Bihar Chunav Kissa CM Ka: बिहार के वो सीएम जो अचानक पहुंच जाते थे सरकारी दफ्तर, जब्त कर ली थी कर्मचारी की भैंस
Bihar Chunav Kissa CM Ka: बिहार की राजनीति ने हमेशा देश की राजनीति को भी बदलने का काम किया है। जेपी का इमर्जेंसी के खिलाफ आंदोलन हो या फिर चंपारण से महात्मा गांधी का सत्याग्रह हो, बिहार से शुरू हुई क्रांति की लहर ने पूरे भारत को प्रभावित किया। आजादी के बाद भी बिहार की राजनीति की चर्चा पूरे देश में होती रही। प्रदेश ने कई सीएम भी देखे और इनमें से लालू यादव पटना से लेकर दिल्ली तक अपनी देशज शैली और भाषण कला की वजह से हमेशा चर्चा में रहे।
लालू यादव चाहे सीएम रहे, रेल मंत्री रहे हों या सिर्फ एक सांसद भर क्यों न, उनकी विनोदी शैली और हाजिरजवाबी के कई किस्से मशहूर हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए भी अक्सर वह अपने स्वभाव और बयानबाजी की वजह से चर्चा में रहते थे। उनसे जुड़े ऐसे कई दिलचस्प किस्से हैं। आज जानते हैं ऐसा ही एक किस्सा जब अधिकारी की भैंस जब्त कर ली थी।

Bihar Chunav Kissa CM Ka: लालू ने जब्त की भैंस
लालू यादव से जुड़ी लोकप्रिय किस्सों में से एक है कि उन्होंने एक सरकारी कर्मचारी की भैंस ही जब्त कर ली थी। यह घटना उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई थी। यह घटना आज भी लोगों के बीच उनके देसी ह्यूमर और जनता से जुड़ी शैली की मिसाल के तौर पर सुनाई जाती है। किस्सा कुछ यूं है कि एक दिन लालू प्रसाद यादव अचानक पटना के एक सरकारी दफ्तर का निरीक्षण करने पहुंच गए थे। जैसा 90 के दौर में सरकारी दफ्तरों का हाल होता है, वैसा ही नजारा वहां भी था।
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Lalu Yadav ने कर्मचारियों की लगाई थी क्लास
लालू ने देखा कि कुछ कर्मचारी आराम से बैठे चाय पी रहे हैं, फाइलें इधर-उधर बिखरी हैं और जनता अपने काम के लिए परेशान है। काम कराने आए लोगों को एक डेस्क से दूसरे डेस्क टरकाया जा रहा है। उन्होंने देखा कि एक सरकारी कर्मचारी काफी देर से आया है। इस पर उन्होंने पूछा कि लेट से क्यों आए हो? जवाब में कर्मचारी ने कहा कि भैंस बीमार हो गई थी, उसे दवाई दिलाने ले गए थे। इस पर लालू ने हंसते हुए कहा कि इसकी भैंस जब्त कर लो, सरकारी टाइम में बीमार होती है।
Bihar Chunav में लालू यादव के लिए इस बार बड़़ी चुनौती
बिहार विधानसभा चुनाव की बात करें, तो इस वक्त लालू यादव परिवार के सामेन कई चुनौतियां हैं। महागठबंधन में अब तक सीट बंटवारा नहीं हुआ है और दूसरी ओर उनका परिवार भ्रष्टाचार के मामले में फंसता दिख रहा है। आईआरसीटीसी घोटाले में लालू और राबड़ी के साथ तेजस्वी पर भी आरोप तय किए गए हैं। लालू खुद सजायाफ्ता होने की वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी परिवार से अलग अपनी पार्टी बनाकर मैदान में हैं। कुल मिलाकर यह चुनाव लालू और उनके बेटे तेजस्वी के लिए बहुत मुश्किल रहने वाला है।
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