Bihar Chunav: वोट अधिकार यात्रा खत्म होते ही Rahul Gandhi की विदेश यात्रा से बढ़ी महागठबंधन की मुश्किल?
Bihar Chunav 2025: बिहार में अब विधानसभा चुनाव में गिनती के दिन बचे हैं और इस बीच सीट शेयरिंग से लेकर प्रचार रणनीति को लेकर अहम बैठकों का दौर जारी है। महागठबंधन में सीट बंटवारा लगभग तय हो गया है और वोट अधिकार यात्रा की वजह से कांग्रेस और आरजेडी कार्यकर्ताओं के बीच एक अच्छा तालमेल नजर आ रहा है। हालांकि, इस यात्रा के समापन के बाद से प्रदेश में कांग्रेस और आरजेडी कार्यकर्ताओं की जमीन पर सक्रियता उतनी नजर नहीं आ रही है।
हाल ही में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) के विरोध में निकाली गई वोट अधिकार यात्रा समाप्त हुई है। यात्रा के दौरान विपक्षी दलों में उत्साह की लहर दिखी थी। गठबंधन के शीर्ष नेताओं के साथ ही कार्यकर्ताओं के बीच भी उत्साह नजर आ रहा था। हालांकि, यात्रा खत्म होने के बाद अब जमीन पर सक्रियता कम होती जा रही है। ऐसे समय में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विदेश यात्रा ने महागठबंधन के लिए भी असहज स्थिति बना दी है।

Rahul Gandhi की विदेश यात्रा ने बढ़ाई विपक्षी दलों की मुश्किल
वोट अधिकार यात्रा से विपक्ष की एकजुटता का संदेश मिला था और एनडीए का मुकाबला करने के लिए महागठबंधन मजबूत हालत में नजर आ रहा था। हालांकि, वोट अधिकार यात्रा खत्म होते हुए राहुल गांधी की एक तस्वीर इस्लामिक देश मलेशिया से सामने आई है। बीजेपी उनके बिहार में यात्रा के बाद विदेश दौरे पर सवाल उठा रही है। महागठबंधन के सहयोगी दल जैसे आरजेडी और लेफ्ट पार्टियां सीट शेयरिंग और नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा कर रही हैं। ऐसे समय में राहुल के मलेशिया दौरे पर बीजेपी हमलावर है। महागठबंधन के बाकी सदस्य दलों के लिए भी यह असहज करने वाली स्थिति है।
यह भी पढ़ें: Pawan Khera के पास दो वोटर आईडी मिलने पर बीजेपी का हल्ला बोल, 'वोट चोर खुद Rahul Gandhi के घर में हैं'
बिहार चुनाव से पहले राहुल विदेश में छुट्टी मनाने गए?
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी इन दिनों निजी कार्यक्रम पर विदेश गए हैं। यह समय विपक्ष के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। बीजेपी और एनडीए लगातार अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं, महागठबंधन के भीतर तालमेल और सीट बंटवारे पर अब तक कोई ठोस तस्वीर साफ नहीं हो पाई है।
Bihar Chunav में महागठबंधन के लिए आगे है कड़ी चुनौतियां
महागठबंधन को वोट अधिकार यात्रा से एक रास्ता और मोमेंटम मिला है, लेकिन इससे आगे का सफर काफी मुश्किल है। इस बार एनडीए के साथ ही परिवार और पार्टी से निकाले जाने के बाद से तेज प्रताप यादव भी अकेले ही अपनी पार्टी बनाकर मैदान में हैं। असदुद्दीन ओवैसी भी सीमांचल में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।
आम आदमी पार्टी और बीएसपी के अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान ने महागठबंधन की टेंशन बढ़ा दी है। इससे एनडीए को नुकसान की आशंका है, लेकिन ओवैसी, तेज प्रताप और आम आदमी पार्टी आरजेडी और कांग्रेस उम्मीदवारों के वोट काट सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में सटीक रणनीति और आक्रामक चुनाव प्रचार के साथ लगातार जमीन पर सक्रियता और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है।
यह भी पढ़ें: Rahul Gandhi चले विदेश, इस देश में मना रहे हैं छुट्टियां, BJP बोली- 'बिहार की धूल झेली नहीं गई'












Click it and Unblock the Notifications