Bihar Election: CPM ने आखिरी वक्त पर बिगाड़ा महागठबंधन का खेल, इन दो सीटों से उम्मीदवारों को दी हरी झंड
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों में महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर खींचतान बढ़ते ही जा रही है। सीट बंटवारे में देरी को लेकर सहयोगी दलों का धैर्य जवाब देने लगा है। इसी कड़ी में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अपने स्तर पर दो मौजूदा विधायकों को नामांकन की हरी झंडी दे दी है।
शुक्रवार, 10 अक्टूबर को माकपा के राज्य सचिव मंडल सदस्य मनोज चंद्रवंशी ने बताया कि विभूतिपुर से वर्तमान विधायक अजय कुमार और मांझी सीट से विधायक सत्येंद्र यादव को पार्टी ने इंडिया गठबंधन उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने का निर्देश दे दिया है।

उन्होंने कहा कि बाकी नौ विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों का नाम अगले एक-दो दिनों में तय कर लिया जाएगा।माकपा की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है, जब महागठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान चरम पर है। पार्टी की राज्य कमेटी की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव एम ए बेबी ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे घर-घर जाकर महागठबंधन को वोट देने और चुनावी कोष जुटाने में जुट जाएं।
माले ने ठुकराया आरजेडी का ऑफर, मांगी 30 सीटें
महागठबंधन की दूसरी सहयोगी पार्टी सीपीआई (माले) ने आरजेडी द्वारा प्रस्तावित 19 सीटों को स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया है। माले ने नई सूची भेजते हुए 30 सीटों की मांग की है और कहा कि यह मांग बिना किसी समझौते के मानी जानी चाहिए।
पार्टी का कहना है कि वह दरभंगा, मधुबनी, गया, नालंदा और चंपारण जैसे इलाकों में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहती है। पिछली बार माले ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 में जीत दर्ज की थी। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने 3 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिसमें से 2 पर जीत हासिल हुई थी।
वीआईपी की मांग ने बढ़ाई मुश्किल
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो महागठबंधन की एक और सहयोगी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने भी आरजेडी से कम से कम 30 सीटों की मांग की है। वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी का कहना है कि उनकी पार्टी का जनाधार कई जिलों में फैला हुआ है और उन्हें सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
सहनी की यह सख्त स्थिति तेजस्वी यादव के लिए सीटों का समीकरण और मुश्किल बना रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वीआईपी "अन्य विकल्पों" पर विचार कर सकती है।
महागठबंधन का गणित अब कहां फंसा?
महागठबंधन में माले, वीआईपी और माकपा की सख्त मांगों ने आरजेडी और कांग्रेस के लिए सीट बंटवारे का गणित उलझा दिया है। माकपा की तेज चाल, माले की बढ़ती मांग और वीआईपी की सख्ती ने साफ कर दिया है कि महागठबंधन में सीटों पर सहमति बनाना अब आसान नहीं रहेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर सहयोगी दलों की मांगों पर जल्दी समझौता नहीं हुआ, तो महागठबंधन को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। गठबंधन की सीट शेयरिंग प्रक्रिया की देरी और सहयोगी दलों की बढ़ती मांगें इस बार राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बना रही हैं।












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