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MP News: संविधान बचाओ यात्रा की तारीख में परिवर्तन, इस दिन होगी शुरुआत; चंद्रशेखर आजाद दिखाएंगे हरी झंडी

samvidhan bachao yatra: दलित, पिछड़े और वंचित समाज के अधिकारों की मजबूत आवाज आजाद समाज पार्टी (भीम आर्मी) ने 'संविधान बचाओ यात्रा' के कार्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। यह यात्रा अब 6 दिसंबर को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर ग्वालियर से शुरू होगी।

पार्टी के प्रमुख नेता और डीपीएसएस (दलित पिछड़ा समाज संगठन) प्रमुख दामोदर सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की। यात्रा को हरी झंडी दिखाने का सम्मान नगीना से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को मिलेगा। यह यात्रा संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के हक के लिए एक बड़ा आंदोलन बनेगी, जो धीरेंद्र शास्त्री की 'हिंदू राष्ट्र यात्रा' के खिलाफ भी एक जवाब होगी।

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यात्रा का नया शेड्यूल: 6 दिसंबर से ग्वालियर में धमाल

दामोदर सिंह यादव ने जारी बयान में कहा, "साथियो, संविधान बचाओ यात्रा के कार्यक्रम और तिथियों में परिवर्तन किया गया है। यात्रा अब 06 दिसंबर को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के महापरिनिर्वाण दिवस पर ग्वालियर से ASP एवं भीम आर्मी प्रमुख सांसद आदरणीय चंद्रशेखर आजाद जी के द्वारा हरी झंडी दिखाकर शुरू की जाएगी।" यह बदलाव यात्रा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया गया है, ताकि अंबेडकर जयंती के महत्व को जोड़कर जनता में उत्साह पैदा हो।

यात्रा का पहला चरण ग्वालियर-चंबल संभाग से शुरू होगा, जो पिछोर में एक विशाल रैली के साथ समाप्त होगा। दूसरा चरण बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से होकर छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम तक पहुंचेगा। यात्रा के दौरान पाखंड, आडंबर और संविधान विरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा। दामोदर सिंह यादव ने कहा, "यह यात्रा वंचित समाज की एकजुटता का प्रतीक बनेगी। हम सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे ताकि धीरेंद्र शास्त्री की 'हिंदू राष्ट्र यात्रा' को गैर-संवैधानिक साबित कर सकें।"

'संविधान बचाओ यात्रा' का उद्देश्य और इतिहास

'संविधान बचाओ यात्रा' आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) और भीम आर्मी का प्रमुख अभियान है, जो संविधान पर कथित हमलों, दलित-आदिवासी-ओबीसी-अल्पसंख्यक वर्गों पर अत्याचार और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। 2023 में मध्य प्रदेश से शुरू हुई यह यात्रा राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में फैली, जहां चंद्रशेखर आजाद ने कोटा, भीलवाड़ा, पाली और नीमराना जैसे क्षेत्रों में रैलियां कीं। 2024 में महू (इंदौर) से एक और चरण शुरू हुआ, जहां खातेगांव विधानसभा में 'सत्ता परिवर्तन संकल्प' लिया गया।

इस यात्रा का मुख्य फोकस भाजपा सरकार की कथित 'संविधान विरोधी नीतियां', भ्रष्टाचार, शोषण और हिंदू राष्ट्र की मांगों का विरोध है। चंद्रशेखर आजाद, जो सहारनपुर हिंसा के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दलित आइकन बने, ने कहा था, "संविधान हमारा सबसे बड़ा हथियार है। इसे बचाना हमारी जिम्मेदारी।" यात्रा में जय भीम, जय भारत और जय मंडल के नारे गूंजते हैं।

चरण,तिथि,स्थान,प्रमुख गतिविधियां

  • पहला चरण,6 दिसंबर 2025 से,ग्वालियर-चंबल संभाग,"हरी झंडी, रैलियां, जनसंपर्क; पिछोर में समापन रैली"
  • दूसरा चरण,दिसंबर 2025 के अंत तक,"बुंदेलखंड (झांसी, छतरपुर आदि)",बागेश्वर धाम तक मार्च; पाखंड विरोधी अभियान
  • कानूनी मोर्चा,जनवरी 2026 से,सुप्रीम कोर्ट,PIL दाखिल; हिंदू राष्ट्र यात्रा पर रोक की मांग

चंद्रशेखर आजाद की भूमिका: दलित आइकन से सांसद तक

चंद्रशेखर आजाद (जन्म: 3 दिसंबर 1986), जिन्हें रावण के नाम से भी जाना जाता है, भीम आर्मी के संस्थापक और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना से सांसद चुने गए, वे उत्तर भारत के प्रमुख दलित नेता हैं। ग्वालियर में जून 2025 में अंबेडकर प्रतिमा विवाद पर उन्होंने बड़ा आंदोलन का संकेत दिया था, जहां दिग्विजय सिंह ने समर्थन जताया। उनकी सुरक्षा हाल ही में हरियाणा और जम्मू-कश्मीर तक बढ़ाई गई है। आजाद ने कहा, "यह यात्रा वंचितों की ताकत बनेगी। बाबा साहेब के सपनों को साकार करेंगे।"

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: समर्थन और विवाद

दामोदर सिंह यादव (डीपीएसएस प्रमुख): "लोग जागरूक हो चुके हैं। यह यात्रा धीरेंद्र शास्त्री के बहकावे का जवाब है।"
चंद्रशेखर आजाद: "संविधान बचाओ, जय भीम। ग्वालियर से नई क्रांति शुरू होगी।"
दिग्विजय सिंह (कांग्रेस): ग्वालियर में अंबेडकर प्रतिमा पर समर्थन जताया, लेकिन यात्रा पर चुप्पी।
भाजपा पक्ष: इसे 'राजनीतिक स्टंट' बताते हुए कहा कि संविधान सुरक्षित है।

कांग्रेस ने अप्रैल 2025 में अपनी 'संविधान बचाओ रैली' ग्वालियर से शुरू की थी, जहां राहुल-प्रियंका शामिल हुए। लेकिन यह यात्रा भीम आर्मी की अलग पहल है, जो वंचित वर्गों पर फोकस्ड है।

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