MP News: ठेले पर खजूर बेचने वाले दिव्यांग पन्नालाल को शिवराज सिंह चौहान ने दी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

shivraj singh chouhan: राजनीति के शोर और सत्ता के गणित के बीच कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो यह याद दिलाती हैं कि जनसेवा सिर्फ नीतियों और भाषणों तक सीमित नहीं होती, बल्कि इंसानियत के छोटे-छोटे कदमों से उसका असली अर्थ सामने आता है।

ऐसी ही एक मानवीय तस्वीर शुक्रवार को तब देखने को मिली, जब शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा के दिव्यांग फल विक्रेता पन्नालाल को अपने भोपाल स्थित आवास पर बुलाकर उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भेंट की।

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विदिशा की मुलाकात, जिसने कहानी बदल दी

यह पूरी कहानी 18 जनवरी की है, जब केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान विदिशा दौरे पर थे। उसी दौरान उनकी नजर एक ऐसे शख्स पर पड़ी, जो ठेले पर पिंड खजूर बेचते हुए भीड़ में अपनी रोजी-रोटी तलाश रहा था। दिव्यांग पन्नालाल हाथ में खजूर लेकर शिवराज की गाड़ी की ओर दौड़े। शिवराज रुके, उनसे बात की, खजूर खरीदे और वहीं एक मानवीय रिश्ता बन गया।

गरीबी, संघर्ष और एक छोटी-सी मांग

शिवराज ने बाद में बताया कि बातचीत के दौरान पन्नालाल ने अपनी मजबूरी साझा की। चलने-फिरने में दिक्कत, रोज़ ठेला लगाकर कमाने का संघर्ष और हर दिन की थकान। पन्नालाल ने बस एक ही बात कही-
"अगर एक मोटराइज्ड साइकिल मिल जाए, तो काम करना और आना-जाना आसान हो जाएगा।"
शिवराज के शब्दों में, "दोस्ती हो गई थी, और दोस्त के लिए तो करना ही पड़ता है।"

भोपाल में पूरा हुआ वादा

शुक्रवार को पन्नालाल को भोपाल बुलाया गया। शिवराज ने खुद उन्हें मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की चाबी सौंपी। इस दौरान उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा, "मैं मानता हूं कि हम सब एक परिवार हैं। परिवार के जो भाई-बहन पीछे रह गए हैं, जिनके जीवन में कष्ट और परेशानी है, उनकी मदद करना हमारा कर्तव्य है।" उनके मुताबिक, कई लोग गरीबी और परिस्थितियों के कारण पूरी जिंदगी संघर्ष में गुजार देते हैं, और अगर थोड़ा-सा सहारा मिल जाए, तो उनकी दुनिया बदल सकती है।

सिर्फ एक ट्राईसाइकिल नहीं, आत्मसम्मान की सवारी

पन्नालाल के चेहरे की मुस्कान उस पल का सबसे बड़ा प्रमाण थी कि यह मदद सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की ओर पहला कदम है। अब वे बिना किसी सहारे के दूर-दूर तक जा सकेंगे, ज्यादा आसानी से खजूर बेच सकेंगे और अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकेंगे।

बहुदिव्यांगों के लिए नई पहल

इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा संकेत भी दिया। उन्होंने कहा कि अब वे ऐसे बहुदिव्यांग लोगों को तलाशेंगे, जिन्हें रोजगार चलाने या आने-जाने में कठिनाई होती है, और उन्हें भी मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उनका मानना है कि सहायता अगर सही समय पर और सही व्यक्ति तक पहुंचे, तो वह जीवन की दिशा बदल सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि सत्ता में रहकर भी अगर संवेदना ज़िंदा रहे, तो नीतियों से पहले इंसान की मदद संभव है। विदिशा के एक साधारण ठेलेवाले से भोपाल तक की यह यात्रा सिर्फ पन्नालाल की नहीं, बल्कि उस भरोसे की भी है, जो आम आदमी को यह विश्वास दिलाती है कि उसकी आवाज़ सुनी जा सकती है।

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