बीच सड़क पर रुका मंत्री का काफिला, इंसानियत के लिए झुका सिस्टम! घायल युवक को शिवराज ने खुद अस्पताल पहुंचाया
शनिवार को भोपाल के चेतक ब्रिज पर इंसानियत और सत्ता का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने हर किसी को चौंका दिया - एक ऐसा पल जब लालबत्ती वाले काफिले की रफ्तार किसी आम आदमी की जिंदगी बचाने के लिए थम गई। और उस काफिले में बैठे थे देश के केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान।
भीड़ देख रुके शिवराज, घायल की सुध ली
शिवराज सिंह चौहान उस वक्त अवधपुरी में जैन समाज के एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। सुबह करीब 11 बजे जब उनका काफिला चेतक ब्रिज से गुजर रहा था, तभी उन्होंने देखा कि सड़क किनारे भीड़ जुटी है, और बीच रास्ते पर एक युवक लहूलुहान अवस्था में पड़ा है।

मंत्री ने एक पल की भी देरी किए बिना अपने काफिले को रुकवाया। खुद गाड़ी से उतरकर मौके की स्थिति को देखा और तुरंत निर्णय लिया कि युवक को सरकारी एंबुलेंस या इंतजार में नहीं छोड़ा जा सकता।
काफिले की गाड़ी से अस्पताल रवाना, अधिकारी साथ भेजा
बिना किसी प्रोटोकॉल या सुरक्षा चिंता के, शिवराज सिंह चौहान ने अपने काफिले की एक गाड़ी को घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए भेजा। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ मौजूद एक जिम्मेदार अधिकारी को भी युवक के साथ रवाना किया, ताकि इलाज में कोई लापरवाही न हो।
इतना करके भी शिवराज नहीं रुके - उन्होंने मौके पर ही नजदीकी अस्पताल के डॉक्टर से फोन पर बात की, और कहा, "इस युवक का तुरंत इलाज शुरू करें। समय की एक-एक सांस कीमती है। किसी भी हालत में देरी नहीं होनी चाहिए।"
भीड़ में गूंजा एक ही नाम - "शिवराज भैया"
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, जैसे ही मंत्री का काफिला रुका, कई लोग हैरान रह गए। और जब उन्होंने देखा कि मंत्री स्वयं घायल की मदद के लिए आगे बढ़े हैं, तो कई की आंखें भर आईं। "आज भी राजनीति में संवेदनशीलता जिंदा है," यह बात वहां मौजूद हर शख्स कहता दिखा।
स्थानीय नागरिक राकेश दुबे ने कहा, "नेताओं के काफिले तो अक्सर लोगों को किनारे कर निकल जाते हैं, लेकिन शिवराज भैया जैसे नेता ही हैं, जो आम आदमी के लिए खुद रुक जाते हैं।"
प्रशासनिक मशीनरी हरकत में, इलाज शुरू
मंत्री के निर्देश के बाद अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया। युवक को तुरंत भर्ती किया गया, प्राथमिक इलाज के बाद उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घायल युवक की पहचान अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि वह पास के किसी कॉलेज का छात्र हो सकता है।
क्या सीखने की जरूरत है?
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि नेता वही, जो जनता के लिए खड़ा हो, वक्त पर साथ दे, और संवेदना न भूले। शिवराज सिंह चौहान का यह कदम एक उदाहरण है - उन अफसरों और नेताओं के लिए जो अकसर "हमारी ड्यूटी नहीं है" कहकर आगे बढ़ जाते हैं।












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