बिहार में बाढ़ की विनाश लीला, मौतों का आंकड़ा 400 के पार
ना रहने का ठिकाना, न खाने के लिए दाना , भुखमरी के कगार पर पहुंचे लोगों के पास सबसे बड़ी समस्या यह है कि किस तरह से बूढ़े और बच्चों का ख्याल रखा जाए लेकिन मजबूरी ही कुछ ऐसी है।
पटना। बिहार में आई भयानक बाढ़ के कहर ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। इस बाढ़ की भयानक विनाश लीला ने पीड़ित लोगों को ऐसा दिन दिखा दिया जिसकी किसी ने भी कल्पना नहीं की होगी।

ना रहने का ठिकाना, न खाने के लिए दाना , भुखमरी के कगार पर पहुंचे लोगों के पास सबसे बड़ी समस्या यह है कि किस तरह से बूढ़े और बच्चों का ख्याल रखा जाए लेकिन मजबूरी ही कुछ ऐसी है कि लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते।

एक तरफ भूख से तड़प रहा बच्चा तो दूसरी तरफ बीमार लाचार बुजुर्ग की हालत देख लोग सहम जाते हैं। बिहार में बाढ़ की त्रासदी का नजारा बहुत भयावह है। नदी के किनारे शरण लिए लोगों के सामने कुछ ऐसे मौत का नजारा देखने को मिला जिसे देखकर सभी चौंक गए।

आप तस्वीर देखकर यह अंदाज कर सकते हैं कि किस तरह लोगों ने अपने आप को संभाला होगा जब उनके सामने ऐसी दर्दनाक मौत देखने को मिली होगी। फिर भी लोगों ने अपना हौसला बरकरार रखा और जहां तक संभव हो सका उसके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी पूरी की।

कई ऐसे लोगों की मौत हो गई जिनके परिजन उन्हें अब तक लापता समझ रहे हैं लेकिन बाढ़ पीड़ित लोगों ने उनका भी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरा किया जिनके परिजन वहां नहीं थे।

ऊंची जगह पर अपने पूरे परिवार के साथ जिल्लतभरी जिंदगी जीने को मजबूर बाढ़ पीड़ित लोग सिर्फ भगवान पर ही भरोसा कर रहे थे कि इस भयानक बाढ़ प्रकोप से हमें और हमारे परिवार को सुरक्षित रखें। दिन-रात उनको जागना पड़ा रहा है।

जंगली जानवरों से लेकर विषैले सांप और पानी के प्रकोप से लोग दहशत में जी रहे हैं। हलांकि सरकार के द्वारा लोगों के लिए उचित सुविधा का प्रबंध किया गया है लेकिन यह सारे प्रबंध उस वक्त खोखले साबित हो जाते हैं जब लोग पेटभर खाना नहीं खा पाते क्योंकि सरकार के द्वारा दिए जाने वाले भोजन के एक पैकेट से लोगों की भूख नहीं मिटती।

मजबूरन लोग आधा पेट खाकर दिन और रातें करते हैं। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जिसे भोजन भी नसीब होता।













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