MP News: भोपाल में शिवराज सिंह चौहान का बयान: बार-बार चुनावों के कारण फैसलों में होती है रुकावट
Bhopal news: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को एक अहम बयान दिया, जिसमें उन्होंने देश में बार-बार होने वाले चुनावों के कारण सरकारी फैसलों में आ रही रुकावटों और विकास में हो रही बाधाओं पर चिंता जताई।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बार-बार चुनाव होने के कारण सरकार के फैसले अक्सर चुनावी नजरिए से प्रभावित होते हैं और इससे विकास कार्यों में गति नहीं मिल पाती। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार तो ऐसे फैसले भी करने पड़ते हैं, जो सिर्फ वोट हासिल करने के लिए होते हैं, न कि जनता के वास्तविक हितों के लिए।

भोपाल में एक प्राइवेट कॉलेज में आयोजित 'एक देश-एक चुनाव' कार्यक्रम में छात्रों के साथ संवाद करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह विचार साझा किए। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से गवर्नेंस पर नकारात्मक असर पड़ता है। चुनावों के चलते कामकाजी माहौल में कई बाधाएं उत्पन्न होती हैं और विकास कार्यों में रुकावट आ जाती है।
देश में चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
शिवराज ने कहा, "हमारे देश में और कुछ हो या न हो, लेकिन सभी राजनीतिक दल लगातार अगला चुनाव जीतने की योजना बनाते रहते हैं। पांच साल, 12 महीने, हर हफ्ते, 24 घंटे हर पार्टी इसी तैयारी में जुटी रहती है। इससे न केवल सरकार की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, बल्कि जरूरी निर्णय भी समय पर नहीं लिए जा पाते हैं।"
मुख्यमंत्री ने इस बात का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए। इसके बाद चुनावी थकान भी पूरी नहीं हुई थी कि चार महीने बाद लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई। उन्होंने कहा, "विधानसभा चुनाव के दौरान कई महीने तक विकास कार्यों में कोई प्रगति नहीं हो पाई, क्योंकि आचार संहिता और कोड ऑफ कंडक्ट के कारण सरकार के फैसले और योजनाओं को लागू करने में रोक लग गई थी। फिर चार महीने बाद लोकसभा चुनाव आ गए और इससे विकास कार्यों पर एक बार फिर से असर पड़ा।"
चुनावों की थकान से जूझता लोकतंत्र
शिवराज ने यह भी बताया कि इन चुनावों की वजह से राज्यों में कई महीनों तक कामकाजी माहौल ठप रहता है, क्योंकि हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी चुनावी दौर शुरू हो जाते हैं। इससे पूरे देश की राजनीति और सरकारी कार्यों की दिशा प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनावी मौसम के बीच, राज्यों और केंद्र में सरकारों के बीच तालमेल की कमी होती है, जिससे विकास योजनाओं को पूरा करने में परेशानी होती है।
'एक देश-एक चुनाव' की आवश्यकता
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने 'एक देश-एक चुनाव' के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया। उनका कहना था कि अगर चुनावों की प्रक्रिया को एक ही समय पर आयोजित किया जाए तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि विकास कार्यों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पैसों की बचत होगी और लोकतंत्र की प्रक्रियाओं में भी स्थिरता आएगी।
शिवराज ने कहा, "अगर देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो इससे न सिर्फ सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आएगी, बल्कि विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। इसके अलावा, चुनावों में होने वाली खर्चों की भी बचत होगी, क्योंकि अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग तैयारी करने की बजाय सभी चुनाव एक साथ आयोजित किए जा सकते हैं।"
विकास की गति में रुकावट पर चिंता
उन्होंने आगे कहा कि चुनावी मौसम के दौरान विकास कार्य ठप हो जाते हैं और सरकारें चुनावी राजनीति के कारण कभी सही दिशा में फैसले नहीं ले पातीं। कई बार ऐसे फैसले भी लिए जाते हैं, जो केवल वोट पाने के लिए होते हैं और ये फैसले जनता के हित में नहीं होते। शिवराज ने कहा कि इस कारण सरकारों को अपनी प्राथमिकताओं का पुनः मूल्यांकन करना पड़ता है, जिससे समग्र विकास में रुकावट आती है।
शिवराज ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में इस बात की जरूरत है कि 'एक देश-एक चुनाव' की व्यवस्था लागू हो, ताकि देश के विकास की प्रक्रिया में कोई अवरोध न हो और लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत बने।
आगे की दिशा
इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने विद्यार्थियों को भी यह समझाया कि यदि 'एक देश-एक चुनाव' की दिशा में कदम उठाए जाते हैं तो यह न केवल चुनावी प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि विकास कार्यों को भी एक स्थिर और संरचित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस विचार पर राजनीतिक दलों को आपसी सहमति बनानी चाहिए ताकि देश में चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके और प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा में जोड़ा जा सके।












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