ओडिशा सरकार ने नेशनल पार्कों और टाइगर रिजर्वों से पुनर्वास की सहायता राशि में किया इजाफा, अब मिलेंगे 15 लाख
भुवनेश्वर, जुलाई 30। ओडिशा सरकार ने टाइगर रिजर्वों और अभयारण्यों को लोगों से बचाए रखने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने गांवों और मानव बस्तियों के पुनर्वास को प्रोत्साहित करने के लिए पुनर्वास मुआवजे में वृद्धि का ऐलान किया है। इसके अलावा, वनवासियों के जंगल से छोड़ने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया है, ऐसे लोग अब सिर्फ ग्राम सभा को सूचित करके जंगल से बाहर जा सकेंगे।

5 लाख रुपए बढ़ाई गई पुनर्वास वित्तीय सहायता की राशि
इसके संशोधित स्थानांतरण दिशानिर्देशों के तहत, प्रत्येक परिवार को अब अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों (एनपी), टाइगर रिजर्वों और दुर्गम वन क्षेत्रों जैसे संरक्षित क्षेत्रों (पीए) से पुनर्वास के लिए 15 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। बता दें कि, मौजूदा राज्य पुनर्वास नीति 2016 के तहत अभी तक ऐसे परिवारों को 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती थी।
अन्य सरकारी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
सहायता घटक में 5 लाख रुपये की बढ़ोतरी के अलावा, वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने यह भी फैसला किया है कि पुनर्वास पैकेज का लाभ उठाए बिना बाहर जाने वाले व्यक्तिगत परिवारों को भी 5 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिल सकता है। पुनर्वास पैकेज में एक आवासीय इकाई, पानी और बिजली कनेक्शन के अलावा सरकारी योजनाओं के अभिसरण से अन्य सहायता सेवाएं भी शामिल की गई हैं।
ग्राम सभा की सहमति की जरूरत नहीं
जानकारी के मुताबिक, अभयारण्यों, एनपी और बाघ अभयारण्यों से स्थानांतरण में एक रोड़ा मानव बस्तियों और गांवों का पूरी तरह से स्थानांतरण था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'अतीत में हमारा अनुभव रहा है कि हालांकि अधिकांश निवासी स्थानांतरित होने के लिए सहमत हैं, लेकिन उनमें से कुछ लोगों की अनिच्छा के कारण प्रक्रिया रूकी हुई थी।' उन्होंने बताया कि ये सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है कि अन्य स्थान पर स्थानांतरित होने वाले परिवार को पुनर्वास पैकेज के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही अब ऐसे परिवारों को अब ग्राम सभा की सहमति लेने की जरूरत नहीं होगी। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, वे केवल निकाय को सूचित कर सकते हैं और शिफ्ट कर सकते हैं।












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