Bihar Chunav: महागठबंधन के इस दल में 100% उम्मीदवार दागी, ADR रिपोर्ट ने खोली तेजस्वी की पोल
Bihar Election ADR Report: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) (Association for Democratic Reforms) और बिहार इलेक्शन वॉच की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट ने चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों के आपराधिक और वित्तीय रिकॉर्ड का खुलासा किया है, जो बेहद चिंताजनक है।
1,314 उम्मीदवारों में से 27% पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। सभी राजनीतिक दलों में दागी प्रत्याशियों की संख्या चिंता का विषय है, खासकर CPM के सभी 100% उम्मीदवारों पर गंभीर आरोप हैं, जो बिहार की राजनीति के अपराधीकरण की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।

27% प्रत्याशियों पर गंभीर आपराधिक आरोप
ADR रिपोर्ट के अनुसार, बिहार चुनाव के पहले चरण में 1,314 उम्मीदवारों में से 1,303 उम्मीदवारों के शपथपत्रों का विश्लेषण किया गया। इसमें सामने आया कि 423 (32%) उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की है, जबकि 354 (27%) उम्मीदवारों पर तो गंभीर आपराधिक आरोप हैं। इन गंभीर आरोपों में 33 उम्मीदवारों पर हत्या, 86 पर हत्या का प्रयास और 42 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि दो उम्मीदवारों ने बलात्कार के मामलों का भी उल्लेख किया है। यह डेटा बिहार की राजनीति में अपराध के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
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इस दल के 100 फीसदी उम्मीदवार दागी
पार्टी-वार विश्लेषण और भी भयावह तस्वीर प्रस्तुत करता है। रिपोर्ट के अनुसार, CPM के सभी (100 %) उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं। इसके बाद CPI (80 %), CPI (ML) (64%), RJD (60%), और BJP (56%) जैसे प्रमुख दल आते हैं। कांग्रेस भी पीछे नहीं है, उसके 52%उम्मीदवारों पर गंभीर धाराओं के तहत आरोप हैं। जन सुराज के 43% और AAP के 20% उम्मीदवारों पर भी गंभीर मामले हैं। कुल मिलाकर, BJP और कांग्रेस के 65% उम्मीदवारों ने किसी न किसी प्रकार के आपराधिक रिकॉर्ड की घोषणा की है, जो बिहार की चुनावी राजनीति में आपराधिक तत्वों की गहरी पैठ को उजागर करता है।
बिहार की राजनीति में अपराधीकरण का विस्तार
यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि बिहार की राजनीति में अपराधीकरण एक गंभीर और व्यापक समस्या बनी हुई है। छोटे से बड़े सभी दलों में ऐसे प्रत्याशियों की संख्या चिंताजनक है जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। यह स्थिति न केवल चुनावी प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल उठाती है, बल्कि मतदाताओं के सामने भी एक मुश्किल चुनौती पेश करती है। ऐसे उम्मीदवारों का चुनाव में उतरना और जीतना, लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन के लिए हानिकारक हो सकता है। ADR जैसी संस्थाओं द्वारा ऐसे खुलासे मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करते हैं।
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