Bihar Chunav: क्या सच में तेजस्वी यादव होंगे CM कैंडिडेट? कांग्रेस ने गेंद डाली जनता के पाले में, बढ़ा सस्पेंस
Bihar Chunav 2025 (Tejashwi Yadav CM face): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही महागठबंधन (INDIA bloc) में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर असमंजस साफ झलकने लगा है। आरजेडी जहां पूरे दमखम से तेजस्वी यादव को अपना सीएम कैंडिडेट घोषित कर चुकी है, वहीं कांग्रेस पार्टी अभी तक इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन देने से बच रही है।
दरअसल, दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू से जब यह सीधा सवाल पूछा गया कि क्या तेजस्वी यादव ही महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार होंगे? तो उन्होंने पहले तो बात टाल दी। फिर मुस्कुराते हुए इतना भर कहा - "बिहार का सीएम बिहार की जनता तय करेगी।" उनका यह बयान कांग्रेस की रणनीति और संकोच दोनों को साफ कर गया और सस्पेंस को बढ़ा गया।

तेजस्वी यादव पर महागठबंधन की एक राय क्यों नहीं बन पा रही?
कांग्रेस के इस रुख ने तेजस्वी की दावेदारी पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्योंकि 2020 के चुनाव में भी महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को ही सीएम फेस बनाया था और उसी आधार पर आरजेडी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। लेकिन 2025 में कांग्रेस अभी भी आधिकारिक रूप से उनके नाम पर मुहर लगाने से कतरा रही है।
दिलचस्प यह है कि कांग्रेस के टॉप लीडर राहुल गांधी ने भी पूर्णिया में "वोटर अधिकार यात्रा" के दौरान यही सवाल टाल दिया था। यानी साफ है कि कांग्रेस सीधे तौर पर तेजस्वी को मुख्यमंत्री कैंडिडेट घोषित करने की बजाय फिलहाल जनता के फैसले की दुहाई देकर खुद को राजनीतिक लचीलापन देना चाह रही है।
RJD का रुख बेहद साफ- तेजस्वी ही होंगे CM चेहरा!
उधर, आरजेडी का रुख बेहद साफ है - लालू प्रसाद यादव हर मंच से तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की मुहिम चला चुके हैं। तेजस्वी खुद भी दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं और इस बार उनके लिए यह चुनाव करो या मरो जैसा है। लालू यादव की सक्रिय मौजूदगी उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन कांग्रेस का यह संकोच आगे चलकर महागठबंधन की रणनीति पर भारी पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस की यह हिचक सीट बंटवारे की राजनीति से जुड़ी है। पार्टी चाहती है कि सीएम कैंडिडेट के ऐलान से पहले उसे गठबंधन में सम्मानजनक सीटें मिलें। इसी वजह से उसने तेजस्वी की दावेदारी पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
बिहार में 70 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस!
10 सितंबर को दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में बिहार चुनाव को लेकर बड़ी बैठक हुई। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में सीट शेयरिंग पर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस बिहार में 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
बैठक के बाद कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने साफ किया कि गठबंधन में नए दलों के जुड़ने की स्थिति में सभी को समझौता करना होगा। उनका कहना था कि "हर राज्य में अच्छी और कमजोर दोनों तरह की सीटें होती हैं। ऐसे में सीट बंटवारे में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है। सीट शेयरिंग का ऐलान समय पर कर लिया जाएगा।"
अल्लावरू ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का कोई अलग घोषणापत्र नहीं होगा। महागठबंधन का साझा मेनिफेस्टो जारी किया जाएगा और उसी को लेकर "हर घर अधिकार यात्रा" निकाली जाएगी। साथ ही उन्होंने यह दोहराया कि मुख्यमंत्री पद का चेहरा गठबंधन नहीं बल्कि जनता तय करेगी।
नतीजा यह है कि महागठबंधन में अभी भी सबसे बड़ा सवाल अधूरा है -क्या तेजस्वी यादव ही विपक्ष का चेहरा होंगे या फिर कांग्रेस आखिरी समय में कोई और दांव खेलेगी? यही पेच अब बिहार की राजनीति को और दिलचस्प बना रहा है।












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