवारों को विधानसभा में मौका दिया है।
- जदयू के चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, जो जहानाबाद से हारे थे, अब विधानसभा टिकट पर मैदान में हैं। दुलालचंद गोस्वामी, जो कटिहार से हारे, अब कदवा से चुनाव लड़ रहे हैं।
- दिलचस्प बात यह है कि जदयू के दो लोकसभा उम्मीदवार अब राजद में हैं, मुजाहिद आलम (कोचाधामन) और संतोष कुशवाहा (धमदाहा) राजद टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की ओर से रामकृपाल यादव (दानापुर) और मिथिलेश तिवारी (बैकुंठपुर) को टिकट मिला है।
🔹 कांग्रेस और वामदल भी मैदान में सक्रिय
कांग्रेस, वामपंथी दलों और वीआईपी ने भी वही रणनीति अपनाई है-लोकसभा हारने वालों को विधानसभा से उतारने की।
- कांग्रेस के अजीत शर्मा (भागलपुर),
- भाकपा माले के संदीप सौरव (पालीगंज),
- भाकपा के अवधेश कुमार राय (बछवाड़ा) और
- माकपा के अजय कुमार (विभूतिपुर) चुनावी अखाड़े में हैं।
इसके अलावा, वीआईपी के अजय निषाद की पत्नी रमा निषाद औराई से भाजपा टिकट पर लड़ रही हैं।
🔹 सांसदों के बेटे-बेटियां भी कर रहे एंट्री
केवल हारे हुए उम्मीदवार ही नहीं, दो सिटिंग सांसदों के बेटे और बेटी भी इस बार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं। शिवहर की जदयू सांसद लवली आनंद के बेटे चेतन आनंद नवीनगर से भाजपा टिकट पर मैदान में हैं। वहीं वैशाली की सांसद वीणा देवी (लोजपा-रा) की बेटी कोमल सिंह जदयू से गायघाट सीट से चुनाव लड़ रही हैं।
🔹 नतीजा चाहे जो हो, 'पॉलिटिकल सेकंड इनिंग' दमदार
बिहार चुनाव 2025 में ये उम्मीदवार सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की परीक्षा भी लड़ रहे हैं। लोकसभा की हार के बाद विधानसभा का यह चुनाव कई नेताओं के लिए 'कमबैक स्टेज' बन गया है। अब देखना होगा कि ये 'हार से सीख' लेकर जीत की कहानी लिख पाते हैं या नहीं।












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