'बिहार में NDA की सत्ता खत्म होनी चाहिए', ओवैसी की पार्टी महागठबंधन में होगी शामिल! कैसे पहुंचाएंगे नुकसान?
Bihar Chunav 2025 (Asaduddin Owaisi) : AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार 29 जून को बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने बिहार में विपक्षी महागठबंधन के नेताओं से संपर्क साधा है। उनका उद्देश्य साफ है-आगामी विधानसभा चुनावों में एनडीए को दोबारा सत्ता में आने से रोकना।
ओवैसी ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बताया, "हमारे प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने महागठबंधन के कुछ नेताओं से बात की है और साफ कर दिया है कि हम बिहार में बीजेपी और एनडीए को फिर से सत्ता में नहीं देखना चाहते। अब यह महागठबंधन के नेताओं पर निर्भर करता है कि वे इस दिशा में क्या फैसला लेते हैं। हम अपनी तरफ से गठबंधन करने को तैयार हैं।''

ओवैसी बोले- 'तैयार हूं अकेले लड़ने के लिए भी'
असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा कि अगर महागठबंधन साथ नहीं आता तो उनकी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "अगर वे तैयार नहीं हैं, तो मैं हर जगह से चुनाव लड़ने को तैयार हूं। सही वक्त आने दीजिए, अभी सीटों की संख्या बताना जल्दबाजी होगी।"
चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना
ओवैसी ने बिहार में मतदाता सूची के "स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन" अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखकर इसे कानूनी रूप से संदिग्ध करार दिया और आरोप लगाया कि यह बिहार में NRC को पिछवाड़े से लागू करने जैसा है।
उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा,"अब हर मतदाता को यह साबित करना होगा कि वह कहां और कब पैदा हुआ, साथ ही उसके माता-पिता कब और कहां पैदा हुए थे। जबकि भारत में तीन-चौथाई जन्मों का ही पंजीकरण होता है और सरकारी दस्तावेजों में भारी गलतियां होती हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से गरीबों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया जाएगा, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
सीमांचल में मजबूत पकड़, गठबंधन से NDA को होगा बड़ा झटका
AIMIM की बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने सीमांचल की कई सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया था और 5 विधायक जीतकर आए थे, हालांकि 2022 में इनमें से 4 विधायक RJD में शामिल हो गए थे।
अगर AIMIM महागठबंधन में शामिल होती है, तो सीमांचल की मुस्लिम बहुल सीटों पर विपक्ष का वोट एकजुट हो सकता है। अब तक AIMIM और RJD-कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोटों का बंटवारा होता रहा है, जिससे बीजेपी को फायदा मिलता रहा। लेकिन अगर ओवैसी की पार्टी महागठबंधन में आती है, तो NDA के लिए यह बड़ा नुकसान साबित हो सकता है क्योंकि सीमांचल की 25 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिम आबादी निर्णायक भूमिका निभाती है।
अगर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी महागठबंधन में शामिल होती है, तो सीमांचल क्षेत्र में वोटों का बंटवारा रुक सकता है और विपक्ष की सीटें बढ़ सकती हैं। इससे एनडीए खासतौर पर बीजेपी को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं अगर AIMIM को गठबंधन में जगह नहीं मिलती, तब भी ओवैसी का अकेले चुनाव लड़ना NDA के लिए खतरा बन सकता है, क्योंकि यह मुस्लिम वोटों को एक बार फिर विभाजित कर सकता है और समीकरण बिगाड़ सकता है। राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का यह संकेत बिहार की सियासत में आने वाले समय में बड़ा असर डाल सकता है।












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