Bihar Election 2025: क्या प्रशांत किशोर पर बड़ा दांव खेलने जा रही है भाजपा? क्या है अंदर की कहानी
Bihar Election 2025: (Prashant Kishor) बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक माहौल दिन-ब-दिन गरमाता जा रहा है। भाजपा और एनडीए जहां सत्ता बचाने की कवायद में लगे हैं, वहीं जनसुराज अभियान के जरिए प्रशांत किशोर (PK) धीरे-धीरे मैदान में जगह बना रहे हैं। अब चर्चाओं का बाजार गर्म है कि भाजपा प्रशांत किशोर को लेकर कोई बड़ा खुलासा करने वाली है। सवाल ये है कि ऐसा क्यों और कब हो सकता है? आइए समझते हैं अंदर की पूरी कहानी।
अमित शाह का दौरा और बंद कमरे की मीटिंग
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बीते दस दिनों में दूसरी बार बिहार पहुंचे। सूत्र बताते हैं कि उनके इस दौरे का मकसद सिर्फ संगठन को दुरुस्त करना नहीं था, बल्कि प्रशांत किशोर के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाना भी था। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने NDA नेताओं से सख्त लहजे में कहा कि "PK का वोट शेयर आखिर कैसे बढ़ रहा है?"

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी द्वारा कराए गए एक सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए-प्रशांत किशोर को बिहार में करीब 14% वोट शेयर मिलता दिख रहा है। यह आंकड़ा भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। माना जा रहा है कि इसी कारण शाह ने नाराजगी जताई और नेताओं को आगाह किया।
🔵 क्या भाजपा करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस?
बिहार की सियासी गलियारों में जोरदार चर्चा है कि भाजपा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकती है। इसमें प्रशांत किशोर के कामकाज, उनके बयानों या फिर उनकी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर बड़ा खुलासा हो सकता है। हालांकि पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर खूब बहस छिड़ी हुई है। ऐसा भी हो सकता है कि ये सिर्फ एक बहस हो और चर्चा मात्र ही हो।
🔵 भाजपा क्यों कर सकती है प्रशांत किशोर पर खुलासा? संभावित 5 वजहें
🔹 वोट शेयर में इजाफा - सर्वे रिपोर्ट में पीके को 14% वोट शेयर मिलता दिख रहा है। भाजपा चाहेगी कि इस ग्रोथ को शुरुआती स्तर पर ही रोक दिया जाए।
🔹 युवाओं और नए वोटरों में पकड़ - प्रशांत किशोर का फोकस बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर है, जो सीधे युवा और नए वोटरों को आकर्षित करते हैं। भाजपा इसे कमजोर करना चाहती है।
🔹 एनडीए वोट बैंक में सेंध का डर - बिहार में जातीय समीकरण अहम हैं। पीके का कैंपेन विभिन्न वर्गों में धीरे-धीरे पैठ बना रहा है, जिससे एनडीए को नुकसान हो सकता है।
🔹 पीके का राजनीतिक बैकग्राउंड - प्रशांत किशोर ने पहले कई पार्टियों के साथ चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम किया है। भाजपा उनके पुराने कामकाज या डील्स पर सवाल उठाकर उनकी साख को चोट पहुंचा सकती है।
🔹 मीडिया और नैरेटिव पर कब्जा - प्रशांत किशोर लगातार मीडिया में बने हुए हैं। भाजपा चाहेगी कि प्रेस कॉन्फ्रेंस या खुलासों के जरिए फोकस बदल दिया जाए और नैरेटिव अपने हाथ में लिया जाए।
🔵 क्या होगा असर?
अगर भाजपा प्रशांत किशोर पर कोई बड़ा खुलासा करती है तो निश्चित तौर पर बिहार की राजनीति और चुनावी माहौल में हलचल मचेगी। फिलहाल यह महज चर्चाएं हैं, लेकिन राजनीति में अफवाहें भी कभी-कभी सच साबित हो जाती हैं।
🔵 आरके सिंह के बयान से पार्टी में हलचल
बीजेपी के पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह ने भी पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से अलग पार्टी बनाने तक की बात कह दी। यही नहीं, वे आरोप लगा रहे हैं कि उनकी ही पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें पिछला चुनाव हरवाया।
इस नाराजगी का असर सीधा-सीधा राजपूत वोट बैंक पर पड़ सकता है। बिहार में लगभग 3.5% राजपूत आबादी है और करीब 30-35 सीटों पर उनकी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में भाजपा के लिए ये रिस्क भरा हो सकता है। इसी वजह से दिल्ली में पार्टी नेतृत्व ने तुरंत आरके सिंह से बातचीत की और उन्हें शांत करने की कोशिश की।
बिहार चुनाव 2025 अब सिर्फ एनडीए और महागठबंधन की जंग नहीं रह गया है। प्रशांत किशोर एक तीसरे विकल्प के तौर पर उभर रहे हैं, और यही भाजपा के लिए चिंता की बात है। अमित शाह का दोहरा बिहार दौरा, आरके सिंह की बगावत जैसी चर्चाएं और भाजपा के संभावित खुलासे-ये सब दिखाता है कि चुनावी पिच और भी दिलचस्प होने वाली है।












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