Bihar Chunav: मांझी ने 11 नेताओं को पार्टी से क्यों किया निष्कासित? राष्ट्रीय सचिव से जिला अध्यक्ष तक का नाम
Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने एक झटके में अपने 11 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस फैसले ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि ये भी साफ कर दिया है कि मांझी अब पार्टी में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
राष्ट्रीय सचिव से लेकर जिलाध्यक्ष तक पर गिरी गाज
HAM के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव राजेश कुमार पांडेय ने शुक्रवार (24 अक्टूबर) की शाम एक पत्र जारी कर यह जानकारी दी। निष्कासित नेताओं में बिहार प्रदेश संगठन प्रभारी राजेश रंजन, राष्ट्रीय सचिव रितेश कुमार उर्फ चुन्नू शर्मा, राष्ट्रीय सचिव श्रवण भूईयां, प्रवक्ता नंदलाल मांझी, प्रदेश महासचिव चंदन ठाकुर, प्रदेश प्रवक्ता शैलेन्द्र मिश्रा, सहकारिता प्रकोष्ठ अध्यक्ष शिवकुमार राम, पूर्णिया जिलाध्यक्ष राजेंद्र यादव, मुजफ्फरपुर कार्यकारी जिलाध्यक्ष बैजु यादव, मंजू सरदार और बीके सिंह शामिल हैं।

इन सभी नेताओं को पार्टी नीतियों के खिलाफ काम करने और अनुशासन भंग करने का दोषी पाया गया है। जिसके बाद उन्हें सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।
अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस नीति
पार्टी महासचिव के मुताबिक, ''इन नेताओं के खिलाफ मिली शिकायतों की समीक्षा के बाद पाया गया कि वे संगठन की लाइन से हटकर काम कर रहे थे। कई बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद जब स्थिति नहीं सुधरी, तब यह कार्रवाई की गई। मांझी के इस कदम को चुनाव से पहले पार्टी में सख्ती लाने और संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है कि "जो पार्टी लाइन से हटेगा, वह बाहर जाएगा।''
HAM में सख्ती के साथ रणनीति भी
यह फैसला ऐसे समय आया है जब HAM एनडीए के साथ चुनाव मैदान में है। सीट बंटवारे को लेकर मांझी ने पहले नाराजगी जाहिर की थी, लेकिन बाद में उन्हें मनाया गया। पार्टी को कुल छह सीटें मिली हैं, जिससे मांझी असंतुष्ट थे। अब उन्होंने संगठन के भीतर एकजुटता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्ती दिखाई है।
स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी जारी
HAM ने इसी के साथ अपने स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी की है। पार्टी के 20 स्टार प्रचारकों में जीतन राम मांझी और राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन के नाम सबसे ऊपर हैं। मांझी अब न केवल एनडीए के साथ गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, बल्कि अपनी पार्टी के भीतर भी नियंत्रण कायम रखने की कोशिश में हैं।
राजनीतिक संदेश साफ -अब अनुशासन ही पहचान
चुनाव से ठीक पहले की गई यह कार्रवाई HAM के लिए दोहरी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, एक तरफ संगठन को दुरुस्त करना और दूसरी तरफ यह दिखाना कि मांझी की पार्टी किसी भी आंतरिक असंतोष से ऊपर है। इससे यह भी संकेत गया है कि HAM अब "कड़े अनुशासन और एकजुट मोर्चे" के साथ चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है।
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