Bihar Chunav Kissa CM Ka: बिहार के इस सीएम ने जज के सामने लगाई थी किन्नर से पीछा छुड़ाने की गुहार!
Bihar Chunav Kissa CM Ka: बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला रोज-ब-रोज दिलचस्प होता जा रहा है। सजायाफ्ता होने की वजह से लालू यादव सीधे तौर पर चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते हैं। अभी भी वह आरजेडी की कमान मजबूती से संभाले हुए हैं। 90 के बाद से बिहार की राजनीति लालू यादव के बिना अधूरी है। अपने सबसे कठिन दौर में भी वह प्रदेश की राजनीति में प्रासंगिक बने रहे। आरजेडी सुप्रीमो अपनी हाजिरजवाबी और देसी अंदाज की वजह से काफी लोकप्रिय रहे। उनसे जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा है जब उन्होंने जज के सामने एक किन्नर से पीछा छुड़ाने की गुहार लगाई थी।
दरअसल यह मामला साल 2018 का है। बिहार के पूर्व सीएम को सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाला मामले में सजा सुनाई थी। कोर्ट की सुनवाई के दौरान लालू ने अपने लिए रियायत की मांग करते हुए जज से कहा था कि जेल में बंद एक किन्नर उन्हें परेशान कर रही है। बार-बार शादी के लिए कहती है। उनकी यह बात सुनकर जज समेत पूरा कोर्ट रूम ठहाकों से गूंज गया था।

Bihar Chunav Kissa CM Ka: लालू ने कोर्ट में लगाई थी गुहार
सुनवाई के दौरान लालू यादव और सीबीआई विशेष अदालत के जज जज शिवपाल सिंह के बीच कई मजेदार बातचीत हुई थी। कोर्ट में लालू अपने लिए रियायत मांगते हुए मजेदार तर्क देते थे। इसी दौरान उन्होंने कहा था, 'सर, जेल में एक किन्नर भी बंद है। लगता है गलती से आ गई है कि क्या है। हमसे शादी करने के लिए कह रही है।' लालू का इतना कहना था कि पूरा कोर्ट रूम ठहाकों से गूंज गया। इस मामले की सुनवाई के दौरान जज ने आरजेडी सुप्रीमो से कहा था कि आपके लिए बहुत फोन आ रहे हैं। इसके जवाब में लालू ने कहा था कि हुजूर कोई बदमाशी करने वाला होगा। हम किसी को कुछ नहीं कहे हैं।
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Lalu Yadav के परिवार के लिए यह चुनाव बेहद अहम
⦁ बिहार विधानसभा चुनाव 2025 उनके परिवार और पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए बेहद अहम है। इस चुनाव के नतीजे ही तेजस्वी यादव का भविष्य तय करेंगे।
⦁ आईआरसीटीसी घोटाले में चुनाव से ठीक पहले लालू-राबड़ी और तेजस्वी यादव पर आरोप तय हुए हैं। चुनाव प्रचार के दौरान यह मुद्दा भी विपक्षी दल उठा रहे हैं।
⦁ लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी अलग पार्टी बना ली है और खुलकर भाई तेजस्वी और कांग्रेस के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।
⦁ यह चुनाव लालू की राजनीतिक विरासत और पार्टी के लिए ही नहीं परिवार को एकजुट रखने के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है।
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