Bihar News: शराबबंदी से उठ रहे कई सवाल, अब विकल्प के तौर पर नशीली दवाओं का हो रहा इस्तेमाल
Bihar News: बिहार में शराब पर प्रतिबंध के कारण कई अनपेक्षित परिणाम सामने आए हैं। लोग शराब के विकल्प के रूप में खुलेआम नशे की ओर रुख कर रहे हैं। आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब नशे के लिए इन पदार्थों पर निर्भर है। अवैध शराब के विपरीत, नशीली दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है, जिससे इनकी खपत बढ़ रही है। नतीजतन, तस्करों की संख्या भी बढ़ रही है।
सीमावर्ती इलाके मादक पदार्थों का बिक्री केंद्र: इंडोएपाल के पास के सीमावर्ती इलाके मादक पदार्थों की बिक्री के केंद्र बन गए हैं। ये क्षेत्र अब मादक पदार्थों के केंद्रों के रूप में जाने जाते हैं, जो पूरे जिले में मादक पदार्थों की आपूर्ति करते हैं। यह स्थिति एक कठोर वास्तविकता प्रस्तुत करती है।

युवाओं में नशीली दवाओं का प्रचलन: युवा वर्ग इन नशीले पदार्थों का सेवन खास तौर पर करता है। पहले शराब के आदी रहे युवा अब इसे महंगा पाते हैं और इसके बजाय सस्ती दवाओं का सेवन करते हैं। ये नशीले पदार्थ उनके बजट में फिट बैठते हैं और पुलिस कार्रवाई का जोखिम भी कम होता है।
सीमावर्ती इलाकों में तस्कर सक्रिय रूप से भारत से नेपाल और नेपाल से नेपाल तक नशीले पदार्थ भेजते हैं और अच्छा-खासा मुनाफा कमाते हैं। सीमावर्ती इलाकों में लगातार हो रही मादक पदार्थों की बरामदगी से तस्करों की मौजूदगी का पता चलता है। ताजा घटना भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सीतामढ़ी के भिट्ठा थाना क्षेत्र में हुई।
नशीले पदार्थों की जब्ती और गिरफ्तारी: एसएसबी के जवानों ने भिट्ठा पुलिस की मदद से भिट्ठामोड़ स्थित चांदनी इलेक्ट्रॉनिक्स पर छापा मारा। उन्होंने कई प्रतिबंधित दवाएं जब्त कीं और दुकानदार कार्तिकेश झा को गिरफ्तार कर लिया। जब्त की गई वस्तुओं में 210 नेत्रहेट टैबलेट थे।
इसके अलावा अलग-अलग बैचों के स्पास्मो प्रॉक्सीवॉन प्लस कैप्सूल, 10 आईपाम टैबलेट, छह तेजोविन इंजेक्शन (प्रत्येक 1 एमएल) और 100 एमएल आरटी रेक्स सिरप शामिल थे। यह मुद्दा शराबबंदी के कारण नशीली दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को उजागर करता है। वहीं सवाल उठ रहे हैं कि शराबबंदी के फायदे से ज़्यादा नुकसान ही हो रहा है।












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