Bihar Election: राहुल गांधी के फेक वोटिंग पर मुस्कराए CEC, बोले- जरूरत हुई तो बुर्कानशीं वोटर की होगी जांच
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का चुनावी बिगुल बज चुका है। पटना में हुए चुनाव आयोग की बैठक में चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया जिसके तहत दो चरणों में चुनाव कराया जाएगा। पहले फेज में 6 नवंबर को और दूसरे चरण में 11 नवंबर को चुनाव होगा।
इस दौरान चुनाव आयोग ने फर्जी वोटिंग (Fake Voting) और मतदाता पहचान को लेकर अपनी तैयारियों का जायजा दे दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब मुख्य चुनाव आयुक्त से राहुल गांधी के फर्जी वोटिंग को लेकर सवाल किया गया तो मुस्करा उठे।

CEC ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि चुनाव में किसी भी तरह की फर्जी वोटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बुर्कानशीं और पर्दानशीं मतदाताओं की पहचान की जांच भी की जाएगी।
बुर्कानशीं और पर्दानशीं मतदाताओं की जांच
CEC ने बताया कि यदि किसी मतदाता का चेहरा पूरी तरह ढका हुआ होगा, तो मतदान बूथ पर मौजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और चुनाव कर्मी पहचान की प्रक्रिया करेंगे। आयोग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आइडेंटिटी वेरिफिकेशन के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति फर्जी तरीके से वोटिंग में शामिल न हो और चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो।
SIR पर बोले चुनाव आयुक्त
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कई बार सवाल उठाए थे। CEC ज्ञानेश कुमार ने इस सवाल पर मुस्कुराते हुए कहा कि 30 सितंबर को अंतिम SIR सूची जारी की गई थी। इस सूची में लगभग 69 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें मृत मतदाता, डुप्लिकेट वोट, स्थायी प्रवासी, भारत के नागरिक न होने वाले और फर्जी वोट शामिल थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि चुनाव के दौरान रिटर्निंग अफसर पूरी प्रक्रिया के तहत काम करते हैं। आयोग का ध्यान केवल कानून और नियमों के पालन पर होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक बयानबाजी या उथल-पुथल पर आयोग ध्यान नहीं देता, क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है।
चुनाव की निष्पक्षता पर जोर
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सभी चुनाव अधिकारी नियमों के तहत काम करें। किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जी मतदान की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है। इस बार विशेष रूप से SIR के माध्यम से बुर्कानशीं और पर्दानशीं मतदाताओं की पहचान प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया गया है।












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