ओडिशा: राज्य सरकार ने जमीन एग्रीमेंट पर 2 प्रतिशत घटाई स्टांप ड्यूटी, रियल एस्टेट सेक्टर को होगा फायदा
रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देते हुए ओडिशा सरकार ने जमीन एग्रीमेंट पर लगने वाले स्टांप शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है।
भुवनेश्वर, 9 सितंबर। रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देते हुए ओडिशा सरकार ने जमीन एग्रीमेंट पर लगने वाले स्टांप शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया है। ओडिशा विधानसभा ने बुधवार को भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 में संशोधन कर स्टांप ड्यूटी को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया। संशोधनों को पेश करने वाले राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुदाम मरंडी ने कहा कि स्टांप शुल्क में कमी से रियल एस्टेट के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार होगा।

बिक्री/विकास करार/निर्माण करार में संशोधित प्रावधानों के अनुसार कब्जे की सुपुर्दगी और परिवार के सदस्यों के अलावा अन्य व्यक्ति को अचल संपत्ति बेचने के लिए अधिकृत करने वाले पॉवर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के अनुसार, दो प्रतिशत का स्टांप शुल्क लगाया जाएगा। जब विकास अनुबंध और पॉवर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) एक ही संपत्ति से जुड़े एक ही पक्ष के बीच निष्पादित किया जाता है, और विकास समझौते पर दो प्रतिशत स्टांप शुल्क का भुगतान किया जाता है, तो पावर ऑफ अटॉर्नी पर स्टांप शुल्क के रूप में केवल 1,000 की मामूली राशि का भुगतान किया जाएगा।
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सुदाम मरंडी ने इस अवसर पर कहा कि ओडिशा में अचल संपत्ति परियोजनाओं की लागत स्टाम्प शुल्क में कमी के बाद कम हो जाएगी, जिसका न केवल अर्थव्यवस्था पर लाभकारी प्रभाव पड़ेगा, बल्कि सभी श्रेणियों के लोगों के लिए किफायती आवास के निर्माण में भी काफी योगदान होगा। संशोधन के अनुसार राज्य के भीतर किसी भी अचल संपत्ति की बिक्री के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी के निष्पादन के लिए परिवार के सदस्यों के दायरे में पांच और लोगों - बहू, पोता, पोती, दादा और दादी को जोड़ा गया है, जिनके लिए स्टांप शुल्क 1,000 रुपए लागू होगा।












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