ओडिशा: बांस हस्तशिल्प में रोजगार पाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं
कोविड -19 महामारी के दौरान, ओडिशा सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम ने महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए। कला योजना से प्रेरित होकर अब तक 30 महिलाएं सफल हस्तशिल्प कलाकार बन गई हैं।
भुवनेश्वर, 31 अगस्त। कोविड -19 महामारी के दौरान, ओडिशा सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम ने महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए। कला योजना से प्रेरित होकर अब तक 30 महिलाएं सफल हस्तशिल्प कलाकार बन गई हैं। सिंघनपल्ली गांव की युवतियां पारंपरिक बांस हस्तशिल्प और घरेलू सामान को आधुनिकता का नया रंग देकर आत्मनिर्भर बन गई हैं।

राज्य में पहली बार ओबीसी महिलाओं ने कला योजना से जुड़कर कुशल हस्तशिल्प कलाकारों के रूप में खुद को स्थापित किया है, जबकि बारगढ़ जिले के वेडेन ब्लॉक के सिंघनपल्ली गांव की मां जागृति और बाबा धबलेश्वर महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) आत्मनिर्भर बन गए हैं। मां जागृति एसएचजी की अध्यक्ष पिंकी प्रधान ने कहा, "हमारी टीम के सदस्यों के समर्पण, कड़ी मेहनत और लगन ने उन्हें कारीगरों का दर्जा दिलाया है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम ने इसे संभव बनाया है।
यह भी पढ़ें: ओडिशा के ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की सप्लाई के लिए केंद्र देगी 5280 करोड़ रुपए
बाबा धबलेश्वर एसएचजी समूह की अध्यक्ष माधुरी प्रधान ने कहा कि महामारी के दौरान राज्य सरकार का कौशल विकास कार्यक्रम बहुत मददगार रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी सारी युवा महिलाएं महामारी के दौरान भी अच्छी कमाई कर रही हैं। लॉकडाउन के दौरान सिंघनपल्ली गांव की महिलाएं और लड़कियां बेरोजगार थीं। उन्होंने जिला उद्दोग अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया और अब वे अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम हैं और बेहतर जिंदगी जी रही हैं। इस योजना के तहत 30 महिलाओं और बालिकाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। भेदन प्रखंड हस्तशिल्प विकास अधिकारी ने कहा कि बांस उत्पादों के लिए सरकार हर तरह की मदद देगी, महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा ट्रेनिंग देगी और हर तरह की सरकारी मदद देगी।












Click it and Unblock the Notifications