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सीहोर अग्निकांड: प्रशासन बेखबर, पीड़ितों के लिए सड़क पर उतरे किसान, 41 हजार की मदद और आवास योजना की मांग

ग्राम पाटनी में बीते दिनों हुई भीषण आगजनी ने दो परिवारों की जिंदगी को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। कुछ ही मिनटों में आग ने घर, अनाज, कपड़े, जरूरी दस्तावेज और वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई पूंजी को राख में बदल दिया। अनुमान के मुताबिक इस हादसे में करीब 25 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

आग बुझने के बाद पीड़ित परिवारों के सामने सबसे बड़ा संकट छत, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का खड़ा हो गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद न कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही कोई जनप्रतिनिधि पीड़ितों का हाल जानने आया।

Sehore fire tragedy Farmers take to the streets to help victims offer 41 000 rupees in aid

प्रशासन की चुप्पी, किसानों का आक्रोश

जब प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली तो ग्राम पाटनी, चंदेरी और बिलकिसगंज के किसानों का सब्र जवाब दे गया। समाजसेवी एवं किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की मांग को लेकर सड़क का रुख किया। किसानों ने पहले सीहोर तहसील कार्यालय पहुंचकर नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा, इसके बाद कलेक्ट्रेट और जिला पंचायत कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन देकर मांग रखी कि पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए और उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना व मुख्यमंत्री आवास योजना का शीघ्र लाभ दिया जाए।

जनसहयोग बना सहारा

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि जहां सरकार और प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं पहुंची, वहीं ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर इंसानियत की मिसाल पेश की। किसी किसान ने 100 रुपये, किसी ने 500 रुपये तो किसी ने 1000 रुपये देकर पीड़ित परिवारों के लिए चंदा इकट्ठा किया। देखते ही देखते किसानों और ग्रामीणों ने 41 हजार रुपये की राशि एकत्र कर पीड़ित परिवारों को सौंपी, ताकि वे कम से कम कुछ दिनों का राशन-पानी और जरूरी सामान जुटा सकें।

ग्रामीणों का कहना है कि आग में सब कुछ जल जाने के कारण पीड़ित परिवारों के पास पहनने के लिए कपड़े तक नहीं बचे, बच्चे सदमे में हैं और पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।

सवालों के घेरे में सरकार

किसानों ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आम जनता अपने स्तर पर पीड़ितों की मदद कर सकती है, तो फिर सरकार और उसके प्रतिनिधि कहां हैं? क्या ग्रामीणों की पीड़ा इतनी छोटी है कि उस पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा गया? किसानों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक मदद का मामला नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी का भी प्रश्न है।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

ग्राम पाटनी सहित आसपास के गांवों के किसानों ने संयुक्त कलेक्टर रविंद्र परमार और नायब तहसीलदार अविनाश सोनानिया को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि-

  • पीड़ित परिवारों को तत्काल पर्याप्त राहत राशि प्रदान की जाए।
  • उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत शीघ्र पक्का आवास उपलब्ध कराया जाए।
  • आगजनी से हुए नुकसान का समुचित आकलन कर पुनर्वास की ठोस व्यवस्था की जाए।

समाजसेवी एमएस मेवाड़ा का बयान

इस मौके पर किसान एवं समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा ने कहा कि बिलकिसगंज, चंदेरी, रामाखेड़ी, पाटनी सहित आसपास के गांवों के किसानों ने मिलकर पीड़ित परिवारों के लिए 41 हजार रुपये की सहायता राशि एकत्र की है, लेकिन यह केवल अस्थायी सहारा है। जब तक शासन-प्रशासन आगे नहीं आएगा, तब तक पीड़ित परिवार सम्मानपूर्वक जीवन नहीं जी पाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक कोई भी सरकारी अधिकारी न तो पीड़ितों से मिलने पहुंचा और न ही कोई सहायता राशि दी गई, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इंसानियत की मांग

किसानों ने एक स्वर में मांग की कि सरकार तुरंत गांव पहुंचे, हालात का जायजा ले और पीड़ित परिवारों को सम्मान के साथ पुनर्वास दे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ दो परिवारों की नहीं, बल्कि पूरे गांव की पीड़ा है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन कब तक इस आगजनी पीड़ितों की सुध लेता है, या फिर किसानों को न्याय के लिए आगे और बड़ा संघर्ष करना पड़ेगा।

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