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Bakhri Assembly Seat: SC आरक्षित सीट पर CPI की पतली जीत के बाद इस बार त्रिकोणीय टक्कर की संभावना

Bakhri Assembly Seat: यह सिर्फ़ एक सीट नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राजनीतिक संतुलन और प्रशासनिक पारदर्शिता की कसौटी बन चुकी है। बेगूसराय की बखरी विधानसभा सीट, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में है। यहां जीत और हार का फासला 2020 में महज़ 777 वोट का था, लेकिन मुद्दों की गहराई मीलों लंबी है। आइए समझते हैं सियासी समीकरण, जानते हैं माहौल...

चुनावी पृष्ठभूमि
2020 में वामदल (CPI) के सूर्यकांत पासवान ने भाजपा के रामशंकर पासवान को बेहद करीबी मुकाबले में हराया था। लेकिन यह जीत CPI की ताकत कम और महागठबंधन की एकजुटता का परिणाम ज़्यादा थी। अब 2025 में हालात बदले हैं, विपक्ष INDIA गठबंधन में दरारें दिख रही हैं, जबकि NDA जातीय आधारों पर रणनीति मजबूत कर रहा है।

Bakhri Assembly Seat

बखरी का जातीय और सामाजिक समीकरण इसे खास बनाता है। दलित (SC) आबादी का प्रभाव, पिछड़े वर्गों का समर्थन और युवा वर्ग की नाराज़गी मिलकर चुनावी समीकरण को उलझा रहे हैं।

प्रमुख चुनावी मुद्दे
1. SIR विवाद और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी
बिहार में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो चुके हैं।

बखरी जैसे इलाकों में दलित और वंचित वर्गों के नाम कटने की आशंका ने माहौल को गरमा दिया है।

कांग्रेस, RJD और CPI इस मुद्दे को "लोकतंत्र की हत्या" बताकर जनता से सीधे संवाद बना रहे हैं।

2. बेरोजगारी और पलायन
बखरी विधानसभा क्षेत्र में आज भी रोजगार के अवसर सीमित हैं।

स्थानीय युवाओं में सरकारी नौकरी और स्वरोजगार की कमी को लेकर नाराज़गी है।

कन्हैया कुमार जैसे नेताओं ने हाल ही में इसे मुख्य जनमुद्दा बनाने की कोशिश की है।

3. कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार
ग्रामीण इलाकों में छोटे अपराधों से लेकर ज़मीन विवाद तक की घटनाएं आम हो गई हैं।

कांग्रेस और वामपंथी दल सरकार पर 'अपराधमुक्त शासन' के नारे को खोखला बताकर हमला बोल रहे हैं।

4. जातीय ध्रुवीकरण और राजनीतिक ध्रुवीकरण
बखरी की जातीय संरचना में दलित, पासवान, कोइरी और पिछड़े वर्ग प्रमुख भूमिका में हैं।

BJP और JDU इस ध्रुवीकरण को साधने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं CPI-RJD का गठबंधन इसे 'समाजिक न्याय बनाम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण' के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

राजनीतिक समीकरण और संभावित उम्मीदवार

गठबंधन/दल संभावित उम्मीदवार पृष्ठभूमि/स्थिति
CPI (महागठबंधन) सूर्यकांत पासवान मौजूदा विधायक, CPI से SC नेता, 2020 में करीबी जीत
RJD उपेंद्र पासवान पूर्व विधायक, RJD का स्थानीय जनाधार
NDA (BJP) रामशंकर पासवान 2020 में करीबी हार, दोबारा टिकट की संभावना
JD(U) नया चेहरा संभव BJP-JDU तालमेल के तहत चुनाव लड़ने की संभावना
जन सुराज युवा स्थानीय चेहरा भ्रष्टाचार, शिक्षा और न्याय को मुद्दा बना रहा है

लोगों की जमीनी समस्याएं

रोज़गार और स्वरोजगार का संकट

सरकारी योजनाओं का लाभ गांवों तक नहीं पहुँच रहा।

मनरेगा के तहत मजदूरी समय से नहीं मिल रही।

शिक्षा और स्वास्थ्य का अभाव

सरकारी स्कूलों की स्थिति ख़राब और शिक्षक अनुपस्थित।

PHC में डॉक्टरों की कमी और दवाओं का टोटा।

सड़क और सिंचाई की स्थिति

बारिश के मौसम में बखरी प्रखंड के कई गांव जलभराव से घिर जाते हैं।

बाढ़ और सूखा - दोनों स्थिति से किसान परेशान रहते हैं।

चुनावी दस्तावेज़ और वोटर लिस्ट का डर

कई दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को अब SIR के चलते नाम कटने का डर सता रहा है।

इस बार क्या है माहौल?
बखरी विधानसभा सीट पर मुकाबला इस बार सिर्फ़ पार्टी बनाम पार्टी का नहीं है, यह सत्ता बनाम जनता के मुद्दों, विकास बनाम जातीय संतुलन, और लोकतांत्रिक पारदर्शिता बनाम चुनावी काग़ज़ी चालबाज़ी का भी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या CPI की वापसी होगी, या RJD अपना पुराना जनाधार दोबारा पाएगा, या NDA एक नई रणनीति से बाज़ी मारेगा? जन सुराज के लिए भी यह सीट "टेस्टिंग ग्राउंड" हो सकती है।

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