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Hamidia Hospital Bhopal: अस्पताल में तकनीकी क्रांति, किडनी मरीजों के लिए वरदान बनेगी बाइ-प्लेन कैथ लैब

Hamidia Hospital Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। जल्द ही यहां प्रदेश की पहली हाईटेक बाइ-प्लेन कैथ लैब की स्थापना होने जा रही है, जो विशेष रूप से किडनी रोगियों के लिए सुरक्षित हृदय जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

7.7 करोड़ रुपये की लागत से जापान से आयातित यह अत्याधुनिक मशीन किडनी और हृदय रोगियों के लिए एक नई आशा की किरण लेकर आ रही है।

Technical revolution in Hamidia Hospital Bi-plane Cath Lab will be a boon for kidney patients

किडनी मरीजों के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक?

पारंपरिक कैथ लैब में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी प्रक्रियाओं में एक विशेष प्रकार की डाई-कॉन्ट्रास्ट मीडियम-का उपयोग किया जाता है, जिससे हृदय की रक्त वाहिकाओं की स्थिति को एक्स-रे इमेजिंग के माध्यम से देखा जा सकता है। लेकिन यह डाई किडनी रोगियों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, क्योंकि यह कॉन्ट्रास्ट इंड्यूस्ड नेफ्रोपैथी (CIN) जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकती है, जिससे किडनी फेल होने तक की नौबत आ सकती है।

ऐसे मरीजों के लिए बाइ-प्लेन कैथ लैब एक जीवनरक्षक तकनीक साबित होगी, क्योंकि इसमें बहुत कम मात्रा में डाई का उपयोग होता है और 3डी इमेजिंग के माध्यम से अत्यधिक सटीक जानकारी प्राप्त होती है। इससे न सिर्फ निदान बेहतर होता है, बल्कि उपचार की गुणवत्ता और सुरक्षा भी बढ़ती है।

क्या है बाइ-प्लेन कैथ लैब और कैसे करती है काम?

दो सी-आर्म सिस्टम: यह मशीन दो सी-आर्म्स (C-Arm Imaging Arms) से लैस है, जो एक ही समय में दो अलग-अलग कोणों से शरीर के अंगों की इमेजिंग करती है। इससे 360 डिग्री विजुअल मिलते हैं और निदान अधिक सटीक हो जाता है।

कम डाई, अधिक सुरक्षा: एंजियोग्राफी में डाई की मात्रा काफी कम हो जाती है, जिससे किडनी पर दुष्प्रभाव का खतरा नगण्य हो जाता है।

तीव्र और विस्तृत प्रक्रिया: दो कोणों से एक साथ स्कैनिंग के चलते प्रक्रिया तेज होती है और डॉक्टर को पूरी तस्वीर बेहतर ढंग से समझ में आती है।

बेहतर निर्णय क्षमता: हार्ट ब्लॉकेज, वाल्व डिसऑर्डर या स्ट्रोक के खतरे जैसी स्थितियों में डॉक्टर सही और त्वरित निर्णय ले सकते हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार, मशीन का इंतज़ार

हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक-वन की तीसरी मंजिल पर इस नई कैथ लैब के लिए विशेष कक्ष और तकनीकी सेटअप तैयार कर लिया गया है। इलेक्ट्रिकल वायरिंग, एयर हैंडलिंग यूनिट, रेडिएशन शील्डिंग और अन्य सुरक्षात्मक प्रबंध पूरे किए जा चुके हैं। अब बस मशीन की डिलीवरी का इंतज़ार है, जो अगले 60 दिनों में जापान से समुद्री मार्ग से भोपाल पहुंचेगी।

अधीक्षक डॉ सुनीत टंडन ने बताया, "इस मशीन का ऑर्डर पहले ही दे दिया गया था। सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह सुविधा न सिर्फ राजधानी बल्कि पूरे मध्य भारत के मरीजों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।"

Hamidia Hospital Bhopal: पुरानी कैथ लैब भी रहेगी चालू

शुरुआती योजना में पुराने भवन को हटाकर नया बहुमंजिला ढांचा तैयार किया जाना था, जिसके चलते पुरानी कैथ लैब को हटाने की योजना थी। लेकिन अब नए बदलाव के तहत, पुरानी कैथ लैब को भी यथावत रखा जाएगा, जिससे हमीदिया में दो कैथ लैब एक साथ कार्य करेंगी। यह निर्णय अत्यधिक रोगियों की संख्या और भविष्य की मांग को देखते हुए लिया गया है।

मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सुविधा में एक और उपलब्धि

हमीदिया अस्पताल, जो गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) से संबद्ध है, प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। यह 2500 से अधिक बेड और प्रतिदिन 5000+ ओपीडी मरीजों की सेवा करता है। यहां हृदय, किडनी, न्यूरोलॉजी और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए सुपर-स्पेशलिटी सुविधाएं उपलब्ध हैं। नई बाइ-प्लेन कैथ लैब से इसकी क्षमताएं और मजबूत होंगी।

Hamidia Hospital Bhopal: डॉक्टरों और विशेषज्ञों की राय

डॉ राजेश शर्मा, हृदय रोग विशेषज्ञ, ने कहा: "बाइ-प्लेन कैथ लैब जैसी तकनीक हृदय चिकित्सा को एक नई दिशा देती है। यह मरीज की जान बचाने के साथ-साथ चिकित्सकों को सटीक निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।"

डॉ मीनाक्षी वर्मा, नेफ्रोलॉजिस्ट, कहती हैं: "किडनी रोगियों में हार्ट डिजीज बहुत आम है, लेकिन उनकी जांच जोखिम भरी होती है। यह तकनीक एक बड़ी राहत होगी।"

सामाजिक प्रतिक्रिया और राजनीतिक दृष्टिकोण

वहीं, राजनीतिक हलकों में भी यह विषय चर्चा में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देने के प्रयासों की सराहना की जा रही है। हालांकि, विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया है कि "तकनीक लाना आसान है, लेकिन उसका रखरखाव और उपयोग उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है।"

भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं

इस नई कैथ लैब के साथ कई सकारात्मक संभावनाएं जुड़ी हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • प्रशिक्षित स्टाफ की कमी: इस मशीन के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त टेक्नीशियन और डॉक्टर चाहिए होंगे।
  • रखरखाव का मुद्दा: विदेशी मशीन के लिए लगातार सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
  • प्रक्रियाओं का बोझ: दो लैब होने के बावजूद मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि प्रक्रियाएं जल्दी बुक हो सकती हैं, जिससे वेटिंग बढ़ सकती है।

चिकित्सा में क्रांति की ओर एक कदम

हमीदिया अस्पताल में बाइ-प्लेन कैथ लैब की स्थापना केवल एक तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य में सुधार और मरीजों की सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम है। यदि यह सुविधा समय पर शुरू हो जाती है और उसका संचालन सुदृढ़ रूप से किया जाता है, तो यह मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी बना सकती है।

रिपोर्ट: [लक्ष्मी नारायण मालवीय ]

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