Bihar Chunav 2025: जाति-धर्म और वादों का सियासी खेल! किन बातों के लिए याद किया जाएगा इस बार का चुनाव?
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में आज एक अहम मोड़ आ गया है। दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग के साथ बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों में जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अब चारों तरफ बस एक ही सवाल गूंज रहा है-किसके सिर ताज बंधेगा और बिहार की नई सरकार राज्य को किस दिशा में ले जाएगी। इस चुनाव में सिर्फ सत्ता का खेल ही नहीं दिखा, बल्कि जनता ने यह भी साफ कर दिया कि वे सिर्फ वादों से नहीं, बल्कि विकास और भरोसे से प्रभावित होती है।
नीतीश कुमार की शायद यह अंतिम पारी हो सकती है। जबकि तेजस्वी यादव के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला साबित होगा। चुनावी मैदान में वादों, जाति-धर्म की राजनीति और उम्मीदवारों पर हमलों ने इसे और भी दिलचस्प बना दिया। अब 14 नवंबर को वोटों की गिनती तय करेगी कि बिहार की राजनीति में नया अध्याय कौन लिखेगा।

चुनावी घोषणाओं का बड़ा खेल
इस बार चुनाव में उम्मीदवारों ने जनता को लुभाने के लिए कई बड़े वादे किए। तेजस्वी यादव ने महिलाओं के खातों में 30 हजार रुपये देने का वादा किया और एलपीजी सिलिंडर भी देने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने बिहार के 2.75 लाख परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का दावा भी किया। इन बड़े वादों ने चुनाव को चर्चा का विषय बना दिया।
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जाति और धर्म का असर
बिहार में हमेशा से जाति और धर्म के आधार पर वोटिंग होती रही है। इस बार भी सभी पार्टियों ने इसका पूरा पालन किया। आरजेडी ने मुस्लिम-यादव समीकरण पर जोर दिया और कुशवाहा समाज को भी जोड़ा। कांग्रेस ने अपने हिस्से की 61 सीटों में सवर्ण उम्मीदवारों को ज्यादा मौका दिया। वाम दलों ने भी अपने टिकट जाति के आधार पर बांटे।
महागठबंधन में सीटों का खेल
महागठबंधन में सीट बंटवारे के कारण उम्मीदवारों के बीच कलह देखने को मिली। कुछ सीटों पर "फ्रेंडली फाइट" भी हुई, जहां एक ही गठबंधन के उम्मीदवार आमने-सामने थे। बछवाड़ा और कहलगांव जैसी सीटों पर प्रचार के दौरान नेताओं के बीच अलग-अलग रुख नजर आया।
उम्मीदवारों पर हमले
चुनाव के दौरान कई जगह उम्मीदवारों पर हमले भी हुए। तेज प्रताप यादव की सभा में हंगामा हुआ, जबकि HAM की ज्योति मांझी के काफिले पर पथराव हुआ और उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। टिकारी और अतरी विधानसभा क्षेत्रों में भी हमले की घटनाएं हुईं, जिसमें समर्थक घायल हुए।
JSP के उम्मीदवारों का भाजपा में शामिल होना
जन सुराज पार्टी (JSP) के चार उम्मीदवारों ने चुनाव से पहले पार्टी छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें से कुछ उम्मीदवारों ने नामांकन वापस लिया, तो कुछ ने भाजपा का समर्थन किया। JSP प्रमुख प्रशांत किशोर ने शुरू में आरोप लगाया था कि भाजपा के दबाव के कारण उनके उम्मीदवारों को हटाया गया।
यह चुनाव सिर्फ सरकार चुनने तक सीमित नहीं है। इस बार के चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि जनता वादों और घोषणाओं के साथ-साथ विकास और भरोसे को भी देखती है। सत्ता संभालने वालों के लिए यह जरूरी होगा कि वे जनता की उम्मीदों पर खरा उतरें।
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