Bihar Election 2025: चुनावी मैदान में ‘सुपर कॉप’ Ex IPS शिवदीप लांडे, इन दो सीटों से लड़ेंगे निर्दलीय चुनाव
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी और बिहार के जाने-माने 'सुपर कॉप' शिवदीप लांडे (Shivdeep Lande) ने बुधवार, 8 अक्टूबर को औपचारिक रूप से अपने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव आकर कहा कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरेंगे और दो विधानसभा क्षेत्रों अररिया और जमालपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

दो जगहों से चुनावी मैदान में उतरेंगे लांडे
शिवदीप लांडे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय होने के संकेत दे रहे थे, लेकिन अब उन्होंने खुलकर चुनावी रण में उतरने की घोषणा कर दी है। उन्होंने कहा कि वे जनता की सेवा और "सिस्टम को भीतर से सुधारने" के उद्देश्य से राजनीति में आए हैं। उनके अनुसार, "अब वक्त है कि ईमानदार और राष्ट्रवादी सोच के लोग राजनीति में आएं ताकि व्यवस्था में बदलाव लाया जा सके।"
बता दें कि शिवदीप लांडे ने इसी साल अप्रैल में अपनी राजनीतिक पार्टी हिंद सेना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यह दल मानवता, सामाजिक न्याय और सेवा जैसे मूल्यों पर आधारित होगा।
क्यों चुनीं जमालपुर और अररिया सीटें
शिवदीप लांडे का बिहार के कई इलाकों में खासा जनाधार है। बतौर आईपीएस अधिकारी रहते हुए उन्होंने सख्त और निष्पक्ष छवि बनाई थी। खासकर मुंगेर, पटना और अररिया जैसे जिलों में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। सोशल मीडिया पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, जो उन्हें "सिंघम ऑफ बिहार" के नाम से पुकारते हैं।
जमालपुर सीट लांडे के प्रशासनिक कार्यकाल का अहम क्षेत्र रहा है, जहां वे बतौर अधिकारी लोगों के बीच अपनी छवि मजबूत कर चुके हैं। वहीं अररिया उनका पैतृक जिला है, जहां वे सामाजिक कार्यों के जरिए लंबे समय से सक्रिय हैं। दोनों ही सीटें जातीय और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण मानी जाती हैं, लेकिन लांडे को भरोसा है कि जनता "ईमानदारी और सेवा" को वोट देगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
लांडे के मैदान में उतरने से बिहार की राजनीति में नई हलचल मच गई है। विशेषकर सीमांचल और मगध क्षेत्र में यह कदम कई दलों के समीकरण बदल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि लांडे अगर अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो 2025 का चुनाव नए चेहरे और नई राजनीति की दिशा तय कर सकता है।












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