Bihar Cabinet Caste: नीतीश कैबिनेट में कौन सा मंत्री किस जाति का? कितने सवर्ण, OBC, दलित, मुस्लिम — पूरी लिस्ट
Bihar Cabinet 2025 Caste Wise Ministers List: बिहार में NDA की नई सरकार का गठन हो गया है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जब नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए जातीय समीकरण का खाका भी सामने आ गया। भारी भीड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी ने इस शपथ ग्रहण समारोह को खास बना दिया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उसी चीज की हुई जो बिहार की राजनीति की धुरी है -जाति आधारित संतुलन।
नीतीश कुमार के साथ कुल 26 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। दिलचस्प बात यह रही कि भले ही मुख्यमंत्री नीतीश जेडीयू के हों, लेकिन कैबिनेट में बीजेपी का पलड़ा भारी दिखा। 27 सदस्यीय इस नए मंत्रिमंडल में बीजेपी के 15, जेडीयू के 8, एलजेपी (रामविलास) के 2, और HAM व RLM के 1-1 मंत्री शामिल किए गए हैं। अब जानते हैं - इस पूरे मंत्रिमंडल की जातीय संरचना कैसी है और किस समाज को कितनी हिस्सेदारी मिली है।

▶️ सवर्ण समाज को कितनी हिस्सेदारी? कौन किस जाति से बना मंत्री
एनडीए सरकार ने सवर्ण समुदाय को 8 मंत्री देकर साफ संकेत दिया है कि उसका मुख्य वोटबैंक अभी भी मजबूती से उसके साथ है। इन 8 मंत्रियों में भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और कायस्थ सभी को प्रतिनिधित्व मिला है।
🟡 बीजेपी के सवर्ण मंत्री
- विजय कुमार सिन्हा (भूमिहार) - उपमुख्यमंत्री
- मंगल पांडे (ब्राह्मण)
- संजय सिंह टाइगर (राजपूत)
- श्रेयसी सिंह (राजपूत)
- नितिन नबीन (कायस्थ) - दोबारा मंत्री
🟡 जेडीयू के सवर्ण मंत्री
- विजय कुमार चौधरी (भूमिहार)
- लेशी सिंह (राजपूत)
🟡 एलजेपी (R) के सवर्ण मंत्री
- संजय कुमार सिंह (राजपूत)
साफ दिखता है कि राजपूत और भूमिहार समुदाय को प्रमुख हिस्सेदारी दी गई है, जबकि ब्राह्मण और कायस्थ समुदाय को भी तवज्जो मिली है।
▶️ OBC-EBC-वैश्य समुदाय की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
बिहार की राजनीति में ओबीसी और ईबीसी हमेशा निर्णायक भूमिका में रहे हैं। यही वजह है कि इस कैबिनेट में इन वर्गों को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री सहित 13 मंत्री ओबीसी, ईबीसी और वैश्य समाज से हैं, यानी मंत्रिमंडल की सबसे बड़ी ताकत यही वर्ग है।
🟡 बीजेपी के OBC-EBC-वैश्य मंत्री (कुल 8)
- सम्राट चौधरी (कोइरी) - उपमुख्यमंत्री
- रामकृपाल यादव (यादव)
- सुरेंद्र मेहता (धानुक)
- डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी (कहार)
- नारायण प्रसाद (तेली)
- रमा निषाद (मल्लाह)
- डॉ. दिलीप जायसवाल (वैश्य)
- अरुण शंकर प्रसाद (वैश्य)
🟡 जेडीयू के OBC-EBC-अन्य मंत्री (कुल 4)
- नीतीश कुमार (कुर्मी) - मुख्यमंत्री
- श्रवण कुमार (कुर्मी)
- विजेंद्र यादव (यादव)
- मदन सहनी (निषाद)
🟡 RLM के मंत्री
- दीपक प्रकाश कुशवाहा (कोइरी) - उपेंद्र कुशवाहा के बेटे
कुर्मी, कोइरी, यादव, निषाद, वैश्य और मझोले पिछड़े वर्गों को बड़े पैमाने पर प्रतिनिधित्व मिला है। यह स्पष्ट करता है कि एनडीए ने अपने सबसे बड़े वोटबैंक को मजबूती से साध रखा है।
▶️ दलित समुदाय की स्थिति - कुल 5 मंत्री
नीतीश सरकार में दलित समुदाय को 5 सीटें दी गई हैं। इनमें मुसहर, दुसाध, पासी और रविदास - सभी वर्गों को आवाज़ मिली है।
🟡 बीजेपी के दलित मंत्री
- लखेंद्र पासवान (दुसाध)
- सुनील कुमार (रविदासी)
- जेडीयू का दलित चेहरा
- अशोक चौधरी (मुसहर)
🟡 एलजेपी (आर) का दलित मंत्री
- संजय पासवान (पासवान)
🟡 HAM का दलित मंत्री
- संतोष सुमन (पासी) - जीतनराम मांझी के बेटे
दलित समुदाय में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दुसाध समाज को मिला है।
🟡 मुस्लिम कोटे से कितने मंत्री?
- नए मंत्रिमंडल में सिर्फ एक मुस्लिम चेहरा शामिल है -जमा खान (जेडीयू)
जेडीयू ने अपने तय हिस्से से उन्हें दोबारा मंत्री बनाया है। यह प्रतीकात्मक लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।
▶️ कैसा है कुल जातीय गणित?
नीतीश कुमार ने इस मंत्रिमंडल में जातीय प्रतिनिधित्व का ऐसा संतुलन बैठाया है, जिससे सभी समुदायों को अपनी उपस्थिति महसूस हो सके। बिहार की राजनीति में जाति सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि चुनावी जीत का फॉर्मूला है, और इस कैबिनेट में वही फॉर्मूला साफ नजर आता है।
- सवर्ण: 8
- OBC-EBC-वैश्य: 13
- दलित: 5
- मुस्लिम: 1
यानी एनडीए ने बिहार के हर सामाजिक वर्ग को संतुलित संदेश देने की कोशिश की है। सवर्ण और पिछड़ा वर्ग दोनों को भरपूर हिस्सा दिया गया है, जबकि दलित और अल्पसंख्यक समाज को भी प्रतिनिधित्व मिला है।












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